भारत के प्राइमरी मार्केट ने सिर्फ फाउंडर्स, प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टर्स और इन्वेस्टमेंट बैंकर्स को ही नहीं, बल्कि कैपिटल मार्केट्स रेगुलेटर SEBI को भी बड़ी कमाई दिलाई है। 2025-26 में प्रॉस्पेक्टस फाइलिंग और ऑफर डॉक्यूमेंट्स से SEBI को ₹338.3 करोड़ मिले है। इसी दौरान SEBI की कुल फीस कलेक्शन 10% बढ़कर ₹2,563 करोड़ पहुंच गई।
आइए समझें कि भारतीय स्टॉक मार्केट इश्यू साइज कम होने के बाबजूद SEBI की कमाई कैसे रही है।
क्या है मामला?
SEBI की एनुअल रिपोर्ट के मुताबिक, “ऑफर डॉक्यूमेंट्स एंड प्रॉस्पेक्टस फाइल्ड” से रेवेन्यू 2024-25 के ₹266.3 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹338.3 करोड़ हो गया। ये नॉन-रिकरिंग चार्जेस हैं, स्टॉक एक्सचेंजेस, ब्रोकर्स और म्यूचुअल फंड्स से हर साल आने वाली रिकरिंग फीस के विपरीत यानी सीधे कैपिटल रेजिंग एक्टिविटी से जुड़े हैं।
2025-26 में इक्विटी पब्लिक इश्यूज (IPO और FPO) के जरिए ₹1.9 लाख करोड़ जुटाए गए, हालांकि यह पिछले साल के मुकाबले 0.9% कम रहा। लेकिन नई लिस्टेड कंपनियों की संख्या 320 से बढ़कर 366 हो गई, और मेन बोर्ड पर 109 IPOs आए। मेन बोर्ड IPOs ने ₹1.8 लाख करोड़ जुटाए, और मीडियन इश्यू साइज ₹740 करोड़ से बढ़कर ₹760 करोड़ हो गया।
SEBI की कुल कमाई में कितना इजाफा?
SEBI की कुल फीस और दूसरे चार्जेस (अनऑडिटेड) पिछले साल के ₹2,334 करोड़ से बढ़कर ₹2,563 करोड़ हो गए। सबसे बड़ा योगदान स्टॉक एक्सचेंजेस की एनुअल रेगुलेटरी फीस का रहा, जो ₹1,265.9 करोड़ से बढ़कर ₹1,349.3 करोड़ हुई यानी कुल कलेक्शन का आधे से ज्यादा हिस्सा।
दूसरे नॉन-रिकरिंग स्ट्रीम्स में भी बढ़ोतरी दिखी। FPI फीस ₹73.3 करोड़ से बढ़कर ₹105 करोड़, म्यूचुअल फंड फीस ₹33 करोड़ से ₹35.1 करोड़, स्टॉक एक्सचेंज फीस ₹41.1 करोड़ से ₹45.2 करोड़ और कस्टोडियन फीस ₹132 करोड़ से ₹149.2 करोड़ हो गई। कैश मार्केट में ब्रोकर्स से मिलने वाली फीस भी ₹58.1 करोड़ से बढ़कर ₹61.6 करोड़ पहुंच गई।
2026 में क्यों सुस्त पड़ रहा है IPO बूम?
हालांकि 2025-26 में प्राइमरी मार्केट मजबूत रहा, 2026 में IPO फंडरेजिंग की गति कमजोर हुई है। 2026 में अब तक कंपनियों ने IPO के जरिए करीब $5.78 बिलियन जुटाए हैं, जबकि 2025 की इसी अवधि में यह आंकड़ा $7.32 बिलियन था। 2024 में भारतीय कंपनियों ने IPO के जरिए रिकॉर्ड $22.36 बिलियन जुटाए थे।
कमजोर मार्केट सेंटीमेंट, अधिक वोलैटिलिटी और निवेशकों की बढ़ती सतर्कता के कारण कंपनियां अपने इश्यू साइज कम कर रही हैं और कुछ कंपनियां कम वैल्यूएशन स्वीकार कर रही हैं। मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज ने अपना IPO साइज $1 बिलियन से अधिक से घटाकर करीब $960 मिलियन किया। Indo-MIM ने करीब $396 मिलियन जुटाए, जबकि उसने पहले लगभग $700 मिलियन जुटाने का लक्ष्य रखा था, इसके बावजूद उसके IPO को 72 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिला था। Juniper Green Energy ने भी अपना प्रस्तावित इश्यू साइज $314 मिलियन से घटाकर $188 मिलियन कर दिया।
वहीं, Zepto ने तत्काल IPO लाने के बजाय प्री-IPO प्राइवेट प्लेसमेंट का विकल्प चुना। Sify Infinit Spaces ने अपना IPO होल्ड पर रखा, जबकि PhonePe ने अपनी लिस्टिंग योजना टाल दी।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
DAM कैपिटल एडवाइजर्स के MD और CEO धर्मेश मेहता कहते हैं कि कम वैल्यूएशन पर ज्यादा इक्विटी डायल्यूशन मानने की बजाय, कई कंपनियां कम कैपिटल जुटाना चुन रही हैं। छोटे डील साइज की वजह से 2026 में लगातार तीसरा रिकॉर्ड IPO ईयर नहीं बन पाने का खतरा है, लेकिन इन्वेस्टर्स के लिए यह बेहतर प्राइसिंग की पोजीशन भी बनाता है।
एक्सिस कैपिटल के प्रतीक लूनकर बताते हैं कि कमजोर रिस्क अप्रेटाइट, सेकेंडरी मार्केट्स में बढ़ी वोलैटिलिटी और हालिया IPOs की मिली-जुली पोस्ट-लिस्टिंग परफॉर्मेंस की वजह से इन्वेस्टर्स सेलेक्टिव हो रहे हैं। यानी रिटेल इन्वेस्टर्स को अब कंपनी के बिजनेस की मजबूती और रीज़नेबल प्राइसिंग, दोनों पर ध्यान देना होगा, हर IPO पर रिटर्न की गारंटी नहीं है।
भविष्य की बातें
Jio Platforms और NSE जैसे बड़े IPOs के सितंबर-अक्टूबर में लॉन्च होने से 2026 के बचे हुए हिस्से में प्राइमरी मार्केट को सहारा मिल सकता है। लेकिन जब तक फॉरेन इन्वेस्टर्स का रुख नहीं सुधरता, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशंस प्राइसिंग पर सख्त रुख बनाए रखेंगे और कंपनियों को छोटे डील साइज से ही काम चलाना पड़ सकता है।
इसके बावजूद, IPO मार्केट SEBI की कमाई का अहम जरिया बना रहेगा। कंपनियों की मजबूत पाइपलाइन अभी भी मार्केट डेब्यू का इंतजार कर रही है, इसलिए आने वाले साल में भी यह रेगुलेटर की इनकम में बड़ा योगदान देगी।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।