भारत में EV बैटरी रीसाइक्लिंग का क्या है भविष्य?

भारत में EV बैटरी रीसाइक्लिंग का क्या है भविष्य?
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भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है और साथ ही EV बैटरी रीसाइक्लिंग एक महत्वपूर्ण चुनौती और अवसर के रूप में उभर रही है। इस क्षेत्र में न केवल पर्यावरणीय स्थिरता की संभावनाएं हैं बल्कि आर्थिक विकास के नए द्वार भी खुल रहे हैं। भारत सरकार के नेट-जीरो इमिशन 2070 के लक्ष्य के साथ एक मजबूत EV बैटरी रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम को मजबूत करना आवश्यक हो गया है।

आइए समझते हैं कि भारतीय EV बैटरी रीसाइक्लिंग में क्या हो रहा है और निवेशकों के लिए इस सेक्टर में क्या संभावनाएं हैं।

भारतीय EV मार्केट की वर्तमान स्थिति

भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मार्केट बेहद तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। फॉर्च्यून बिजनेस इनसाइट्स के अनुसार, 2024 में भारत का EV मार्केट लगभग 23.38 बिलियन डॉलर का था और अनुमान है कि यह 2032 तक बढ़कर 117.78 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। यह 22.4% की CAGR से बढ़ रहा है, जो इसे दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते मार्केट्स में शामिल करता है।

भारतीय EV मार्केट 22.4% की CAGR के साथ 2032 तक बढ़कर 117.78 बिलियन डॉलर पहुंचने की उम्मीद है।

FY25 में भारत में कुल 20,37,831 इलेक्ट्रिक व्हीकल (EVs) की बिक्री हुई। यह आंकड़ा FY24 के 17,61,520 यूनिट्स की तुलना में 15.68% की YoY वृद्धि को दर्शाता है। इससे पहले FY23 में EV की बिक्री 12,46,634 यूनिट्स थी, जो बताता है कि EV अपनाने की गति लगातार तेज़ हो रही है।

लिथियम-आयन बैटरी की डिमांड और रीसाइक्लिंग अवसर

EV मार्केट के विस्तार के साथ ही बैटरी रीसाइक्लिंग का महत्व भी तेज़ी से बढ़ रहा है। बैटरियों का सही तरीके से रीसाइक्लिंग न केवल पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ज़रूरी है, बल्कि महत्वपूर्ण मेटल्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट और निकल (Nickel) की पुनः प्राप्ति के लिए भी अहम है।

नीति आयोग के अनुसार, भारत में लिथियम-आयन बैटरी की संभावित डिमांड 2022-2030 के दौरान सभी सेगमेंट्स में लगभग 600 GWh तक पहुंचने की उम्मीद है। इसमें से 128 GWh 2030 तक रीसाइक्लिंग के लिए उपलब्ध होगी, जिसमें 46% (59 GWh) अकेले EV से आने का अनुमान है।

सरकारी नीतियां

भारत सरकार ने बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2022 के माध्यम से एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR) फ्रेमवर्क लागू किया है। ये नियम बैटरी मैन्युफैक्चरर्स, आयातकों और रीसाइक्लर्स पर कानूनी दायित्व निर्धारित करते हैं। नीति में रीसाइक्लर्स के लिए चरणबद्ध रिकवरी टार्गेट निर्धारित किए गए हैं – EV में लिथियम-आयन बैटरी के लिए FY25 में 70% से FY27 में 90% तक।

4W EV OEM के लिए, FY23 में व्हीकल में उपयोग की गई 70% बैटरियों को EPR टार्गेट के अनुसार 2030-31 में रिकवर करना है। 2035-36 तक प्रत्येक वर्ष के लिए विस्तृत टार्गेट निर्धारित किया गया है।

केंद्रीय बजट 2025-26 में सरकार ने कोबाल्ट पाउडर और वेस्ट, लिथियम-आयन बैटरी ट्रैश, लेड, जिंक और 12 अन्य आवश्यक खनिजों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) की छूट की घोषणा की है। नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन के लिए 410 करोड़ रुपए (47.20 मिलियन डॉलर) का आवंटन किया गया। साथ ही, एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज के लिए PLI स्कीम का बजट आवंटन 15.42 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 155.76 करोड़ रुपए कर दिया गया है।

पर्यावरणीय और आर्थिक चुनौतियां

लिथियम-आयन बैटरियों में निकल, कोबाल्ट, मैंगनीज और लिथियम जैसे तत्व होते हैं जो गलत तरीके से एक्सट्रेक्ट करने पर पर्यावरणीय खतरा पैदा करते हैं। जब ये लैंडफिल में फेंके जाते हैं तो ये मिट्टी और पानी में रिसकर इकोसिस्टम को दूषित करते हैं और मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा बनते हैं। कोबाल्ट और निकल जैसी भारी मेटल्स कैंसरकारी हो सकते हैं और सांस संबंधी समस्याएं, न्यूरोलॉजिकल नुकसान और अंग विफलता का कारण बन सकती हैं।

आर्थिक दृष्टि से, लिथियम-आयन बैटरियों में शामिल मेटल्स महंगी और प्राप्त करना कठिन हैं। एक कुशल बैटरी रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री स्थापित करके, भारत इन मेटल्स को पुनः प्राप्त कर सकता है और चीन, जापान और दक्षिण कोरिया से महंगे आयात पर निर्भरता कम कर सकता है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि पुरानी बैटरियों से 95% तक लिथियम, कोबाल्ट और निकल पुनः प्राप्त किया जा सकता है।

वॉचलिस्ट में शामिल करने के लिए स्टॉक्स

भविष्य की संभावनाएं

डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक प्रतिवर्ष लगभग 1.2 मिलियन एंड-ऑफ-लाइफ EV बैटरियों को रीसाइकल करने की आवश्यकता होगी और यह संख्या 2040 तक प्रतिवर्ष 14 मिलियन तक बढ़ सकती है। वर्तमान में भारत में लगभग 2GWh की रीसाइक्लिंग क्षमता है और 2030 तक 58.88 GWh वेस्ट EV बैटरी वॉल्यूम की उम्मीद है।

भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का तेज़ी से अपनाया जाना और बढ़ती पर्यावरणीय चिंताएँ इस सेक्टर को आगे बढ़ा रही हैं। लिथियम-आयन बैटरियों की डिमांड दशक के अंत तक लगभग 600 GWh तक पहुंचने की संभावना है। साथ ही, सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक भारतीय सड़कों पर 80 मिलियन EVs हों।

*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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