सेबी का नया नियम: स्टॉक ब्रोकर्स-निवेशकों पर असर

सेबी का नया नियम: स्टॉक ब्रोकर्स-निवेशकों पर असर
Share

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने हाल ही में अपने फीस स्ट्रक्चर में एक अहम् बदलाव की घोषणा की है। यह स्टेप FY25 में शीर्ष डिस्काउंट ब्रोकर्स की आमदनी में 20% तक की गिरावट का कारण बन सकता है। इस नई नीति का असर न केवल स्टॉक ब्रोकर्स पर पड़ेगा, बल्कि निवेशकों के लिए भी इसका विशेष महत्व होगा। आइए इस बदलाव और इसके संभावित प्रभावों को समझने का प्रयास करते है।

क्या है मामला?

1 जुलाई, 2024 को सेबी ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया, जिसके तहत अब सभी स्टॉक ब्रोकर्स, डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स और क्लियरिंग मेंबर्स को बाजार से जुड़ी संस्थाओं (MIIs) को समान शुल्क देना होगा। इसका मतलब है कि चाहे आप कितने भी वॉल्यूम में ट्रेड करें, आपको एक समान शुल्क देना होगा। यह फैसला 1 अक्टूबर, 2024 से लागू होगा।

सेबी का यह फैसला निवेशकों के लिए फायदेमंद हो सकता है। पहले, कुछ ब्रोकर कम ट्रेडिंग वॉल्यूम वाले निवेशकों से ज्यादा शुल्क लेते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इससे सभी निवेशकों के लिए मार्केट में समान अवसर सुनिश्चित होंगे।
लेकिन, इसके सकारात्मक पहलुओं के साथ-साथ ब्रोकर्स और निवेशकों के लिए कुछ नकारात्मक पहलु भी है, जिनके बारे में आइए आगे समझते हैं।

स्टॉक ब्रोकर्स पर प्रभाव

यह नया नियम स्टॉक एक्सचेंज जैसे कि BSE और NSE को तो प्रभावित करेगा ही, साथ ही स्टॉक ब्रोकर्स पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। क्योंकि ब्रोकर्स अपनी कमाई का एक हिस्सा ग्राहकों से लिए गए शुल्क और एक्सचेंज को दिए जाने वाले शुल्क के बीच के अंतर से कमाते हैं, जिसे रिबेट कहा जाता है। नई व्यवस्था में रिबेट कम हो जाएगा या खत्म हो जाएगा, जिससे ब्रोकर्स की कमाई घट सकती है।

आइए इसे थोड़ा और आसान शब्दों में समझते हैं। मान लीजिए कोई ब्रोकर हर महीने 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का ट्रेड कराता है। ऐसे ब्रोकर्स से NSE सिर्फ 30 रुपये प्रति लाख के हिसाब से शुल्क लेता है। लेकिन, ये ब्रोकर अपने ग्राहकों से 50 रुपये प्रति लाख का शुल्क वसूलते हैं।

निवेशकों पर प्रभाव

सेबी ने बाजार में पारदर्शिता और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए यह कदम उठाया है। पहले, कुछ डिस्काउंट ब्रोकर कम शुल्क का दावा करते थे, लेकिन वे ग्राहकों से ज्यादा शुल्क वसूलते थे और एक्सचेंजों से मिलने वाले रीबेट या पासबैक का कुछ हिस्सा अपने पास रख लेते थे। इससे निवेशकों को यह जानने में मुश्किल होती थी कि वे वास्तव में कितना शुल्क चुका रहे हैं।

निवेशकों के लिए, यह नीति कुछ हद तक सकारात्मक हो सकती है, क्योंकि समान शुल्क नीति से निवेशकों को पारदर्शिता मिलेगी। लेकिन इससे ब्रोकर्स के प्रॉफिट मार्जिन में गिरावट आ सकती है और उन्हें अपने ग्राहकों से अधिक शुल्क लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

सेबी के फैसले का शेयर बाजार पर असर

2 जुलाई, 2024 को सेबी के इस फैसले का असर शेयर मार्केट पर भी देखने को मिला। जहां 5 पैसा कैपिटल, एंजेल वन, SMC ग्लोबल, मोतीलाल ओस्वाल फाइनेंशियल सर्विसेज, IIFL सिक्योरिटीज और जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे ब्रोकरेज कंपनियों के स्टॉक्स में सुबह 9:30 बजे तक 2 से 11% तक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, दूसरी तरफ, BSE सेंसेक्स रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया और 0.23% की बढ़त के साथ 79,662.64 पर ट्रेड कर रहा था।

यह गिरावट इस बात का संकेत हो सकती है कि निवेशकों को सेबी के फैसले से ब्रोकरेज कंपनियों की कमाई पर असर पड़ने की आशंका है।

आज के लिए सिर्फ इतना ही है। उम्मीद करते है यह जानकारी आपको रोचक लगी होगी। इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूले।

*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर

Teji Mandi Multiplier Subscription Fee
Min. Investment

3Y CAGR

Min. Investment

Teji Mandi Flagship Subscription Fee
Min. Investment

3Y CAGR

Min. Investment

Teji Mandi Edge Subscription Fee
Min. Investment

Min. Investment

Teji Mandi Xpress Subscription Fee
Total Calls

Total Calls

Recommended Articles
Scroll to Top