भारत का टूरिज्म सेक्टर अब केवल ऐतिहासिक जगहों, मंदिरों और प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं रह गया है। बेहतर सड़कें, नए एयरपोर्ट, मजबूत रेल कनेक्टिविटी और अनुभव-आधारित टूरिज्म ने भारत को ग्लोबल टूरिज्म मैप पर अधिक मजबूत बना दिया है। यही वजह है कि 2024 में भारत की विदेशी मुद्रा कमाई यानी फॉरेन एक्सचेंज अर्निंग (FEEs) US$ 35.016 बिलियन तक पहुंच गई, जो 2023 के US$ 32.189 बिलियन से 8.78% अधिक है।
आइए भारत के टूरिज्म क्षेत्र की इस उन्नति को विस्तारपूर्वक समझें और जानें कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और रिच एक्सपीरियंस कैसे इसे निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर बना रहे हैं।
क्या है मामला?
भारत की हिस्सेदारी ग्लोबल टूरिज्म में लगातार बेहतर हो रही है। देश का हिस्सा अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आगमन में 1.40% और ग्लोबल टूरिज्म प्राप्तियों में 2.02% है। 2024 में International Tourist Arrivals (ITAs) 20.57 मिलियन तक पहुंच गए, जो 2023 से 8.89% अधिक और 2019 की तुलना में 14.82% ज्यादा है।
Foreign Tourist Arrivals (FTAs) 9.95 मिलियन रहे, जबकि नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) की संख्या 10.62 मिलियन रही। NRIs की संख्या 2023 के मुकाबले 13.22% बढ़ी है।
क्षेत्रीय आधार पर सबसे अधिक FTAs एशिया और पैसिफिक से आए, जिनकी हिस्सेदारी 43.00% रही। इसके बाद यूरोप की हिस्सेदारी 26.70% और नॉर्थ अमेरिका की 23.10% रही।
डोमेस्टिक टूरिज्म भी बेहद मजबूत रहा। 2024 में भारत में 2,948.19 मिलियन डोमेस्टिक टूरिज्म विजिट्स दर्ज किए गए, जो 2023 के 2,508.82 मिलियन से 17.51% अधिक हैं। उत्तर प्रदेश 646.81 मिलियन विजिट्स के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि तमिलनाडु 306.84 मिलियन विजिट्स के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि भारत में टूरिज्म की ग्रोथ केवल विदेशी पर्यटकों पर निर्भर नहीं है। डोमेस्टिक टूरिज्म भी इस सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है।
इंफ्रास्ट्रक्चर से कैसे बदली तस्वीर?
भारत में टूरिज्म ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ा कारण बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर है। 2004 से 2025 के बीच नेशनल हाईवे नेटवर्क 65,569 किमी से बढ़कर 1,46,204 किमी हो गया। हाईवे निर्माण की गति भी 11.6 किमी प्रति दिन से बढ़कर 34 किमी प्रति दिन पहुंच गई।
इसी दौरान एयरपोर्ट्स की संख्या 74 से बढ़कर 160 हो गई। मेट्रो रेल नेटवर्क 248 किमी से बढ़कर 1,013 किमी तक पहुंच गया। पोर्ट क्षमता 1,400 MMTPA से बढ़कर 2,762 MMTPA हो गई, जबकि Inland Waterways पर कार्गो मूवमेंट में 710% की वृद्धि दर्ज की गई।
इन सुधारों का सीधा असर टूरिज्म पर दिख रहा है। तीर्थ स्थल, हिल स्टेशन और नए डेस्टिनेशंस तक पहुंच पहले से आसान हुई है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर इसका बड़ा उदाहरण है। 2021 में इसके उद्घाटन के बाद वाराणसी में पर्यटकों की संख्या 2017 के 67 लाख से बढ़कर 2024 में लगभग 11 करोड़ तक पहुंच गई।
मिजोरम में बैराबी-सैरंग रेल लाइन के कारण FY 2024-25 में टूरिस्ट फुटफॉल 114.29% बढ़ा। इसका मतलब साफ है कि जब कनेक्टिविटी बेहतर होती है, तो नए राज्यों और शहरों में भी टूरिज्म तेजी से बढ़ सकता है।
अब भारत में टूरिज्म केवल सड़क और होटल तक सीमित नहीं है। क्रूज टूरिज्म, रिवर टूरिज्म और लाइटहाउस टूरिज्म जैसे नए सेगमेंट्स भी विकसित हो रहे हैं।
सरकारी योजनाओं से मिला सहारा
सरकार ने टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं।
स्वदेश दर्शन योजना के तहत 76 प्रोजेक्ट्स को फंडिंग दी गई, जिनमें से 75 पूरे हो चुके हैं। अब स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत सस्टेनेबल और रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म पर फोकस किया जा रहा है। इसके तहत 34 प्रोजेक्ट्स के लिए ₹793.2 करोड़ मंजूर किए गए हैं।
PRASHAD योजना के तहत तीर्थ स्थलों और धार्मिक टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना में 48 प्रोजेक्ट्स को US$ 198.4 मिलियन की मंजूरी मिली है, जिनमें से 25 पूरे हो चुके हैं।
इसके अलावा चैलेंज-बेस्ड डेस्टिनेशन डेवलपमेंट के तहत 42 डेस्टिनेशंस को चिन्हित किया गया है। इन योजनाओं का मकसद केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि बेहतर सुविधाएं, साफ-सफाई, स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा देना है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
टूरिज्म सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा अवसर बन सकता है। FY23 में इस सेक्टर का GDP में 5% योगदान था और इसने 7.6 करोड़ लोगों को रोजगार दिया। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण टूरिज्म अब टियर-II, टियर-III शहरों और ग्रामीण इलाकों तक फैल रहा है।
इससे होटल, ट्रांसपोर्ट, रिटेल, फूड सर्विस, लोकल गाइड्स, ट्रैवल एजेंसियों और MSMEs को सीधा फायदा मिल सकता है। खास बात यह है कि टूरिज्म का असर केवल एक सेक्टर तक सीमित नहीं रहता। जब कोई पर्यटक किसी शहर में आता है, तो उसका खर्च होटल, टैक्सी, रेस्टोरेंट, शॉपिंग और लोकल सर्विसेज तक फैलता है। यही इसका मल्टीप्लायर इफेक्ट है।
सरकार ने प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करने के लिए होटल्स को इंफ्रास्ट्रक्चर लिस्ट में शामिल किया है। इससे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में लॉन्ग-टर्म निवेश के अवसर मजबूत हो सकते हैं।
लेकिन निवेशकों को यह भी समझना चाहिए कि टूरिज्म सेक्टर सीजनल, इन्फ्रास्ट्रक्चर-निर्भर और पॉलिसी-सेंसिटिव होता है। इसलिए केवल ग्रोथ आंकड़ों को देखकर निवेश करना सही रणनीति नहीं होगी। कंपनी की बैलेंस शीट, लोकेशन स्ट्रेंथ, ऑक्युपेंसी, कर्ज और कैश फ्लो पर भी ध्यान देना जरूरी है।
भविष्य की बातें
भारत का टूरिज्म सेक्टर आने वाले वर्षों में मजबूत ग्रोथ की दिशा में आगे बढ़ सकता है। सरकार 50 टॉप टूरिस्ट डेस्टिनेशंस को चैलेंज मोड में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इससे देश के प्रमुख टूरिज्म स्थलों पर सुविधाएं और बेहतर हो सकती हैं। ‘हील इन इंडिया’ (Heal in India) जैसी पहल मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा दे सकती है। मेडिकल टूरिज्म मार्केट के 2026 तक US$ 13.42 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।
आगे की ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि भारत केवल ज्यादा पर्यटक लाने पर फोकस करता है या बेहतर अनुभव देने पर भी उतना ही ध्यान देता है। यदि कनेक्टिविटी, साफ-सफाई, सुरक्षा, डिजिटल सुविधाएं और स्थानीय अनुभव मजबूत होते हैं, तो भारत ग्लोबल टूरिज्म हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, टूरिज्म सेक्टर भारत के लिए केवल कमाई का स्रोत नहीं है। यह रोजगार, क्षेत्रीय विकास, MSMEs और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का बड़ा माध्यम भी बन सकता है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
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