सिगरेट स्टॉक रैली: निवेशकों के लिए क्या संकेत?

सिगरेट स्टॉक रैली: निवेशकों के लिए क्या संकेत?
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भारतीय शेयर मार्केट में वर्तमान में एक सेक्टर निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। लंबे समय तक सुस्त रहने और ESG चिंताओं के कारण दबाव झेलने के बाद, सिगरेट स्टॉक्स अब एक नई ऊर्जा के साथ नजर आ रहे हैं। यह तेजी केवल एक सामान्य रिकवरी नहीं है, बल्कि कंपनियों द्वारा की गई ‘स्टीप प्राइस हाइक्स’ और भविष्य में मार्जिन एक्सपेंशन की मजबूत संभावनाओं का परिणाम है। मार्केट में आए इस अचानक उछाल ने सिगरेट सेक्टर की प्रमुख दिग्गज कंपनियों के वैल्युएशन को नए स्तर पर पहुंचा दिया है।

आइए इस बदलाव को समझें और जानें कि कैसे प्राइसिंग स्ट्रैटेजी ने इन स्टॉक्स की किस्मत बदल दी है।

क्या है मामला?

फरवरी 2026 भारतीय सिगरेट इंडस्ट्री के लिए एक अहम मोड़ बनकर सामने आया है। बजट के बाद बढ़े हुए एक्साइज ड्यूटी के दबाव में जो शेयर कभी धराशायी होते नजर आ रहे थे, वे अब मार्केट में शानदार वापसी कर चुके हैं। गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के शेयर में आई 31% की कुल तेजी इसी बदलाव की गवाह है।

कंपनियों ने टैक्स के बोझ को खुद सहने के बजाय उसे रणनीतिक रूप से ग्राहकों की ओर मोड़ दिया है। ITC जैसी दिग्गज कंपनियां प्राइस में 20 से 40% तक की बढ़ोतरी कर रही हैं। इस साहसी कदम ने उनके ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBIT) को संभावित 15% की बड़ी गिरावट से बचाकर मात्र 2% तक सीमित कर दिया है।

निवेशकों के लिए यह रिकवरी न केवल राहत की बात है बल्कि मार्केट में कंपनियों की प्राइसिंग पावर का एक सटीक उदाहरण भी है।

टैक्स स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव

इन सभी घटनाक्रमों की शुरुआत सरकार के उस नोटिफिकेशन से हुई, जिसमें GST कंपनसेशन सेस को खत्म करते हुए 1 फरवरी से नया तंबाकू टैक्स व्यवस्था लागू की गयी। इसके तहत सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी को फिर से संरचित किया गया है, जो अब 1,000 स्टिक्स पर ₹2,050 से ₹8,500 की रेंज में है, और इसके ऊपर 40% GST भी लागू होता है। इससे कुल टैक्स बोझ काफी बढ़ गया है, जिसके कारण डिमांड, प्रॉफिट मार्जिन, और अवैध व्यापार बढ़ने के जोखिम को लेकर कंपनियों में चिंता है।

इस अनिश्‍चितता को बढ़ाया है नेशनल कालमित्य कंटीजेंट ड्यूटी (NCCD) में किए गए तकनीकी बदलाव ने। बजट में सरकार ने तंबाकू प्रोडक्ट्स पर वैधानिक NCCD दर को 25% से बढ़ाकर 60% करने की घोषणा की, जो 1 मई 2026 से लागू होगा।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

टैक्स बढ़ोतरी के असर को संतुलित करने के लिए की गई प्राइस हिके के बाद सिगरेट कंपनियों के शेयर्स में 18 फरवरी 2026 यानि बुधवार को तेज उछाल देखा गया। ITC के शेयर 2.2% बढ़कर ₹332.70 पर बंद हुए, गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया में 20% की जोरदार रैली आई, जबकि VST इंडस्ट्रीज भी 2% से ज्यादा की तेजी आयी।

इंडस्ट्री अनुमान बताते हैं कि गॉडफ्रे फिलिप्स ने मार्लबोरो कॉम्पैक्ट की प्राइस ₹9.5 से बढ़ाकर ₹11.5 कर दी है। वहीं ITC ने गोल्ड फ्लैक और क्लासिक (प्रीमियम) में 41%, क्लासिक कनेक्ट (स्लिम्स) में 20%, और गोल्ड फ्लैक सुपरस्टार (वैल्यू) में लगभग 19% की बढ़ोतरी की है।

फिर भी, निवेशकों को यह समझना चाहिए कि इस सेक्टर में रेगुलेटरी रिस्क और स्वस्थ समस्याएँ हमेशा मौजूद रहते हैं। इसके बावजूद, कंपनियों का मार्जिन बचाने की क्षमता यह संकेत देती है कि लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए सेक्टर अभी भी अवसर प्रदान कर सकता है।

भविष्य की बातें

बजट में NCCD से जुड़ा एक बदलाव किया गया है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि ड्यूटी रेट फिलहाल 25% ही रहेगा, इसलिए सिगरेट कंपनियों पर अभी कोई अतिरिक्त टैक्स बोझ नहीं आएगा। लेकिन इस संशोधन ने सरकार को भविष्य में बिना किसी नए कानून बदलाव के टैक्स बढ़ाने का विकल्प दे दिया है।

इंडस्ट्री को देखें तो, भारत ग्लोबल तंबाकू मार्केट में एक बड़ी भूमिका निभाता है। चीन के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तम्बाकू उत्पादक है। देश में लगभग 0.45 मिलियन हेक्टेयर में तंबाकू की खेती होती है, जो ग्लोबल कुल खेती का लगभग 10% हिस्सा है। उत्पादन के लिहाज़ से भारत विश्व का 9% तंबाकू आउटपुट देता है और ब्राज़ील के बाद दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।

सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।

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