भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट (M&E) इंडस्ट्री तेजी से विकसित हो रही है और यह इंडस्ट्री न केवल मनोरंजन का जरिया है बल्कि आर्थिक विकास का भी एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का मार्केट साइज 2026 तक 3.08 ट्रिलियन रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है।
इस आर्टिकल में हम भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट (M&E) इंडस्ट्री के विभिन्न पहलुओं का आंकड़ों के साथ विस्तार से अध्ययन करेंगे और साथ ही समझेंगे कि यह इंडस्ट्री निवेशकों के लिए किया मायने रखती है।
भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट (M&E) इंडस्ट्री
EY की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में भारतीय मीडिया और मनोरंजन इंडस्ट्री ने 2.3 ट्रिलियन रुपये की वैल्यू को पार किया है। जहां, इस इंडस्ट्री में सभी प्रमुख सेगमेंट्स – जैसे टेलीविजन, फिल्म, डिजिटल मीडिया, प्रिंट मीडिया, म्यूजिक, और एनीमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग (AVGC) आदि – में तेजी से ग्रोथ देखी गई है। इस इंडस्ट्री का डायवर्सिफिकेशन और इसके लगातार बढ़ते हुए डिजिटलकरण ने इसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

भारतीय मीडिया सेक्टर के विभिन्न सेगमेंट में डिजिटल मीडिया का योगदान 2024 के अंत तक सर्वाधिक योगदान होगा।
IBEF के अनुसार, भारतीय टेलीविजन इंडस्ट्री, जो 2023 में 8.14 बिलियन डॉलर की थी, वह 2026 तक 9.23 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। सिर्फ इतना ही नहीं, भारतीय संगीत इंडस्ट्री भी विकासशील चरण में है, और 2023 में इसका मार्केट US 180 मिलियन डॉलर का था, जो 2026 तक US 445 मिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
डिजिटल मीडिया का उदय
डिजिटल मीडिया ने पिछले कुछ वर्षों में एक अभूतपूर्व वृद्धि देखी है। EY की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में डिजिटल मीडिया की मार्केट वैल्यू 308 बिलियन रुपये थी, जो बढ़कर 2026 तक 955 बिलियन रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। इसके साथ ही, स्मार्टफोन और इंटरनेट की बढ़ती पहुंच के साथ, OTT प्लेटफ़ॉर्म्स, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग की डिमांड में तेजी से ग्रोथ हो रही है।
सिर्फ इतना ही नहीं, भारतीय अपने मोबाइल फोन ऐप्स पर 78% समय मीडिया और मनोरंजन पर ही खर्च करते हैं यानी स्मार्टफोन भारत में मनोरंजन का सबसे पसंदीदा जरिया बन चुका है, जिसने भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट (M&E) इंडस्ट्री की ग्रोथ में अहम् भूमिका निभाई है।
क्षेत्रीय भाषाओं का उदय
पहले मनोरंजन की दुनिया में मुख्य रूप से हिंदी कंटेंट का ही बोलबाला था, लेकिन अब चीजें बदल रही हैं। मीडिया पार्टनर्स एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में पहली बार क्षेत्रीय OTT कंटेंट की मात्रा हिंदी कंटेंट से आगे निकल गई। इतना ही नहीं, TRAI की रिपोर्ट बताती है कि टेलीविजन दर्शकों का 56% हिस्सा क्षेत्रीय भाषाओं का कंटेंट देखता है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत की विविधता अब मनोरंजन जगत में भी पूरी तरह से झलकने लगी है।
OTT का बढ़ता चलन
भारत में OTT (ओवर-द-टॉप) प्लेटफॉर्म्स का चलन पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है और यह भारतीय मीडिया और मनोरंजन (M&E) उद्योग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। जिसे आप इस बात से समझ से सकते है कि आंकड़ों के मुताबिक, 2026 तक OTT सेगमेंट 14.1% की शानदार CAGR ग्रोथ के साथ 21,032 करोड़ रुपये (US$ 2.55 बिलियन) तक पहुंचने का अनुमान है।
इसके साथ ही, OTT प्लेटफॉर्म्स जैसे नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम, डिज़्नी+ हॉटस्टार, और जी5 आदि ने भारतीय दर्शकों के बीच लोकप्रियता हासिल की है। इन प्लेटफॉर्म्स ने न केवल बड़े शहरों में बल्कि छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपनी जगह बना ली है। स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कंटेंट, वेब सीरीज, और फिल्मों की डिमांड में वृद्धि ने OTT प्लेटफॉर्म्स को और अधिक आकर्षक बना दिया है।
भारत में वीडियो सर्विसेस मार्केट जैसे कि OTT (वीडियो-ऑन-डिमांड) और लाइव का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। IBEF के अनुसार, यह मार्केट 2024 में US 4.1 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है और 2027 तक US 7 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। यह वृद्धि ऑनलाइन प्लैटफॉर्म्स के तेजी से विकास और यूजर्स के बीच गुणवत्तापूर्ण कंटेंट की बढ़ती डिमांड से प्रेरित है।

मीडिया इंडस्ट्री में 2026 तक टेलीविज़न सेगमेंट को पीछे छोड़ते हुए डिजिटल मीडिया का योगदान पहले स्थान पर होगा।
इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए सरकारी पहल
भारत सरकार ने मीडिया और मनोरंजन (M&E) उद्योग को सशक्त बनाने और इसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें से कुछ पहलें निम्नलिखित हैं:
- केबल डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर का डिजिटलीकरण और FDI वृद्धि: सरकार ने केबल और डायरेक्ट-टू-होम (DTH) सैटेलाइट प्लेटफ़ॉर्म्स में FDI की सीमा को 74% से बढ़ाकर 100% कर दिया है, जिससे इस सेक्टर में विदेशी निवेश को और बढ़ावा मिल रहा है।
- फिल्म सुविधा कार्यालय (FFO): सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा स्थापित फिल्म सुविधा कार्यालय (FFO) एकल विंडो क्लीयरेंस के रूप में काम करते है। यह फिल्म निर्माताओं और प्रोडक्शन कंपनियों को आवश्यक फिल्मांकन अनुमतियां प्राप्त करने में सहायता करता है, जिससे फिल्म प्रोडक्शन की प्रक्रिया सुगम हो जाती है।
- अन्य पहल: सरकार ने मुंबई में एनीमेशन, गेमिंग, विजुअल इफेक्ट्स और कॉमिक्स इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए नेशनल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस स्थापित किया है। इसके साथ ही, सरकार मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देने के प्रयास भी कर रही है। सिर्फ इतना ही नहीं, सरकार 2027 तक मीडिया और एंटरटेनमेंट का निर्यात 10 US बिलियन डॉलर तक बढ़ाने के लिए एक योजना तैयार करेगी।
भारतीय स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड प्रमुख मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनियां
भारत में मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, और इस सेक्टर की विभिन्न कंपनियां भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों (NSE और BSE) पर लिस्टेड हैं। ये कंपनियां विभिन्न सेग्मेंट्स जैसे टेलीविजन, फिल्म प्रोडक्शन, डिजिटल मीडिया, विज्ञापन, और प्रिंट मीडिया में काम करती हैं।

यह टेबल बीते वर्षो में मीडिया इंडस्ट्री में योगदान दे रही कंपनियों के स्टॉक प्राइस के प्रदर्शन को दर्शाती है।
भविष्य की बातें
IAMAI और कांतार रिसर्च द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 2020 में ~622 मिलियन से बढ़कर 2025 तक 900 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, जो 45% की CAGR के साथ बढ़ रही है। इसके साथ ही, भारतीय मीडिया और मनोरंजन उद्योग रेवेन्यू 9.7% की दर से बढ़ रहा है जो 2027 तक US$ 73.6 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है।
सिर्फ इतना ही नहीं, विज्ञापन-आधारित वीडियो ऑन डिमांड प्लेटफॉर्म्स (AVoD) सेगमेंट 24% की CAGR दर से बढ़ने की उम्मीद है, और 2025 तक इसका वैल्यू US$ 2.6 बिलियन तक पहुंच सकता है। विज्ञापन-आधारित वीडियो ऑन डिमांड प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती लोकप्रियता दर्शाती है कि विज्ञापनदाता और कंटेंट निर्माता इस नई मीडियम के माध्यम से अधिक दर्शकों तक पहुंचने के लिए उत्सुक हैं।
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*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर