भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की डिमांड तेजी से बढ़ रही है, जिससे बैटरी और उसके कंपोनेंट्स की आवश्यकता में भी डिमांड बढ़ गयी है। क्लीन एनर्जी और नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, सरकार बैटरी कंपोनेंट्स के डोमेस्टिक प्रोडक्शन को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई योजना पर काम कर रही है। इस योजना का उद्देश्य देश को बैटरी मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर पैदा करना है।
आइए समझते है सरकार किस नई योजना पर काम रही है और यह निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है।
क्या है मामला?
भारत सरकार बैटरी कंपोनेंट्स के डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना पर काम कर रही है। मिनिस्ट्री ऑफ़ हैवी इंडस्ट्रीज (MHI) इस योजना के लिए एक कॉन्सेप्ट नोट तैयार कर रहा है, जिसमें नीति निर्माताओं के समर्थन को जुटाने का प्रयास किया जाएगा। क्योंकि बैटरी के मुख्य कंपोनेंट्स में एनोड, कैथोड, इलेक्ट्रोलाइट और कॉपर तथा एल्युमिनियम फ़ॉइल शामिल होते हैं और OMI फाउंडेशन की इंडस्ट्री रिपोर्ट के अनुसार, कैथोड और एनोड क्रमशः प्रत्येक बैटरी यूनिट की लागत का 21% और 15% योगदान देते हैं।
इस योजना में डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन (DVA) का मानक भी तय किया गया है। यदि प्रोडक्ट में 50% से अधिक DVA नहीं होगा, तो उसे डोमेस्टिक प्रोडक्ट नहीं माना जाएगा। इससे बैटरी निर्माण में स्थानीय कंपोनेंट्स के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार की पिछली योजनाएं
सरकार ने 2021 में एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरियों की डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए ₹18,100 करोड़ की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI-ACC) लॉन्च की थी। इसका उद्देश्य 50 GWh बैटरी उत्पादन को प्रोत्साहित करना था। अब तक इस योजना के तहत 40 GWh निर्माण क्षमता के लिए प्रोत्साहन दिया जा चुका है।
मार्च 2022 में PLI-ACC योजना की पहली बिडिंग पूरी हुई, जिसमें ओला सेल टेक्नोलॉजीज को 20 GWh क्षमता का सबसे बड़ा हिस्सा मिला। वहीं, ACC एनर्जी स्टोरेज (राजेश एक्सपोर्ट्स) और रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) को 5-5 GWh की प्रोत्साहन मंजूरी मिली। फिर 2024 की दोबारा बिडिंग में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) को 10 GWh निर्माण के लिए ₹3,620 करोड़ का प्रोत्साहन मिला।
इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती डिमांड
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) का मार्केट तेजी से विस्तार कर रहा है। 29 दिसंबर तक 1.94 मिलियन यूनिट्स की बिक्री के साथ, EV बिक्री में 26.5% का YoY ग्रोथ देखी गई है, जो कि 2023 में 1.5 मिलियन यूनिट्स थी। इस ग्रोथ के साथ, देश में EVs का समग्र पेनेट्रेशन अब 7.46% तक पहुंच गया है, जो 2023 में 6.39% था।

भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को तेजी से अपनाया जा रहा है क्योंकि पिछले दो साल में EV सेल्स लगभग दोगुनी हो गई है।
इसी दिशा में सरकार ने हाल ही में PM ई-ड्राइव योजना शुरू की है, जो इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम है। 10,900 करोड़ रुपये के बजट के साथ यह योजना मार्च 31, 2026 तक लागू की जाएगी।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
भारत सरकार द्वारा बैटरी कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए दी जा रही प्रोत्साहन योजनाएं निवेशकों के लिए बड़े अवसर ला सकती हैं। जिससे इलेक्ट्रिक वाहन (EV) इंडस्ट्री में वृद्धि के साथ, बैटरी कंपोनेंट प्रोडक्शन के क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
इससे न केवल इंडस्ट्री सशक्त होगी, बल्कि निवेशकों के लिए स्थिर और लॉन्गटर्म लाभ की संभावना भी बढ़ेगी। इसलिए, यह समय है उन कंपनियों को ट्रैक करने का जो इन योजनाओं से लाभ उठाकर EV सेक्टर में तेजी से विकास कर सकती हैं।
भविष्य की बातें
भारत सरकार ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को बढ़ावा देने के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत 2030-31 तक 4 GWh एनर्जी स्टोरेज क्षमता विकसित करने के लिए ₹3,760 करोड़ का बजटीय समर्थन दिया गया है। यह योजना वर्तमान में लागू नहीं हुई है।
इसके अलावा, बैटरी स्टोरेज सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए इंडस्ट्री सरकार से उन कंपोनेंट्स के लिए अधिक प्रोत्साहन मांग रही है, जिनका निर्माण चुनौतीपूर्ण है। यह कदम भारत में एनर्जी स्टोरेज क्षमता बढ़ाने और क्लीन एनर्जी समाधान को गति देने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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