भारतीय सरकारी सेक्टर देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये सेक्टर न सिर्फ देश इंफ्रास्ट्रक्टर और डेवलपमेंट में योगदान करते हैं, बल्कि सामाजिक कल्याण और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी सुनिश्चित करते हैं। भारत के विभिन्न सरकारी सेक्टर्स की उपस्थिति से लाखों लोगों को रोजगार मिलता है, और ये देश की समग्र प्रगति में एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
आइए, इस आर्टिकल में हम भारतीय सरकारी सेक्टर्स की समीक्षा करते है और समझते है कि वह कैसे देश को आगे बढ़ाने में अहम् भूमिका निभा रहें है।
स्वतंत्रता के पहले का भारत
ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में सरकारी सेक्टर्स का विकास मुख्य रूप से रेलवे और डाक सेवाओं तक ही सीमित था। 1853 में भारत की पहली रेल सेवा शुरू हुई, जो ब्रिटिश कोलोनियल हितों की पूर्ति के लिए थी और 19वीं शताब्दी में, विशेषकर 1880 और 1890 के दशक में, रेलवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ। रूट माइलेज 1880 में 9,308 से बढ़कर 1900 में 24,752 हो गया, जो मुख्य रूप से कच्चे माल की ढुलाई के लिए उपयोग होता था। उस दौरान सरकारी हस्तक्षेप सीमित था और अधिकांश इंडस्ट्री, जैसे जूट और कपड़ा, प्राइवेट हाथों में थे।
स्वतंत्रता के बाद आर्थिक सुधार
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), देश का केंद्रीय बैंकिंग नियामक, 1 जनवरी, 1949 को राष्ट्रीयकृत किया गया था। स्वतंत्रता के तुरंत बाद, सरकार ने 1951 में पहली पंचवर्षीय योजना के साथ एक समाजवादी पथ अपनाया, जिसके लिए बैंकिंग क्षेत्र से बहुत अधिक वित्तीय सहायता की आवश्यकता थी। इस कदम ने देश की आर्थिक नींव को मजबूत किया और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
स्वतंत्रता के बाद, भारत सरकार ने कई प्रमुख सुधार किए। जहां 19 जुलाई 1969 में, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 14 प्रमुख बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया, और इसके बाद फिर 15 अप्रैल, 1980 को 5 अन्य प्राइवेट बैंक्स का राष्ट्रीयकरण किया गया। इसी प्रकार, 1971-72 में कोयला सेक्टर का भी राष्ट्रीयकरण किया गया।
इस प्रकार, स्वतंत्रता के बाद सरकारी सेक्टर्स का विकास तेजी से हुआ, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास को मजबूती मिली।
प्रमुख सरकारी सेक्टर
रेलवे सेक्टर
भारतीय रेलवे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है और यह 13 लाख से अधिक कर्मचारियों के साथ देश का सबसे बड़ा नियोक्ता है। इतना ही नहीं, हर दिन 2.3 करोड़ से अधिक यात्री भारतीय रेलवे का उपयोग करते हैं, और
भारतीय रेलवे का लक्ष्य देश की GDP में लगभग 1.5% का योगदान देना है।

इसके साथ ही, भारत सरकार ने रेलवे के लिए इस FY 2024-25 में ₹2,62,200 करोड़ का बजट आवंटित किया है और साथ ही भारतीय रेलवे के अनुसार, अगले पांच सालों में, भारत का रेलवे मार्केट दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मार्केट बन जाएगा, जो ग्लोबल मार्केट का 10% हिस्सा होगा।
डिफेंस सेक्टर
ग्लोबल पावर इंडेक्स के अनुसार, भारत सरकार ने 2025 तक डिफेंस प्रोडक्शन का लक्ष्य 25 बिलियन अमेरिकी डॉलर (जिसमें से 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात भी शामिल है) तय किया है। भारत दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस खर्च करने वाले देशों में से एक है, जिसका कुल खर्च 74.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर (6.21 लाख करोड़ रुपये) है, जो कुल बजट का 13.04% है और 2023-24 के बजट के मुकाबले 4.72% और 2022-23 के आवंटन के मुकाबले 18.35% की वृद्धि दर्शाता है।

भारत की कुछ प्रमुख डिफेंस प्रोडक्शन कंपनियाँ हैं जो भारत को आत्मनिर्भर बनाने में अहम् भूमिका निभा रही है जिनमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), भारत डायनेमिक्स, भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) और हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) आदि शामिल है।
एनर्जी और पावर सेक्टर
भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा बिजली उत्पादक और उपभोक्ता है, जिसकी स्थापित बिजली क्षमता 30 अप्रैल, 2024 तक 442.85 GW थी।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) का अनुमान है कि भारत की बिजली की आवश्यकता 2030 तक बढ़कर 817 गीगावाट हो जाएगी। इसके अलावा, CEA का अनुमान है कि 2029-30 तक रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादन का हिस्सा 18% से बढ़कर 44% हो जाएगा, जबकि थर्मल एनर्जी का हिस्सा 78% से घटकर 52% हो जाएगा। इसके साथ ही, सरकार का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता स्थापित करना है।
हेल्थकेयर सेक्टर
हेल्थकेयर भारत के सबसे बड़े सेक्टर्स में से है, फिर चाहे वह रेवेन्यू की बात हो या फिर रोजगार। इसके साथ ही सरकार का लक्ष्य भारत को ग्लोबल हेल्थकेयर हब के रूप में विकसित करना है और 2025 तक देश के ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) का 2.5% तक सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च बढ़ाने की योजना बना रही है।
सरकार ने मेडिकल डिवाइसेस के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष PLI योजना शुरू की है, जिसका कुल बजट FY 2027-28 तक 3,420 करोड़ रुपये है। इसके साथ ही, बजट 2023-24 के अनुसार, सरकार ने देश भर में 157 नए नर्सिंग कॉलेज स्थापित करने की घोषणा की और केंद्रीय बजट 2024-25 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए 87,656.90 करोड़ रुपये आंवटित किए है।
एजुकेशन सेक्टर
शिक्षा के सेक्टर में, भारत सरकार केन्द्रीय विद्यालय (KVs), नवोदय विद्यालय (NVs) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) जैसे उच्च शिक्षा संस्थानों का संचालन करती है। देश में 1,248 केंद्रीय विद्यालय और 661 नवोदय विद्यालय हैं, जिनमें लाखों छात्रों को गुणवत्ता शिक्षा मिलती है।
भारतीय एजुकेशन और स्किल मार्केट 2020 में 180 अरब डॉलर से 2030 तक 313 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस वृद्धि के साथ, शिक्षा क्षेत्र में लगभग 5 मिलियन नई नौकरियों का सृजन होगा और 429 मिलियन से अधिक शिक्षार्थियों के जीवन पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसके साथ ही, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 जुलाई को 2024-25 वित्तीय वर्ष के बजट में शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास के लिए 1.48 लाख करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा की।
परिवहन
भारत का सड़क नेटवर्क दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा है, जो कुल 6.7 मिलियन किलोमीटर तक फैला है। यह सड़क नेटवर्क देश में सभी सामानों का 64.5% परिवहन करता है और भारत के कुल यात्री यातायात का 90% सड़क नेटवर्क का उपयोग यात्रा के लिए करता है।
अगले पांच वर्षों में, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) टोल और अन्य स्रोतों से सालाना 1 लाख करोड़ रुपये (14.30 अरब अमेरिकी डॉलर) अर्जित करने में सक्षम होगा। इसके साथ ही, केंद्रीय बजट 2024-25 में सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को ₹2.78 लाख करोड़ का बजट आवंटित हुआ है।
यह सभी सरकारी सेक्टर देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं और जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा रहें हैं।
हालिया सुधार और पहल
मेक इन इंडिया
मेक इन इंडिया अभियान की शुरुआत 2014 में की गई थी, जिसका उद्देश्य भारत को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। इस पहल के तहत सरकार ने 25 से अधिक सेक्टर्स में निवेश को प्रोत्साहित किया है। इसके साथ ही सरकारी सेक्टर्स ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है, जैसे कि रेलवे और डिफेंस सेक्टर्स में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दिया गया है।
डिजिटल इंडिया
डिजिटल इंडिया अभियान की शुरुआत 2015 में की गई थी, जिसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है। डिजिटल इंडिया के तहत DigiLocker और UMANG जैसे प्लेटफार्म के माध्यम से नागरिकों को आसानी से सरकारी सेवाएं प्राप्त हो रही हैं।
आत्मनिर्भर भारत
आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान की गई थी, जिसका उद्देश्य भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। इस अभियान के तहत सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपये (GDP का 10%) का आर्थिक पैकेज घोषित किया। डिफेंस, MSMEs और एनर्जी जैसे सेक्टर्स में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कई सुधार किए गए।
निष्कर्ष
भारत में सरकारी क्षेत्रों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है और यह देश के विकास में एक मजबूत आधार प्रदान करती है। आने वाले वर्षों में, निजीकरण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) जैसे कदम सरकारी सेक्टर्स को और भी अधिक प्रभावी बना सकते हैं। इसके साथ ही, सरकार के सतत विकास के प्रयास और डिजिटलीकरण के माध्यम से सरकारी सेक्टर्स के साथ ही प्राइवेट सेक्टर्स का भी भविष्य उज्जवल लग रहा हैं।
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*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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