भारत में मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री तेजी से उभरता हुआ सेक्टर बन रहा है, जो हेल्थकेयर सर्विस के विस्तार और टेक्नोलॉजी में इनोवेशन के साथ ग्लोबल स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। यह इंडस्ट्री न केवल देश की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा कर रही है, बल्कि आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
इस आर्टिकल में हम भारत के मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री की वर्तमान स्थिति, हाल ही ट्रेंड्स, सरकारी पहल, निवेशकों के लिए अवसर, भविष्य की संभावनाओं और इस इंडस्ट्री के सामने आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
भारतीय मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री की वर्तमान स्थिति
भारतीय मेडिकल डिवाइस मार्केट 2023 में 15.35 US बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है और 2029 तक 20.51 US बिलियन डॉलर तक बढ़ने की उम्मीद है। यह ग्रोथ 5.35% की CAGR से होगी। हालांकि, ग्लोबल मार्केट में भारत की हिस्सेदारी अभी सिर्फ 1.65% है, जो इस सेक्टर में और अपार ग्रोथ की गुंजाइश को दर्शाता है। जबकि, वर्तमान में, भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा मेडिकल डिवाइस मार्केट है, जो एशिया में जापान, चीन और दक्षिण कोरिया के बाद आता है।

भारतीय मेडिकल डिवाइस मार्केट 2023 से 2029 बीच 5.35% की CAGR ग्रोथ से बढ़ने की उम्मीद है।
भारतीय मेडिकल डिवाइस मार्केट अपनी जरूरतों का 70-80% आयात पर निर्भर है, जो मुख्य रूप से अमेरिका, चीन और जर्मनी जैसे देशों से होता है। यह आयात निर्भरता देश के लिए एक चुनौती है, लेकिन साथ ही यह डोमेस्टिक निर्माताओं के लिए एक बड़ा अवसर भी है।
इस क्षेत्र में बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ-साथ MSMEs भी सक्रिय हैं। महामारी के दौरान इस क्षेत्र ने तेजी से विकास किया है, जिससे डोमेस्टिक प्लेयर्स, विशेष रूप से इंजीनियरिंग MSMEs, को ग्लोबल मार्केट्स में अपनी पहुंच बढ़ाने का सुनहरा मौका मिला है।
भारतीय मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री की ग्रोथ के पीछे क्या है वजह?
बढ़ती डिमांड: भारत में हेल्थकेयर सुविधाओं की संख्या में वृद्धि के साथ मेडिकल डिवाइस की डिमांड भी बढ़ रही है। अनुमान है कि 2030 तक भारतीय मेडिकल टेक्नोलॉजी क्षेत्र 50 US बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा, जबकि डायग्नोस्टिक डिवाइस मार्केट 2027 तक 4 US बिलियन डॉलर से बढ़कर 6 US बिलियन डॉलर का हो जाएगा।
पॉलिसी समर्थन: सरकार ने मेडिकल डिवाइस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं। नवंबर 2023 में, राष्ट्रीय मेडिकल नीति के तहत छह रणनीतियां तैयार की गईं। इसके अलावा, इस क्षेत्र में 100% FDI की अनुमति है, जिससे डिवाइस, कंज्यूमेबल्स और इम्प्लांट्स जैसे सेक्टर्स में निवेश बढ़ा है।
निवेश में वृद्धि: मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 500 करोड़ रुपये (59.24 मिलियन डॉलर) की योजना शुरू की है। अप्रैल 2000 से मार्च 2024 के बीच, मेडिकल और सर्जिकल डिवाइस क्षेत्र में 3.28 बिलियन डॉलर का FDI फ्लो हुआ है।
भारत-रूस व्यापार लक्ष्य: भारत और रूस ने 2025 तक 30 US बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को निर्धारित किया है। इसके अलावा, प्रति वर्ष 5 US बिलियन डॉलर के अतिरिक्त व्यापार की संभावना है, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, खनिज, स्टील और रसायन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
भारतीय मेडिकल डिवाइस में हाल ही के ट्रेंड्स
बिग डेटा और रोबोटिक्स: कई कंपनियां बिग डेटा और रोबोटिक्स का उपयोग कर रही हैं। जुलाई 2022 में, राजीव गांधी कैंसर संस्थान ने भारत में बने सर्जिकल रोबोटिक सिस्टम को लॉन्च किया। इसके अलावा, मेडट्रॉनिक ने गुरुग्राम में सर्जिकल रोबोट अनुभव केंद्र (SREC) स्थापित किया है।
स्टार्टअप्स और वियरेबल्स: मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में स्टार्टअप्स का प्रवेश बढ़ रहा है। दिसंबर 2023 में, स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने मेडटेक मित्र (MedTech Mitra) प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जो मेडिकल इनोवेटर्स को सहायता प्रदान करेगा। वियरेबल्स जैसे ग्लूकोज मॉनिटर और फिटनेस ट्रैकर्स भी लोकप्रिय हो रहे हैं।
कोविड-19 का प्रभाव: कोविड-19 महामारी के दौरान, भारत ने PPE किट, मास्क, वेंटिलेटर और सैनिटाइजर जैसे प्रोडक्ट्स का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया। हिंदुस्तान सीरिंज एंड मेडिकल डिवाइसेज ने ग्लोबल स्तर पर लगायी गई कुल 13.3 बिलियन कोविड-19 वैक्सीन में से 1.75 बिलियन सीरिंज का उत्पादन किया।
मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री की प्रमुख चुनौतियाँ
रेगुलेटरी बाधाएँ: भारत में मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री को रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। प्रोडक्ट्स को मार्केट में लाने के लिए लंबी और जटिल अप्रूवल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। इससे इनोवेशन और प्रोडक्ट लॉन्च में देरी होती है, जो इंडस्ट्री की ग्रोथ को प्रभावित करती है।
सप्लाई चैन की समस्याएँ: मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री में सप्लाई चैन की चुनौतियाँ भी एक बड़ी बाधा हैं। रॉ मटेरियल की सप्लाई में अनिश्चितता, लॉजिस्टिक्स की कमी और ग्लोबल सप्लाई चैन में व्यवधान इंडस्ट्री को प्रभावित करते हैं। यह समस्या कोविड-19 महामारी के दौरान और भी स्पष्ट हो गई थी।
आयात पर निर्भरता: भारत का मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री अभी भी आयात पर बहुत अधिक निर्भर है। देश में लगभग 75-80% मेडिकल डिवाइस का आयात US, चीन और जर्मनी जैसे देशो से किया जाता है। यह न केवल लागत को बढ़ाता है, बल्कि देश की आत्मनिर्भरता को भी प्रभावित करता है।
निवेश की कमी: मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री को स्थिर और पर्याप्त निवेश की आवश्यकता होती है। इसमें रॉ मटेरियल, मशीनरी और श्रम की लागत के लिए पर्याप्त फंड की जरूरत होती है। मेडिकल डिवाइस निर्माताओं के लिए यह स्थिति और भी जटिल है, क्योंकि इसमें R&D पर अधिक निवेश की आवश्यकता होती है।
सरकारी पहल
मेडिकल डिवाइस पार्क: सरकार ने मेडिकल डिवाइस पार्क स्थापित करने की योजना बनाई है। मार्च 2024 में, 27 नए बल्क ड्रग पार्क और 13 मेडिकल डिवाइस प्लांट लॉन्च किए गए। नोएडा में एक विशाल मेडिकल डिवाइस पार्क बनाया जा रहा है, जिसमें 5,250 करोड़ रुपये (705.38 मिलियन डॉलर) का निवेश होगा और 20,000 लोगों को रोजगार मिलेगा।
PLI योजना: भारत में मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने के लिए, भारत सरकार के फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने उत्पादन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना शुरू की है। इस योजना के तहत, वित्तीय वर्ष 2021-28 की अवधि के लिए 3,420 करोड़ रुपये (468.78 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का फंड आवंटित किया गया है। इसके साथ ही, PLI के अंतर्गत अब तक 26 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है, जिनमें 1,206 करोड़ रुपये (147 मिलियन डॉलर) का निवेश शामिल है।
निवेशकों के लिए अवसर
भारतीय मेडिकल डिवाइस मार्केट निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर प्रदान करता है। 100% FDI की अनुमति और सरकारी योजनाओं के कारण यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। इसके साथ ही, 2025 तक निर्यात 10 US बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, जो 2022 से 2025 के बीच 104% की CAGR ग्रोथ दर्शाता है।

भारतीय मेडिकल डिवाइसेस निर्यात मार्केट 2022 में 2.4 से 2025 तक 10 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
अगर हम भारतीय स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड प्लेयर्स की बात करें तो लगभग सभी कंपनियां स्मॉलकैप और माइक्रोकैप कंपनियां है जिनमें निवेश काफी जोखिम भरा होता है। इसलिए किसी भी कंपनी में निवेश से पहले रिसर्च करना अनिवार्य हो जाता है।
भविष्य की संभावनाएं
वर्तमान में, भारतीय मेडिकल डिवाइस मार्केट की ग्लोबल मार्केट में सिर्फ 1.5% हिस्सेदारी है, हालांकि मेडिकल डिवाइस की मैन्युफैक्चरिंग एवं इनोवेशन में अग्रणी बनने के लिए, भारत सरकार ने मेडिकल डिवाइस नीति को मंजूरी दी है। इस नीति का लक्ष्य अगले 25 वर्षों में ग्लोबल मार्केट में 10-12% हिस्सेदारी हासिल करना है।
साथ ही, डायग्नोस्टिक डिवाइस मार्केट 2023 में 4 US बिलियन डॉलर से बढ़कर 2027 तक 6 US बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
निष्कर्ष के तौर पर, सरकार की पहल, बढ़ती डिमांड और इनोवेशन इस क्षेत्र को ग्लोबल स्तर पर प्रमुख बनाने में मदद कर रहे हैं। मेडिकल डिवाइस पार्क, PLI योजना और स्टार्टअप्स के माध्यम से भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर