गोल्ड ने दिया 60% रिटर्न: क्या इस अक्षय तृतीया पर निवेश करें?

गोल्ड ने दिया 60% रिटर्न: क्या इस अक्षय तृतीया पर निवेश करें?
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भारत के निवेश परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है। पिछले दस वर्षों में भारत ने गोल्ड इन्वेस्टमेंट को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, गोल्ड ETF और सिल्वर कोइन्स के जरिए आसान और लोकप्रिय बनाया है, जिसमें रिटेल डिमांड, सेंट्रल बैंक खरीदारी और जियोपॉलिटिकल हेज शामिल हैं।

आइए गोल्ड के पिछले अक्षय तृतीया से 60% राइज को विस्तारपूर्वक समझें और जानें क्या अक्षय तृतीया 2026 एक बड़ा निवेश अवसर बन सकती है।

क्या है मामला?

वित्तीय वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया से पहले गोल्ड की प्राइस में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले अक्षय तृतीया के बाद से गोल्ड की प्राइस लगभग 60% बढ़ गई हैं। पिछले साल 15 अप्रैल को 10 ग्राम गोल्ड की प्राइस 95,500 रुपये थी, जो इस साल 18 अप्रैल को 1,57,450 रुपये के आसपास पहुंच गई है। MCX पर गोल्ड ₹1,54,500-1,55,000 के रेंज में ट्रेड कर रहा है। 2026 की शुरुआत से अब तक MCX गोल्ड में 8% या लगभग 12,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।

पिछले सप्ताह गोल्ड 2% चढ़ा जबकि सिल्वर 4% बढ़ा। प्राइस में यह उछाल ईरान युद्ध की अनिश्चितता, ऑइल प्राइस में तेजी और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के कारण हुआ है। सेंट्रल बैंक की लगातार खरीदारी, ग्लोबल ETF इनफ्लो और रिटेल डिमांड ने भी गोल्ड को सपोर्ट दिया है।

खरीदारी पैटर्न में बदलाव

अक्षय तृतीया से पहले गोल्ड की डिमांड दोनों चैनल्स पर मजबूत है, लेकिन खरीदारी का पैटर्न बदला हुआ नजर आ रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर गोल्ड ज्वेलरी की डिमांड पिछले साल की तुलना में 2 गुना बढ़ी है, सिल्वर 2.5 गुना और कोइन्स 2 गुना। साथ ही, फाइन ज्वेलरी की डिमांड 2 गुना और प्रीशियस ज्वेलरी 3.7 गुना बढ़ी है।

ऑफलाइन मार्केट में डिमांड स्थिर लेकिन सतर्क है। प्राइस हाई होने के कारण खरीदारी मुख्य रूप से 60,000 से 80,000 रुपये के रेंज में हो रही है। द हिंदू बिज़नेस लाइन के अनुसार, KISNA डायमंड एंड गोल्ड ज्वेलरी के सीईओ पराग शाह के मुताबिक, अक्षय तृतीया कंपनी की सालाना रेवेन्यू का 15-18% योगदान देती है। पुराने गोल्ड के एक्सचेंज से 25% तक ट्रांजेक्शन हो रहे हैं। उपभोक्ता अब लाइटवेट, डिजाइन वाले और डायमंड स्टडेड ज्वेलरी की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं।

गोल्ड बनाम डिजिटल विकल्प

हाई प्राइस के बावजूद डिमांड कम नहीं हुई, बल्कि रणनीति बदली है। निवेशक अब भारी फिजिकल ज्वेलरी की बजाय लाइटवेट 24K गोल्ड, 999.9+ प्योरिटी सिल्वर कोइन्स और बार की ओर बढ़ रहे हैं। मेकिंग चार्ज और स्टोरेज की समस्या से बचने के लिए गोल्ड ETF और सिल्वर ETF लोकप्रिय हो गए हैं। जनवरी 2026 में भारतीय गोल्ड ETF में 24,040 करोड़ रुपये का इनफ्लो आया, जो 106% की बढ़ोतरी है।

एक्सपर्ट्स गोल्ड को शॉर्ट टर्म ट्रेड की बजाय हेज के रूप में देखने की सलाह देते हैं। मनी कंट्रोल के अनुसार, टाटा म्यूचुअल फंड ने कहा कि प्राइस में गिरावट पर गोल्ड में निवेश का मौका है। MMTC-PAMP के MD समित गुहा के अनुसार, अक्षय तृतीया पर स्टेडी पार्टिसिपेशन रहेगा और उपभोक्ता अब लॉन्ग टर्म वेल्थ प्रिजर्वेशन के नजरिए से खरीद रहे हैं।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

यह राइज निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन सतर्क रणनीति जरूरी है। गोल्ड अब केवल त्योहार का प्रतीक नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो में हेज का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। जो निवेशक डिप्स पर खरीदारी करेंगे और अनुशासित अलोकेशन बनाए रखेंगे, उन्हें लॉन्ग टर्म फायदा हो सकता है। डिजिटल विकल्प चुनने वाले निवेशक मेकिंग चार्ज बचाकर ETF के जरिए बेहतर रिटर्न पा सकते हैं। कुल मिलाकर, मार्केट की अनिश्चितता में गोल्ड स्थिरता प्रदान करता है।

भविष्य की बातें

आगे गोल्ड का आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है। सेंट्रल बैंक की खरीदारी पिछले दशक में दोगुनी हो गई है। ग्लोबल डेब्ट बढ़ने और जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण गोल्ड की डिमांड बनी रह सकती है। मनी कंट्रोल के अनुसार, SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च हेड वंदना भारती ने कहा अगली अक्षय तृतीया तक गोल्ड की प्राइस 2 लाख रुपये के आसपास पहुंच सकती है। हालांकि, डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड कुछ समय के लिए दबाव बना सकते हैं। निवेशक लॉन्ग टर्म नजरिए से डिप्स पर निवेश करने की रणनीति अपनाएं। कुल मिलाकर, FY26 गोल्ड को हेज के रूप में और मजबूत बनाता है।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।

सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।

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