सोना-चांदी हुआ सस्ता: क्या निवेश का सही मौका है?

सोना-चांदी हुआ सस्ता: क्या निवेश का सही मौका है?
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बीते कुछ दिनों में कमोडिटी मार्केट, विशेष रूप से कीमती धातुओं के निवेशकों के लिए काफी वोलेटाइल रहा है। सोना और चांदी, जिन्हें अनिश्चित समय में सबसे सुरक्षित निवेश या ‘सेफ हेवन’ माना जाता है, उनकी प्राइस में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। मार्केट में आए इस अचानक भूचाल ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। जहां एक ओर प्राइस रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर बजट 2026 ने मार्केट की दिशा को और जटिल बना दिया है।

यह गिरावट सामान्य करेक्शन नहीं है, बल्कि इसे हाल के दशकों की सबसे बड़ी एकल-दिवसीय गिरावटों में से एक के रूप में देखा जा रहा है। निवेशक अब यह सोचने पर मजबूर हैं कि क्या यह गिरावट खरीदारी का सही मौका है या उन्हें अभी और सतर्क रहने की जरूरत है। आइए समझते है।

क्या है मामला?

यह गिरावट कमोडिटी मार्केट के लिए एक चेतावनी की तरह थी, क्योंकि 30 जनवरी को जिस तरह सोना और चांदी अचानक नीचे आए, वह हाल के वर्षों में शायद ही कभी देखा गया हो। चांदी में 30% की गिरावट और सोने में 15% का गिरावट इस बात का संकेत था कि मार्केट अपनी सामान्य रफ्तार से काफी आगे निकल चुका था। यह सिर्फ एक तकनीकी गिरावट नहीं थी, बल्कि 1980 के बाद से सबसे बड़ी एक-दिवसीय गिरावटों में से एक मानी गई। प्राइस में आया यह अचानक ‘फ्री फॉल’ इतनी तेज था कि चांदी के फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट में लोअर सर्किट लगाना पड़ा, जो अपने आप में मार्केट की असंतुलित स्थिति को दर्शाता है।

लेकिन दिलचस्प मोड़ तब आया जब 2 फरवरी 2026 को, भारी उथल-पुथल के बाद मार्केट ने अचानक पलटी मारी। सेशन की शुरुआत में लगभग 20% तक टूटने के बाद, गोल्ड और सिल्वर ETFs ने शानदार रिकवरी दिखाई और मिड-ट्रेड तक करीब 10% वापस पा लिया। यह रिबाउंड इसलिए देखने को मिला क्योंकि पिछले रिकॉर्ड हाई के बाद तेज़ बिकवाली में निवेशकों ने मुनाफा बुक किया, जबकि कई ट्रेडर्स ने अपनी लिवरेज पोजीशन खत्म कर दीं। इन दोनों डेवलपमेंट के चलते ट्रेडिंग स्तर पर पैनिक-सेल्लिंग हुई, लेकिन जैसे ही मार्केट ने संतुलन पकड़ा, प्राइस में वापसी की कोशिश साफ दिखाई देने लगी।

गिरावट के पीछे के प्रमुख कारण

इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे केवल तकनीकी करेक्शन नहीं, बल्कि ठोस जिओपॉलिटिकल और आर्थिक कारण भी जिम्मेदार हैं।

  • केविन वॉर्श की नियुक्ति: पूर्व फेडरल रिजर्व गवर्नर केविन वॉर्श को अमेरिकी ट्रेजरी सचिव के रूप में नामित किए जाने की खबर ने मार्केट को चौंका दिया। वॉर्श को एक मजबूत डॉलर और उच्च बांड यील्ड का पक्षधर माना जाता है। चूंकि सोना और डॉलर अक्सर विपरीत दिशा में चलते हैं, इसलिए मजबूत डॉलर की संभावना ने सोने की प्राइस पर भारी दबाव डाला।
  • जिओपॉलिटिकलतनाव में कमी: मध्य पूर्व में, विशेष रूप से इज़राइल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम की उम्मीदों ने निवेशकों के बीच डर को कम किया। जब डर कम होता है, तो ‘सेफ हेवन’ यानी सोने की डिमांड घट जाती है, जिससे प्राइस में गिरावट आई।
  • टैरिफ की धमकियां: पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा मेक्सिको, कनाडा और चीन पर टैरिफ लगाने की धमकियों ने भी मार्केट की धारणा को प्रभावित किया, जिससे अनिश्चितता बढ़ी और कमोडिटी मार्केट में बिकवाली का दबाव बना।

सोना-चांदी ETFs में गिरावट जारी

सोने और चांदी के मार्केट में आई हालिया उथल-पुथल ने ETF निवेशकों को सबसे ज़्यादा प्रभावित किया। अधिकांश गोल्ड और सिल्वर ETFs अपने लोअर सर्किट पर पहुँच गए, जिसकी वजह से बिकवाली के ऑर्डर होने के बावजूद ट्रेड सफल नहीं हो पाए। यह स्थिति इसलिए बनी क्योंकि ETF NAV पर सर्किट लिमिट पहले से तय होती है सिल्वर ETFs के लिए 20% और गोल्ड ETFs के लिए 12%। जब प्राइस इन सीमाओं से नीचे चली जाती हैं, तो सिस्टम ट्रेडिंग को अपने-आप रोक देता है, ताकि घबराहट में आने वाली अनियंत्रित गिरावट से मार्केट को बचाया जा सके।

सोने और चांदी के ETFs में संकट सोमवार यानि 2 फरवरी 2026 को और गहरा गया, क्योंकि लगातार तीसरे सत्र में डोमेस्टिक और ग्लोबल मार्केट्स गिरावट जारी रही। NSE पर गोल्ड ETFs इंट्राडे में 6 से 11% तक टूटे, जबकि सिल्वर ETFs लगभग 20% गिर गए, जिससे निवेशकों में घबराहट बढ़ी।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

इतनी तेज़ गिरावट के बाद स्वाभाविक है कि निवेशकों के मन में सवाल उठे कि क्या यह सही समय है सोने और चांदी में खरीदारी करने का। लेकिन ध्यान रखें प्राइस आकर्षक स्तर पर जरूर दिख रही हैं, लेकिन वर्तमान माहौल अभी भी अस्थिर है, इसलिए जल्दबाज़ी करना जोखिम बढ़ा सकता है।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, पोर्टफोलियो का केवल 10 से 15% हिस्सा ही सोने और चांदी जैसे एसेट्स में होना चाहिए। यह रेश्यो मार्केट की अनिश्चितता के समय एक प्रभावी हेज का काम करता है। इसके अलावा, फिजिकल सोने और चांदी की तुलना में ETFs ज़्यादा बेहतर माने जाते हैं। हाल ही में इनमें क्रैश जरूर देखा गया है, लेकिन लंबी अवधि में इनकी लिक्विडिटी, सुरक्षा और ट्रांसपेरेंसी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण फायदे प्रदान करती है।

भविष्य की बातें

गिरावट भले ही गंभीर दिख रही हो, लेकिन अधिकांश एक्सपर्ट्स इसे कीमती धातुओं के अंत के रूप में नहीं देख रहे। उनका मानना है कि सोना अभी भी YoY आधार पर ऊँचे स्तर पर बना हुआ है, और सेंट्रल बैंक्स की लगातार खरीद, जिओपॉलिटिकल तनाव और ग्लोबल अनिश्चितता जैसे लॉन्गटर्म सपोर्ट फैक्टर अभी भी पूरी तरह मौजूद हैं।

फिर भी इस गिरावट ने एक महत्वपूर्ण सच सामने रखा कि पारंपरिक सुरक्षित माने जाने वाले एसेट भी तब कमजोर पड़ सकते हैं जब मार्केट में रैली चल रही हो और अत्यधिक लीवरेज पोज़िशन जुड़ हुए हो। ऐसी स्थितियों में छोटी सी वोलैटिलिटी भी बड़ी गिरावट का रूप ले सकती है।

यह भी साफ़ है कि अमेरिका की नई फेडरल रिज़र्व नेतृत्व के तहत कड़े मॉनेटरी रुख की संभावना बढ़ गई है। जैसे-जैसे मार्केट इस बदलते माहौल को पचा रहे हैं, आने वाले दिनों में सोने और चांदी की प्राइस में उतार-चढ़ाव ऊँचा बना रह सकता है। निवेशकों के लिए यह दौर धैर्य और सतर्कता से आगे बढ़ने का है, क्योंकि लॉन्गटर्म ट्रेंड अभी भी मजबूत हैं, लेकिन शॉर्टटर्म में अभी वोलैटिलिटी बनी रह सकती है।

*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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