भारत में क्रेडिट कल्चर तेजी से बदल रहा है। एक समय था जब लोन मुख्य रूप से घर खरीदने, शिक्षा प्राप्त करने या व्यवसाय शुरू करने जैसी जरूरतों के लिए लिया जाता था। लेकिन डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स, फिनटेक ऐप्स और आसान क्रेडिट एक्सेस ने उधार लेने के तरीके और व्यवहार दोनों को बदल दिया है। आज युवा भारतीय पहले की तुलना में कहीं कम उम्र में औपचारिक क्रेडिट सिस्टम का हिस्सा बन रहे हैं।
हालिया आंकड़े बताते हैं कि भारत का क्रेडिट मार्केट अब केवल प्रोफेशनल्स सीमित नहीं है। Gen Z और Millennials की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन प्रत्येक पीढ़ी का उधार लेने का तरीका और उद्देश्य अलग-अलग है। इसी वजह से यह समझना महत्वपूर्ण हो जाता है कि आखिर आज भारत में सबसे ज्यादा कर्ज कौन ले रहा है और क्रेडिट मार्केट की दिशा किस ओर बढ़ रही है।
मिलेनियल्स: भारत के सबसे बड़े उधारकर्ता
इंडिया टुडे के अनुसार, भारत के क्रेडिट मार्केट में सबसे बड़ी हिस्सेदारी 20s, 30s और 40s की शुरुआत के लोगों का है। यह वह जीवन चरण है जब लोग घर खरीदते हैं, वाहन लेते हैं, परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हैं और अपने करियर को स्थिर करने का प्रयास करते हैं। जनवरी से सितंबर 2025 के दौरान नए उधार में मिलेनियल्स की हिस्सेदारी 55.2% रही।
क्रेडिट कार्ड अकाउंट्स में 507 में से 269, वाहन ऋणों में 462 में से 238, होम लोन में 425 में से 191 और चल रहे पर्सनल लोन में 662 में से 370 अकाउंट इसी वर्ग के पास हैं।
मिलेनियल्स EMI को एक सामान्य वित्तीय साधन मानते हैं। पहले की पीढ़ियां जहां बचत के बाद खर्च करना पसंद करती थीं, वहीं मिलेनियल्स भविष्य की आय के आधार पर वर्तमान में खर्च करने में अधिक सहज हैं। तेजी से बढ़ती शहरी जीवन लागत, हाई प्रॉपर्टी प्राइस और बेहतर जीवनशैली की आकांक्षाएं इस प्रवृत्ति को मजबूत कर रही हैं। वहीं 2015 से 2025 के बीच होम लोन की ब्याज दरों का 9.5-10.5% से घटकर 7.35-8.75% तक आना, पर्सनल लोन और एजुकेशन लोन की दरों में कमी तथा रेपो रेट का 8% से घटकर 5.25% होना भी उधार को अधिक सुलभ बनाने वाले प्रमुख फैक्टर्स रहे हैं।
जेन Z: युवा, डिजिटल और क्रेडिट के प्रति सहज
यदि मिलेनियल्स ऋण मूल्य के आधार पर सबसे बड़े उधारकर्ता हैं, तो जेन Z क्रेडिट मार्केट का सबसे तेजी से विकसित होने वाला वर्ग है। शुरुआती करियर और अपेक्षाकृत कम आय के बावजूद यह पीढ़ी पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड और छोटे टिकट वाले डिजिटल ऋणों का तेजी से उपयोग कर रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जेन Z पिछली पीढ़ियों की तुलना में काफी पहले औपचारिक क्रेडिट सिस्टम का हिस्सा बन रही है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने उन्हें कम उम्र में ही क्रेडिट इतिहास बनाने का अवसर दिया है।
बैंकमार्केट के आंकड़ों के अनुसार, जेन Z में पुनर्भुगतान तनाव सभी आयु वर्गों में सबसे कम है। यह वर्ग क्रेडिट को केवल आपातकालीन जरूरत के रूप में नहीं, बल्कि कैश मैनेजमेंट और भुगतान सुविधा के साधन के रूप में देखता है। यात्रा, गैजेट्स, ऑनलाइन खरीदारी और लाइफस्टाइल खर्चों के लिए बढ़ता क्रेडिट उपयोग उनकी बदलती वित्तीय सोच को दर्शाता है। बेहतर डिजिटल व्यवहार और अपेक्षाकृत मजबूत क्रेडिट अनुशासन के कारण लेंडर्स भी इस वर्ग को तेजी से ऋण उपलब्ध करा रहे हैं।
बुजुर्ग उधारकर्ता
जहां युवा पीढ़ियां नई संपत्तियां बनाने के लिए उधार ले रही हैं, वहीं बुजुर्ग भारतीय पहले से मौजूद संपत्तियों से मूल्य निकालने के लिए क्रेडिट का उपयोग कर रहे हैं। उनके बीच गोल्ड लोन, फिक्स्ड डिपॉजिट के खिलाफ लोन और म्यूचुअल फंड निवेश के विरुद्ध ऋण अपेक्षाकृत अधिक लोकप्रिय हैं। इस वर्ग का उद्देश्य नई देनदारियां बनाना नहीं, बल्कि अपनी संपत्तियों को बेचे बिना नकदी जरूरतों को पूरा करना होता है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, सिक्योर्ड लोन में लेंडर का जोखिम कम होने के कारण ब्याज दरें भी अपेक्षाकृत कम रहती हैं। यही कारण है कि बुजुर्ग उधारकर्ता महंगे अनसिक्योर्ड लोन की बजाय सुरक्षित विकल्पों को प्राथमिकता देते हैं। गोल्ड, निवेश या जमा राशि को गिरवी रखकर वे कम लागत वाला क्रेडिट प्राप्त करते हैं और साथ ही अपनी संपत्तियों का स्वामित्व भी बनाए रखते हैं। यह दृष्टिकोण उनकी वित्तीय परिपक्वता, जोखिम मैनेजमेंट क्षमता और लॉन्गटर्म योजना को दर्शाता है।
ऋण जाल की चेतावनी और बढ़ती चुनौतियां
क्रेडिट की बढ़ती पहुंच के साथ कुछ गंभीर जोखिम भी सामने आ रहे हैं। कई भारतीय अब पुराने कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज लेने लगे हैं, जो धीरे-धीरे ऋण जाल का रूप ले सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की कुल EMI उसकी टेक-होम सैलरी के 40-50% से अधिक हो जाती है, तो वित्तीय दबाव तेजी से बढ़ने लगता है। औसतन कई ग्राहक लगभग 5 लाख रुपये के अनसिक्योर्ड ऋण में फंसे होते हैं, जो 3-4 अलग-अलग लेंडर्स में विभाजित रहता है।
आंकड़े भी इस जोखिम की पुष्टि करते हैं। 2017 के बाद पर्सनल लोन ओरिजिनेशन 6 मिलियन से बढ़कर 210 मिलियन तक पहुंच गया है, जबकि इसका कुल मूल्य 1.5 ट्रिलियन रुपये से बढ़कर 12 ट्रिलियन रुपये हो गया। इसी दौरान पर्सनल लोन से जुड़े NPA FY20 के 5.2 बिलियन डॉलर से बढ़कर FY24 में 11 बिलियन डॉलर तक पहुंच गए हैं। चिंता की बात यह भी है कि लगभग 39% युवा उधारकर्ता किराया, किराना और यूटिलिटी बिल जैसे आवश्यक खर्चों के लिए भी क्रेडिट का उपयोग कर रहे हैं, जबकि कई लोग एक साथ 8-15 सक्रिय क्रेडिट लाइनों का उपयोग कर रहे हैं।
निष्कर्ष
भारत में क्रेडिट अब आर्थिक प्रगति और व्यक्तिगत आकांक्षाओं को पूरा करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। मिलेनियल्स वेल्थ क्रिएशन और बड़े जीवन लक्ष्यों के कारण सबसे बड़े उधारकर्ता हैं, जेन Z डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए तेजी से क्रेडिट अपना रहा है, जबकि बुजुर्ग भारतीय अपनी संचित संपत्तियों का उपयोग कर कम जोखिम वाले क्रेडिट विकल्प चुन रहे हैं। तीनों पीढ़ियों का क्रेडिट उपयोग भारत की बदलती आर्थिक और सामाजिक संरचना को दर्शाता है।
सरकारी योजनाएं भी इस बदलाव को गति दे रही हैं। मार्च 2026 तक प्रधान मंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के तहत 57 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनका कुल मूल्य 40.07 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना- शहरी (PMAY-U) जैसी योजनाएं मध्यम वर्ग को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने में मदद कर रही हैं। हालांकि, बढ़ते ऋण जाल के संकेतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। क्रेडिट का विस्तार तभी सस्टेनेबल और लाभकारी साबित होगा, जब इसके साथ वित्तीय अनुशासन, जिम्मेदार उधारी और समय पर पुनर्भुगतान की संस्कृति भी मजबूत होगी।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।