भारत में नेट FDI 16 साल के निचले स्तर पर! क्यों?

भारत में नेट FDI 2007 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। जानें क्या कारण हैं इस गिरावट के और ये भारतीय अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करेगा।
Share

पिछले कुछ महीनों में खबरें आ रही हैं कि भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में कमी आ रही है। FY24 में नेट FDI गिरकर 2007 के बाद के सबसे निचले स्तर $10.6 बिलियन पर पहुंच गया, जिससे यह चिंता पैदा हो गई है कि क्या ग्लोबल कंपनियां और विदेशी निवेशक भारत से बाहर जा रहे हैं और क्या यह भारत के लिए चिंता का विषय है, चलिए इसके प्रत्येक पहलु को समझते है।

क्या है मामला?

भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा मई महीने के शुरू में जारी आंकड़ों ने देश के लिए एक चिंताजनक रुझान सामने लाया है। यह आंकड़े बताते हैं कि 2023-24 में नेट FDI 62.17% की गिरावट के साथ $28 बिलियन से घटकर $10.6 बिलियन पर आ गया है।

आंकड़ों पर गौर करें तो कुल $71 बिलियन के ग्रॉस इनफ्लो में से आधे से अधिक राशि, यानी लगभग $44.4 बिलियन, डिविडेंट, स्टॉक्स की बिक्री या विनिवेश के माध्यम से वापस चली गयी है। इसके अलावा, भारतीयों ने भी विदेशों में $15.96 बिलियन का निवेश किया।

नेट FDI में गिरावट की वजह

यह गिरावट मुख्य रूप से बड़े पैमाने पर हुए ब्लॉक डील और डीइन्वेस्ट के कारण हुई है, जिसके चलते विदेशी कंपनियों द्वारा पहले किया गया निवेश वापस चला गया।

बिजनेसलाइन के एनालिसिस से एक अलग तस्वीर सामने आती है। आइए आंकड़ों को गौर से देखें:

उच्च रिपेट्रिएशन: भारत में विदेशी निवेशकों द्वारा उच्च रिपेट्रिएशन ही असल में FDI में गिरावट का मुख्य कारण है। विदेशी कंपनियों के प्रमोटर्स, FDI निवेशक और प्राइवेट इक्विटी (PE) एवं वेंचर कैपिटल (VC) निवेशकों ने भारतीय शेयर मार्केट की तेजी का फायदा उठाते हुए अपने स्टॉक्स का कुछ हिस्सा बेच दिया है।

भारतीय कंपनियों का विदेशी निवेश: गौर करने वाली बात यह है कि FY24 में भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में किया गया निवेश भी 14% बढ़ा है। इसका सीधा असर नेट FDI पर पड़ा है।

कुल प्रवाह बना हुआ स्थिर: हालांकि नेट FDI में कमी आई है, लेकिन कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश FY24 में पिछले FY के बराबर ही $71 बिलियन रहा है। इसका मतलब है कि भारत में विदेशी पूंजी का आना अभी रुका नहीं है।

लेकिन आगे बढ़ने से पहले समझ लेते है कि आखिर नेट FDI होता क्या है।

क्या है नेट FDI?

FDI यानि फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट वह राशि जो विदेशी निवेशकों द्वारा किसी अन्य देश में निवेश की जाती है। जहां अगर विदेशी निवेशकों द्वारा देश में पैसा निवेश किया जा रहा है तो उसे FDI इनफ्लो कहते है, जबकि अगर विदेशी निवेशक किसी कारणवश अपने निवेश को एग्जिट करते है तो उसे FDI ऑउटफ्लो कहते है।

इसी तरह,

नेट FDI = FDI इनफ्लो – FDI ऑउटफ्लो

तो, इस तरह भारत में विदेशी निवेश तो आ रहा है लेकिन उससे ज्यादा है वह निवेशक अपना निवेश बाहर निकाल रहे है।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि भले ही नेट FDI में गिरावट आई है, लेकिन यह पूरी तरह से विदेशी कंपनियों के भारत से बाहर जाने का संकेत नहीं है। क्योंकि FY24 के दौरान FDI इक्विटी इनफ्लो 44.42 बिलियन डॉलर रहा है जो FY23 के 46.03 बिलियन डॉलर से मात्र 3.49% की गिरावट है।

FY24 में भारत में FDI इनफ्लो

इसके साथ ही, इन्वेस्ट इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, FY24 में मॉरीशस (26%) भारत में FDI का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है। इसके बाद सिंगापुर (23%), अमेरिका (9%), नीदरलैंड (7%) और जापान का 6% रहा।

भविष्य की बातें

मिंट के अनुसार, इकोनॉमिक लॉज़ प्रैक्टिस के पार्टनर अभिषेक सान्याल का कहना है कि भारत सरकार विदेशी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए FDI नियमों को आसान बनाने का प्रयास तो कर रही है, लेकिन साथ ही कुछ सतर्कताएं भी बरती जा रही हैं। इकोनॉमिक लॉ प्रैक्टिस के पार्टनर अभिषेक सन्याल इस विषय पर बताते हैं कि सरकार ने बदलावों के जरिए FDI नियमों को उदार बनाने की कोशिश की है।

लेकिन, 2020 में भारत सरकार ने उन देशों से होने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी कर दी थी, जिनकी सीमा भारत से लगती है जिनमें में चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान शामिल है।

आज के लिए सिर्फ इतना ही। उम्मीद करते है कि यह आर्टिकल आपको रोचक लगा होगा, इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूले।

*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर

Teji Mandi Multiplier Subscription Fee
Min. Investment

3Y CAGR

Min. Investment

Teji Mandi Flagship Subscription Fee
Min. Investment

3Y CAGR

Min. Investment

Teji Mandi Edge Subscription Fee
Min. Investment

Min. Investment

Teji Mandi Xpress Subscription Fee
Total Calls

Total Calls

Recommended Articles
Scroll to Top