क्यों घट रही है दुनिया में अल्कोहल की खपत? भारत में क्यों बढ़ेगी!

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भारत सहित दुनिया भर में आर्थिक और सामाजिक बदलाव तेजी से हो रहे हैं। उपभोक्ताओं की प्राथमिकताएं बदल रही हैं और खर्च करने के तरीके भी पहले जैसे नहीं रहे। इसका असर अल्कोहल इंडस्ट्री पर भी दिखाई देने लगा है। एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, अगले दशक में दुनिया भर में अल्कोहल की खपत घटने की संभावना है, जबकि भारत में इसके विपरीत उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज होने का अनुमान है।

आइए समझते है कि यह विरोधाभासी ट्रेंड इंडस्ट्री, कंपनियों और निवेशकों के लिए कैसे नए अवसरों और चुनौतियों दोनों को सामने ला रहा है।

क्या है मामला?

अल्कोहल इंडस्ट्री पर रिसर्च करने वाली संस्था IWSR की पहली 10-वर्षीय फोरकास्ट, जो दुनिया के 160 मार्केट्स को कवर करती है, बताती है कि ग्लोबल अल्कोहल खपत आने वाले वर्षों में लगातार दबाव में रह सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, 2035 तक कुल अल्कोहल खपत 2025 के स्तर की तुलना में 1% कम रहने का अनुमान है। यह अनुमान उस समय सामने आया है जब दुनिया भर में कानूनी उम्र के अल्कोहल उपभोक्ताओं की संख्या 9% बढ़ने की संभावना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रति व्यक्ति शुद्ध अल्कोहल की खपत में भी गिरावट आएगी। यह कमी लगभग दो बोतल स्पिरिट्स या एक केस वाइन के बराबर हो सकती है। यानी उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने के बावजूद लोग पहले की तुलना में कम अल्कोहल का सेवन करेंगे।

इस बदलाव के पीछे कई कारण बताए गए हैं। बढ़ती जीवन-यापन लागत (Living Cost) के कारण लोग अपने डिस्क्रीशनरी खर्चों को सीमित कर रहे हैं। साथ ही स्वास्थ्य और वेलनेस के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, जिससे लोग फिटनेस, कैलोरी इनटेक और बेहतर जीवनशैली पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। वेट-लॉस ड्रग्स का बढ़ता उपयोग भी अल्कोहल सेवन की आदतों को प्रभावित कर रहा है। IWSR के प्रेसिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर मार्टेन लोडेविज्क्स (Marten Lodewijks) के अनुसार, बदलती उपभोक्ता पसंद अब इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है और कंपनियां केवल अपनी पुरानी सफलताओं के भरोसे आगे नहीं बढ़ सकतीं।

ग्लोबल मार्केट्स में गिरावट और नए ट्रेंड्स

रिपोर्ट के अनुसार, बीयर, वाइन और स्पिरिट्स जैसे पारंपरिक अल्कोहलिक पेय पदार्थों की खपत 2035 तक घटने की संभावना है। इसके विपरीत रेडी-टू-ड्रिंक बेवरेजेस और कैन्ड कॉकटेल्स जैसे नए प्रोडक्ट मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं। इसका कारण यह है कि उपभोक्ता अब अधिक मात्रा में पीने के बजाय बेहतर गुणवत्ता और सुविधा वाले प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।

दुनिया के सबसे बड़े मार्केट्स में यह बदलाव और अधिक स्पष्ट दिखाई देता है। IWSR के अनुमान के अनुसार, 2035 तक चीन और अमेरिका में अल्कोहल खपत 18% से अधिक घट सकती है। वहीं जर्मनी, जापान और यूनाइटेड किंगडम जैसे परिपक्व मार्केट्स में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज होने की संभावना है।

इसका असर इंडस्ट्री की बड़ी कंपनियों पर पहले से दिखाई देने लगा है। 2023 से ही प्रमुख कंपनियों जैसे Diageo और AB InBev की बिक्री पर दबाव देखा गया है। कमजोर डिमांड का असर उनके शेयर वैल्यूएशन पर भी पड़ा है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है।

भारत में ग्रोथ की संभावनाएं

जहां दुनिया के कई बड़े मार्केट धीमे पड़ रहे हैं, वहीं भारत ग्लोबल अल्कोहल इंडस्ट्री के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहा है। IWSR के अनुसार, अगले दशक में भारत में अल्कोहल खपत 38% बढ़ने का अनुमान है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2032 तक भारत अमेरिका को पीछे छोड़कर चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अल्कोहल मार्केट बन सकता है। इस वृद्धि के पीछे कई संरचनात्मक कारण हैं। देश में बढ़ती आय, तेजी से हो रहा शहरीकरण और युवा वयस्क आबादी का बड़ा बेस डिमांड को लगातार बढ़ा सकता है।

भारत के अलावा कुछ अन्य इमर्जिंग मार्केट्स में भी वृद्धि का अनुमान है। मैक्सिको में अल्कोहल खपत 13%, वियतनाम में 15% और कोलंबिया में 26% बढ़ सकती है। हालांकि, प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत की अनुमानित 38% वृद्धि सबसे उल्लेखनीय मानी जा रही है।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

यह ट्रेंड निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है। ग्लोबल स्तर पर इंडस्ट्री की कुल वृद्धि धीमी पड़ने के बावजूद भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट कंपनियों के लिए राजस्व वृद्धि का प्रमुख स्रोत बन सकते हैं।

कंपनियों को अब केवल प्रोडक्टन बढ़ाने पर नहीं बल्कि इनोवेशन पर भी ध्यान देना होगा। विशेष रूप से हेल्थ और वैल्यू के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों को समझना जरूरी होगा। ऐसे प्रोडक्ट जो स्वास्थ्य, सुविधा और प्रीमियम अनुभव को संतुलित कर सकें, भविष्य में अधिक सफल हो सकते हैं।

इसके अलावा, स्थानीय डिमांड का लाभ उठाने वाली और नए उपभोक्ता ट्रेंड्स के अनुरूप अपनी रणनीति बनाने वाली कंपनियां बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। इंडस्ट्री को अब केवल बड़े पैमाने पर बिक्री के बजाय उपभोक्ता प्राथमिकताओं को समझने और उनके अनुरूप प्रोडक्ट विकसित करने पर अधिक जोर देना होगा।

भविष्य की बातें

अगले दशक में ग्लोबल अल्कोहल इंडस्ट्री का स्वरूप काफी बदल सकता है। विकसित देशों में शराब की खपत में गिरावट जारी रहने की संभावना है, जबकि भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स इंडस्ट्री की वृद्धि के प्रमुख केंद्र बन सकते हैं। ऐसे माहौल में इंडस्ट्री के लिए सफलता केवल अधिक बिक्री पर निर्भर नहीं होगी, बल्कि नई पीढ़ी के उपभोक्ताओं की बदलती पसंद, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और प्रीमियम अनुभवों की डिमांड को समझने पर भी आधारित होगी। दुनिया के कई हिस्सों में खपत धीमी पड़ने के बावजूद, भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजार आने वाले वर्षों में ग्लोबल अल्कोहल इंडस्ट्री की दिशा और विकास को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।

सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।

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