दुनिया भर में सुरक्षा की स्थिति बदल रही है, इसलिए भारत में हथियार बनाने और उन्हें विकसित करने की ज़रूरत बहुत ज़्यादा बढ़ गई है। मजबूत सेना और युद्ध के समय लगातार हथियारों की आपूर्ति बनाए रखना हमारा लक्ष्य है।
आइए देखें कि कैसे भारत एक मजबूत डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस बनाने में तेजी से आगे बढ़ रहा है जिसका उद्देश्य दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातक से एक प्रमुख निर्यातक बनना है।
पहले क्या होता था
पहले भारत में सरकारी कंपनियां ही डिफेंस सेक्टर में सबसे अहम थीं, हालांकि इमर्जिंग प्राइवेट प्लेयर्स भी धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहे हैं। सरकारी कंपनियां हथियार बनाने और उन्हें विकसित करने का काम करती हैं। सरकारी कंपनियां हथियार बनाने और रिसर्च एंड डेवलपमेंट में सबसे आगे रहीं। डिफेंस प्रोडक्शन सेक्टर में प्रमुख संस्थाएँ 16 डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSUs) हैं, जिनमें से सात को अक्टूबर 2021 तक ऑर्डनेंस फैक्ट्रीज़ (OFs) से परिवर्तित किया गया था। ये DPSUs रक्षा मंत्रालय (MoD) के एडमिनिस्ट्रेटिव कंट्रोल में काम करते हैं।
इन नौ PSUs में से चार – मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड और हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड – जहाज बनाने वाली कंपनियां हैं। ये भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के लिए कई तरह के युद्धपोत बनाती हैं।
सरकारी प्रयास
सरकार के प्रयासों और 2025 तक US $26 बिलियन के महत्वाकांक्षी प्रोडक्शन लक्ष्य के बावजूद, प्रोडक्शन में इतनी वृद्धि नहीं हुई है कि सशस्त्र बलों की वार्षिक खरीद आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
यहाँ कुछ प्रमुख सरकारी पहल हैं जिन्होंने भारत में प्राइवेट डिफेंस इंडस्ट्री के उदय को प्रोत्साहित किया है:
डिफेंस प्रोफक्शन एंड एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी (DPEPP) 2020
आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत, DPEPP एक ड्राफ्ट पॉलिसी डॉक्युमेंट है जो यह बताता है कि सरकार देश की डिफेंस उत्पादन क्षमताओं को कैसे मजबूत करेगी। इसका उद्देश्य आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना और निर्यात को बढ़ावा देना है।
रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020
DAP 2020 डोमेस्टिक डिफेंस इंडस्ट्री को बढ़ावा देने का प्रयास करती है। यह खरीद के दौरान डोमेस्टिक कंपनियों के पक्ष में एक सख्त प्राथमिकता का आदेश देता है। इसमें FDI को आकर्षित करने के प्रावधान भी हैं, जिससे भारत को डिफेंस सेक्टर में एक मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बनाया जा सके। यह महंगे आयात की आवश्यकता को कम करने और निर्यात को बढ़ावा देने का दोहरा लाभ प्रदान करता है।
सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची
इस सूची में भारतीय सशस्त्र बलों के तीनों अंगों को सूचीबद्ध वस्तुओं की खरीद डोमेस्टिक प्राइवेट कंपनियों या PSUs से करने का आदेश दिया गया है। इस सूची में कुल 4,666 वस्तुएं शामिल हैं, जिनमें लगभग 98 वस्तुओं की वैल्यू $16.8 बिलियन है, जो स्टार्टअप्स और MSMEs को डिफेंस सप्लाई के उत्पादन में बढ़ावा देती हैं।

सरकार के प्रयास सफल हो रहे हैं क्योंकि डिफेंस निर्यात की वैल्यू लगातार बढ़ रही है।
डिफेंस स्टॉक्स जिन पर नजर रखें
सरकार डिफेंस उपकरणों के लिए एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग बेस बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे शेयर मार्केट निवेशक डिफेंस स्टॉक्स को अपने पोर्टफोलियो में शामिल करने के लिए उत्सुकता से देख रहे हैं।
यहाँ कुछ डिफेंस स्टॉक्स हैं जिन्होंने हाल ही में अच्छा प्रदर्शन किया है:

टेबल में पिछले 1 वर्ष के प्रदर्शन को दिखाया गया है।
भविष्य की बातें
भारत द्वारा हाल ही में आर्मेनिया को रॉकेट गोला-बारूद और फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइलों का निर्यात, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं पर ग्लोबल विश्वास को दर्शाता है। मोदी सरकार द्वारा लागू किए गए सुधारों और उदारीकरण के उपायों का स्थानीय डिफेंस इंडस्ट्री पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है, जैसा कि निर्यात में वृद्धि और कुल डिफेंस प्रोडक्शन से स्पष्ट है।
हालांकि, कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं जिन्हें संबोधित करना आवश्यक है यदि भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक का दर्जा छोड़कर प्रमुख निर्यातकों में से एक बनना चाहता है।
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*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर