मेट्रो शहरों में क्विक कॉमर्स किराना दुकानों के लिए नई चुनौती बनकर उभरी है। वर्तमान में तेजी से सामान घर पर ही मंगाने का ट्रेंड बहुत तेजी से बढ़ रहा है, जिससे ट्रेडिशनल किराना दुकानों के लिए मुश्किलें बढ़ गयी हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, रिपोर्ट्स के अनुसार, किराना दुकानों को अब या तो खुद को बदलना पड़ रहा है या फिर बाजार से बाहर होना पड़ रहा है।
आइए समझते है कि क्विक कॉमर्स बूम के पीछे क्या वजह है और यह बदलाव निवेशकों की दृष्टी से क्या मायने रखता है।
क्विक कॉमर्स क्या है?
क्विक कॉमर्स एक ऐसी सर्विस है जो सामान को मात्र 10 से 30 मिनट के भीतर उपभोक्ताओं तक पहुँचाने का वादा करती है। वर्तमान समय में यह सुविधा ज़्यादातर मेट्रो शहरों में ज़ेप्टो, ब्लिंकिट, स्विगी इंस्टामार्ट जैसी कंपनियों द्वारा दी जा रही है। FY24 में FMCG (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) की क्विक कॉमर्स के माध्यम से हिस्सेदारी में दोगुनी वृद्धि हुई है। इसका प्रमुख कारण शहरी भारत में तेजी से बदलते कंस्यूमर व्यवहार और तत्काल सेवा की बढ़ती डिमांड है।
किराना दुकानों की बढ़ती चुनौतियाँ
भारत में वर्तमान समय में लगभग 1.3 करोड़ किराना दुकानें हैं जो किराने और दैनिक उपयोग की वस्तुएं बेचती हैं और यह FMCG कंपनियों के लिए सबसे अहम रेवेन्यू स्त्रोत में से एक है, खासकर जब बात टियर 2 और टियर 3 शहरों और गांवों की आती है। इन क्षेत्रों में बड़े सुपरमार्केट की तुलना में FMCG प्रोडक्ट्स की बिक्री का बड़ा हिस्सा इन्हीं दुकानों के माध्यम से होता है।
लेकिन अब क्विक कॉमर्स के आगमन से मेट्रो शहरों में इनकी जगह सीमित होती जा रही है। इंडिया टूडे के अनुसार, आज भारत में लगभग 45% उपभोक्ता किराने का सामान ऑनलाइन, क्विक कॉमर्स के जरिए खरीदते हैं, जबकि मेट्रो और टियर-1 शहरों में क्रमशः 49% और 47% उपभोक्ता अपनी किराने की जरूरतों के लिए क्विक कॉमर्स का उपयोग करते हैं। इसके साथ ही, कुल 18% उपभोक्ता फ़ूड और पेय पदार्थों की खरीदारी के लिए क्विक कॉमर्स को प्राथमिकता देते हैं।
क्विक कॉमर्स की वृद्धि के कारण
डेलॉइट और FICCI की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से 2023 के बीच क्विक कॉमर्स सेगमेंट में 230% की जबरदस्त वृद्धि हुई है। यह वृद्धि मुख्य रूप से छोटे परिवारों से आयी है, जिनमें दोहरी आय वाले सदस्य शामिल हैं। इसके साथ ही, यह उपभोक्ता सुविधा और तेजी को प्राथमिकता देते हैं, और क्विक कॉमर्स 10 से 30 मिनट के अंदर सामान घर पर पहुंचाकर इन कंस्यूमर की आवश्यकताओं को पूरा करता है।
साथ ही, इस सर्विस की लोकप्रियता का एक प्रमुख कारण फेस्टिव सीजन में FMCG प्रोडक्ट्स की डिमांड में आई तेजी भी है। ई-कॉमर्स सक्षमता (Enablement) Saas प्लेटफ़ॉर्म यूनिकॉमर्स के अनुसार, 2024 में त्योहारी सीज़न की बिक्री के पहले चार दिनों (26-29 सितंबर) के दौरान ई-कॉमर्स ऑर्डर वॉल्यूम में 20% की वृद्धि हुई है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
क्विक कॉमर्स में हो रही तेज़ी से वृद्धि निवेशकों के लिए सुनहरा अवसर लेकर आई है। नए प्लेयर्स जैसे नायका, और मिंत्रा का प्रवेश इस सेक्टर में प्रतिस्पर्धा को और बढ़ावा देगा। इसके साथ ही भारतीय स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड प्लेयर्स की बात करें तो जोमैटो जो कि एक फ़ूड डिलीवरी कंपनी है, अपनी सहायक कंपनी ब्लिंकिट के जरिए क्विक कॉमर्स से जुडी है। साथ ही, बहुत जल्द ही स्विगी भी IPO लाने की तैयारी में है, जो स्विगी इंस्टामार्ट के माध्यम से क्विक कॉमर्स सेगमेंट में काम करती है।
जबकि, रिलायंस रिटेल, जिसने क्विक कॉमर्स में अपनी स्थिति मजबूत की है, अब स्विगी इंस्टामार्ट, जेप्टो और जोमैटो ब्लिंकिट को कड़ी टक्कर दे रहा है। साथ ही, रिलायंस अक्टूबर महीने के अंत तक भारत भर में अपने क्विक कॉमर्स ऑपरेशंस को बढ़ाने की योजना बना रहा है।
भविष्य की बातें
क्विक कॉमर्स ने मेट्रो शहरों में उपभोक्ता व्यवहार में बड़ा बदलाव ला दिया है, जिससे किराना दुकानों को न केवल चुनौती मिल रही है बल्कि खुद को बदलने का दबाव भी बढ़ गया है।
इसके साथ ही, अगर हम क्विक कॉमर्स की बात करें तो, कोविड-19 महामारी के बाद भारत में क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री ने तेजी से वृद्धि की है और अनुमान है कि FY22 से FY27 के बीच यह सेगमेंट 27.9% की CAGR की ग्रोथ से बढ़ेगा। इसके साथ ही, RedSeer की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक यह सेगमेंट 5.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का आंकड़ा छू सकता है और आने वाले समय में, ऑनलाइन ग्रॉसरी मार्केट में क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की भागीदारी 10% से बढ़कर लगभग 45% तक पहुंचने की संभावना है।
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*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर