9 जुलाई को, भारतीय रिजर्व बैंक ने FY24 के लिए अपना वित्तीय समावेशन इंडेक्स जारी किया, जो मार्च 2023 में 60.1 से बढ़कर 64.2 हो गया। RBI ने इस सुधार का श्रेय मुख्य रूप से यूसेज डायमेंशन को दिया, जो वित्तीय समावेशन के गहरे स्तर को दर्शाता है।
आइए समझें के इंडेक्स के प्रमुख निष्कर्ष क्या हैं और जानें कि सभी नागरिकों को वित्तीय सेवाएं प्रदान करने के हमारे लक्ष्य में हम कहां तक पहुंचे हैं।
क्या है मामला?
भारतीय रिजर्व बैंक का वित्तीय समावेशन इंडेक्स, जो वित्तीय समावेशन के स्तर को मापता है, मार्च 2024 में 64.2 तक बढ़ गया, जो सभी मेट्रिक्स में प्रगति को दर्शाता है। यह इंडेक्स वित्तीय समावेशन के विभिन्न पहलुओं पर डेटा को सिंगल वैल्यू में संकलित करता है जो 0 से 100 तक होता है, जहां 0 का मतलब कुल वित्तीय बहिष्करण और 100 का मतलब पूर्ण वित्तीय समावेशन होता है।
मार्च 2021 को समाप्त होने वाली अवधि के लिए वार्षिक वित्तीय समावेशन इंडेक्स 53.9 था, जो मार्च 2017 को समाप्त होने वाली अवधि के लिए 43.4 था। यह इंडेक्स हर साल जुलाई में जारी किया जाता है।

भारत का वित्तीय समावेशन हर गुजरते साल के साथ तेजी से बढ़ रहा है।
सरकारी पहलें
वित्तीय समावेशन सरकार की तरफ से लगातार फोकस का विषय बना हुआ है। प्रधान मंत्री जन धन योजना (PMJDY), प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना, मुद्रा योजना, स्टैंड अप इंडिया और अटल पेंशन योजना जैसी पहलों से उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
और भी बहुत कुछ
FI-इंडेक्स को एक व्यापक माप के रूप में डिजाइन किया गया है यह बैंकिंग, निवेश, बीमा, डाक और पेंशन क्षेत्रों के आंकड़ों को एकीकृत करता है। इसे सरकार और संबंधित क्षेत्रीय रेगुलेटर्स के सहयोग से विकसित किया गया है। यह इंडेक्स वित्तीय सेवाओं तक पहुंचने में आसानी, उपलब्धता, उपयोग और गुणवत्ता का मूल्यांकन करता है।
भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, इस इंडेक्स का एक अनूठा पहलु गुणवत्ता का पैरामीटर है। यह वित्तीय साक्षरता, उपभोक्ता संरक्षण, सर्विस की कमियों और असमानताओं जैसे इंडीकेटर्स के माध्यम से वित्तीय समावेशन का आकलन करता है।
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*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर