अगस्त 2025 में भारतीय शेयर मार्केट एक क्लासिक खींचतान के दौर से गुजरा। एक तरफ, अमेरिका द्वारा लगाए गए आक्रामक टैरिफ ने मार्केट में डर और अनिश्चितता का माहौल बना दिया, जिससे तेज गिरावट आई और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारी बिकवाली की। वहीं दूसरी तरफ, भारत की डोमेस्टिक अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ खड़ी रही, जिसमें महंगाई दर में कमी, स्थिर GDP ग्रोथ का अनुमान, और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की जबरदस्त खरीदारी शामिल है। मार्केट की आने वाली दिशा इसी बात पर निर्भर करेगी कि इन दो शक्तिशाली और विपरीत कहानियों में से किसकी जीत होती है। जहाँ टैरिफ ने तुरंत सेंटिमेंट पर कब्जा कर लिया, वहीं डोमेस्टिक अर्थव्यवस्था ने मार्केट को बड़ी गिरावट से बचाए रखा।
इसलिए, आइए समझते है कि अगस्त 2025 में मार्केट कैसा रहा है और इस रोलरकोस्टर मार्केट में आगे क्या उम्मीद की जा सकती है।
अगस्त 2025 का प्रदर्शन
अगस्त 2025 में भारतीय शेयर मार्केट में काफी वोलैटिलिटी देखी गई। महीने के शुरुआती सप्ताह में मार्केट में तेजी का रुख रहा, 29 अगस्त को समाप्त अगस्त माह में निफ्टी में 1.03% और सेंसेक्स में 1.34% की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, महीने के अंत में अमेरिका द्वारा भारतीय गुड्स पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद मार्केट में बिकवाली देखने को मिली। इसके चलते 26 अगस्त को निफ्टी 255.70 पॉइंट्स गिरकर 24,712.05 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 849.37 पॉइंट्स गिरकर 80,786.54 पर बंद हुआ।
इस गिरावट के दौरान, ऑटो और FMCG जैसे डिफेंसिव सेक्टर्स ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि फाइनेंशियल और फार्मा सेक्टर्स में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई।
US फेड की नरमी और ग्लोबल संकेत
ग्लोबल आर्थिक माहौल अभी भी नाजुक बना हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 2025 के लिए ग्रोथ रेट का अनुमान 3.0% पर रखा है, जो धीमी रिकवरी का संकेत है। विश्व बैंक ने भी व्यापारिक तनाव और नीतिगत अनिश्चितता से उत्पन्न होने वाली बाधाओं पर प्रकाश डाला है। इस पृष्ठभूमि से पता चलता है कि भारतीय गुड्स और सर्विसेज की बाहरी डिमांड कमजोर रह सकती है, जिसे नए टैरिफ ने और बढ़ा दिया है।
हालांकि, इस बीच एक महत्वपूर्ण सकारात्मक ग्लोबल डेवलपमेंट सामने आया। अगस्त के अंत में जैक्सन होल इकोनॉमिक सिम्पोजियम में, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने सितंबर में ब्याज दरों में कटौती की संभावना का संकेत दिया है।
यह भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स के लिए एक महत्वपूर्ण है, क्योंकि फेड द्वारा दरों में कटौती से आमतौर पर अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है और ग्लोबल लिक्विडिटी बढ़ती है, जिससे भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स में विदेशी निवेश आकर्षित होता है।
ट्रम्प का भारत पर 50% टैरिफ
अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाने का फैसला भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में बड़ा झटका माना जा रहा है। यह टैरिफ 27 अगस्त 2025 से लागू हो चुका है और इसे अमेरिका ने भारत द्वारा डिस्काउंटेड रूसी ऑयल की खरीद के खिलाफ दंडात्मक कदम के रूप में पेश किया है। जुलाई के अंत में पहले 25% और फिर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने के बाद अब अधिकांश भारतीय निर्यात पर असर दिखने लगा है।
गौर करने वाली बात यह है कि भारत का बड़ा जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और पेट्रोलियम प्रोडक्ट क्षेत्र इन टैरिफ से बाहर रखा गया है। वहीं एल्यूमिनियम, स्टील और कॉपर पर पहले से लागू 25% टैरिफ जारी रहेगा। नई दरें मुख्य रूप से जेम्स एंड ज्वेलरी, गारमेंट्स, फुटवियर, फर्नीचर और इंडस्ट्रियल केमिकल्स जैसे सेक्टर्स पर लागू होंगी।
द गार्जियन के अनुसार, ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि इन प्रभावित सेक्टर्स का निर्यात लगभग 70% घटकर $60.2 बिलियन से $18.6 बिलियन पर आ सकता है। कुल मिलाकर भारत से अमेरिका को होने वाला निर्यात 43% तक गिर सकता है।
GST में बड़ा बदलाव
GST दरों को सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने 5% और 18% के दो प्रमुख स्लैब लागू करने के प्रस्ताव को मंत्रियों के समूह (GoM) ने 21 अगस्त को सहमति दी थी।
जिसमें नई संरचना के तहत 12% स्लैब के 99% गुड्स अब 5% में और 28% स्लैब के 90% गुड्स 18% में आ जाएंगे। केवल लग्जरी और ‘सिन गुड्स’ पर 28% टैक्स जारी रहेगा, जबकि आवश्यक खाद्य वस्तुएँ 0% या 5% टैक्स पर बनी रहेंगी।
नवीनतम अपडेट की बात करें तो, GST काउंसिल की बैठक 3 से 4 सितंबर को दिल्ली में होगी, जहाँ इस पर औपचारिक मुहर लगेगी। NDTV प्रॉफिट के सूत्रों के अनुसार नई दरें 22 सितंबर तक लागू हो सकती है। त्योहारी सीजन से पहले इस बदलाव से कंज़म्प्शन में मजबूती आने की उम्मीद है।
ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग पर पूर्ण प्रतिबंध
21 अगस्त 2025 को संसद ने प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 पारित कर दिया है। लोकसभा और राज्यसभा से पारित इस बिल के तहत ऑनलाइन रियल-मनी गेम्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम जल्दी पैसा कमाने की लत, वित्तीय संकट और सामाजिक तनाव जैसी समस्याओं को रोकने के लिए उठाया गया है, जिनका फायदा कई भ्रामक प्लेटफॉर्म उठा रहे थे।
साल 2025 में ही सरकार ने कई बेटिंग और सट्टेबाजी ऐप्स को बैन किया है। इनमें से ज्यादातर ऐप्स पर बिना अनुमति जुआ गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप लगे थे। यह नया बिल इन ऐप्स पर की जा रही सख्ती की दिशा में अगला बड़ा कदम माना जा रहा है।
अगस्त 2025: सेक्टोरल प्रदर्शन
अगस्त 2025 के दौरान अधिकांश प्रमुख सेक्टर्स में गिरावट देखी गई, जिसमें डिफेंस, रियल्टी, कैपिटल मार्केट्स और PSE जैसे सेक्टर्स शामिल है। हालांकि ऑटो और FMCG सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन किया है।

अगस्त में निवेशकों की रुचि डिफेंसिव सेक्टर्स (हेल्थकेयर) की ओर रही, जबकि कैपिटल मार्केट्स और डिफेंस में बिकवाली का दबाव रहा।
सितम्बर से क्या उम्मीद करें?
डोमेस्टिक स्तर पर 3-4 सितंबर की GST काउंसिल मीटिंग में रेट्स को सरल बनाकर दो-रेट स्ट्रक्चर पर चर्चा हो सकती है, जबकि ग्लोबल स्तर पर PM मोदी का चीन के साथ समीकरण, SCO मीटिंग के नतीजे, अमेरिका में ट्रंप के टैरिफ पर कोर्ट का गैरकानूनी करार, ऑटो सेल्स नंबर, मासिक GST कलेक्शन्स और सितंबर में US फेड द्वारा संभावित 25 bps रेट कट निवेशकों के लिए अहम ट्रिगर रहेंगे।
भारत–अमेरिका ट्रेड टॉक्स पर भी नज़र रहेगी। व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि यदि भारत रूसी तेल खरीदना बंद करता है, तो उसे 25% टैरिफ कटौती मिल सकती है। इस बीच FIIs की लगातार बिकवाली बाजार के मूड को दबाव में रख सकती है।
निकट भविष्य में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है। निवेशकों को निर्यात-आधारित सेक्टर्स में जोखिम घटाकर, डोमेस्टिक कंज़म्प्शन से लाभान्वित होने वाले सेक्टर्स और मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियों पर ध्यान देना उचित होगा।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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