भारत की तंबाकू इंडस्ट्री देश के सबसे पुराने और संगठित कृषि-आधारित इंडस्ट्री में से एक है। यह इंडस्ट्री खेती से लेकर प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात तक एक व्यापक वैल्यू चेन को कवर करती है। भारत दुनिया के प्रमुख तंबाकू उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है और इसका योगदान न केवल कृषि आय में बल्कि रोजगार, और सरकारी रेवेन्यू में भी महत्वपूर्ण रहा है।
आइए इस आर्टिकल में भारत के तंबाकू इंडस्ट्री की संरचना, उत्पादन, निर्यात प्रदर्शन, ग्लोबल स्थिति और प्रमुख कंपनियों की भूमिका को समझने का प्रयास करते है।
भारत के तंबाकू इंडस्ट्री की वर्तमान स्थिति
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तंबाकू उत्पादक देश है और ग्लोबल उत्पादन में लगभग 9% की हिस्सेदारी रखता है। देश में हर साल करीब 800 लाख टन तंबाकू का उत्पादन होता है, जो लगभग 0.45 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में फैली खेती से आता है। भारत में फ्ल्यू-क्योरड वर्जीनिया, बरले, बीड़ी, ओरिएंटल, रस्टिका, हुक्का, सिगार और च्यूइंग तंबाकू जैसी कई किस्मों का उत्पादन किया जाता है, जो इंडस्ट्री की व्यापकता को दिखाता है।

रोजगार के मामले में तंबाकू इंडस्ट्री बेहद महत्वपूर्ण है। खेती, प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात से जुड़े कार्यों में करीब 3.6-4.6 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है। कम उत्पादन और निर्यात लागत के कारण भारत अन्य तंबाकू उत्पादक देशों की तुलना में प्रतिस्पर्धी बना हुआ है।
आर्थिक रूप से, तंबाकू भारत के एक्साइज रेवेन्यू में लगभग 12% और कृषि निर्यात में करीब 4% का योगदान देता है। डोमेस्टिक डिमांड का बड़ा हिस्सा स्मोकलेस तंबाकू से आता है, जबकि निर्यात से रॉ तंबाकू और सिगरेट के जरिए सालाना 840 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की विदेशी मुद्रा अर्जित होती है। सख्त नियमों और स्वास्थ्य संबंधी कानूनों के बावजूद, तंबाकू इंडस्ट्री आज भी भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा बना हुआ है।
ग्लोबल तंबाकू इंडस्ट्री
ग्लोबल तंबाकू इंडस्ट्री दुनिया के सबसे पुराने और सख्ती से नियंत्रित इंडस्ट्रीज में से एक है, जिसका कुल मार्केट साइज लगभग $850 बिलियन आंका जाता है। यह सेक्टर तंबाकू की खेती से लेकर प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग और मार्केटिंग तक फैला हुआ है, जिसमें सिगरेट, सिगार, स्मोकलेस तंबाकू के साथ-साथ ई-सिगरेट और हीटेड तंबाकू जैसे नए प्रोडक्ट्स भी शामिल हैं। हर साल दुनिया भर में करीब 6 मिलियन टन तंबाकू का उत्पादन होता है और लगभग 5.5 ट्रिलियन सिगरेट स्टिक्स का उपभोग किया जाता है, जो इसइंडस्ट्री के विशाल पैमाने को दर्शाता है।

ग्लोबल कंजम्पशन के लिहाज से एशिया-पैसिफिक क्षेत्र सबसे बड़ा मार्केट है, जहां दुनिया के करीब 65% स्मोकर्स रहते हैं। इसके बाद यूरोप की हिस्सेदारी लगभग 15%, अमेरिका की 10%, अफ्रीका की 7% और मिडिल ईस्ट की करीब 3% है। कुल मिलाकर, दुनिया भर में लगभग 1.3 बिलियन लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। विकसित देशों जैसे नॉर्थ अमेरिका और यूरोप में जहां सख्त हेल्थ रेगुलेशन और बदलती उपभोक्ता पसंद के कारण पारंपरिक सिगरेट का कंजम्पशन घट रहा है, वहीं एशिया-पैसिफिक, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे इमर्जिंग मार्केट्स में डिमांड अब भी मजबूत बनी हुई है।
आर्थिक दृष्टि से तंबाकू इंडस्ट्री सरकारों के लिए एक बड़ा राजस्व स्रोत है। ग्लोबल स्तर पर यह सेक्टर हर साल करीब $200 बिलियन का टैक्स रेवेन्यू पैदा करता है। इसके अलावा, रिड्यूस्ड-रिस्क प्रोडक्ट्स (RRP) का मार्केट वैल्यू लगभग $30 बिलियन तक पहुंच चुका है, जो यह दिखाता है कि इंडस्ट्री धीरे-धीरे नए और वैकल्पिक निकोटिन प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, हेल्थ एडवोकेसी, ESG दबाव और इनोवेशन की चुनौतियों के चलते यह सेक्टर एक ट्रांजिशन फेज में है, जहां पारंपरिक तंबाकू प्रोडक्ट्स और नई पीढ़ी के विकल्पों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश जारी है।
भारत का तंबाकू निर्यात
भारत ब्राज़ील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तंबाकू निर्यातक है और FCV, सन-क्योरड, फ्ल्यू-क्योरड, अनमैन्युफैक्चर्ड नॉन-FCV तंबाकू, सिगार-चेरूट, स्मोकिंग तंबाकू, होमोजेनाइज़्ड तंबाकू, एक्सट्रैक्ट और एसेंस जैसे कई उत्पादों का निर्यात करता है। भारत दुनिया का एकमात्र देश है जहां तंबाकू का उत्पादन दो सीज़न में होता है, जिससे निर्यात आपूर्ति लगातार बनी रहती है।

FY25 में भारत ने 1,46,954 टन FCV तंबाकू का निर्यात किया, जिसकी वैल्यू ₹7,571 करोड़ (US$ 895.9 मिलियन) रही। FY26 के अप्रैल-मई 2025 में 31,908.16 टन FCV तंबाकू का निर्यात ₹1,688.6 करोड़ (US$ 197.71 मिलियन) रहा। इसी अवधि में FY25 में 1,40,046.51 टन अनमैन्युफैक्चर्ड नॉन-FCV तंबाकू का निर्यात ₹4,645.71 करोड़ (US$ 550.08 मिलियन) और FY26 (अप्रैल-मई 2025) में 19,768.09 टन का निर्यात ₹642.73 करोड़ (US$ 75.30 मिलियन) रहा।
कुल मिलाकर, FY25 में अनमैन्युफैक्चर्ड तंबाकू और तंबाकू प्रोडक्ट्स का निर्यात 3,64,575.84 टन और ₹16,728 करोड़ (US$ 1.97 बिलियन) रहा। FY26 के अप्रैल-मई 2025 में यह निर्यात 66,984.61 टन और ₹3,201 करोड़ (US$ 374.9 मिलियन) रहा। भारत करीब 200 देशों को तंबाकू निर्यात करता है, जिनमें UAE सबसे बड़ा आयातक है। FY25 में UAE ने US$ 427 मिलियन और FY26 के अप्रैल-जुलाई 2025 में करीब US$ 134 मिलियन का तंबाकू भारत से आयात किया, जिससे ग्लोबल मार्केट में भारत की मजबूत स्थिति स्पष्ट होती है।
1 फरवरी से नई एक्साइज ड्यूटी
1 फरवरी से लागू हुई नई एक्साइज ड्यूटी के तहत सरकार ने सिगरेट पर लेंथ-आधारित टैक्स स्ट्रक्चर को फिर से परिभाषित किया है। अब सिगरेट पर ड्यूटी उसकी लंबाई और कैटेगरी के अनुसार तय की गई है, जिससे टैक्स स्लैब अधिक स्पष्ट हो गया है। छोटे साइज से लेकर लंबे साइज की सिगरेट्स तक, हर कैटेगरी पर अलग-अलग दरें लागू की गई हैं। इसके अलावा एक ‘अन्य’ कैटेगरी भी शामिल की गई है, जिस पर ₹8,500 प्रति 1,000 स्टिक्स की हाई एक्साइज ड्यूटी लगाई गई है, जो खास तौर पर नॉन-स्टैंडर्ड या असामान्य डिजाइन वाली सिगरेट्स पर लागू होती है।
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वॉचलिस्ट में रखने योग्य स्टॉक्स
तंबाकू सेक्टर की कंपनियां मजबूत कैश फ्लो, स्थिर डिमांड और हाई टैक्स योगदान के कारण लॉन्ग-टर्म में डिफेंसिव प्ले के रूप में देखी जाती हैं।

निष्कर्ष
भविष्य को देखते हुए तंबाकू इंडस्ट्री को केवल डोमेस्टिक कंजम्पशन के बजाय एक्सपोर्ट-ड्रिवन सेक्टर के रूप में समझना ज्यादा प्रासंगिक हो गया है। पहला बड़ा मौका निर्यात से जुड़ा है। भारतीय तंबाकू की डिमांड अंतरराष्ट्रीय मार्केट्स में लगातार बनी हुई है और कंपनियां अब 100 से ज्यादा देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैं। इससे विदेशी करेंसी में कमाई होती है और कंपनियों को बेहतर मार्जिन के साथ करेंसी उतार-चढ़ाव से भी आंशिक सुरक्षा मिलती है।
इसके साथ ही, चाइना प्लस वन रणनीति है। ग्लोबल सप्लाई चेन में डायवर्सिफिकेशन की जरूरत ने भारत को एक मजबूत विकल्प बना दिया है। इसका सीधा असर भारतीय कंपनियों को मिलने वाले लंबे कॉन्ट्रैक्ट्स और स्थिर आय पर पड़ता है, जिससे रेवेन्यू विज़िबिलिटी बेहतर होती है।
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर