भारत का सेमीकंडक्टर सेक्टर तेजी से विस्तार के दौर में है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर जैसे सेक्टर्स में बढ़ती डिमांड के बीच देश में चिप मैन्युफैक्चरिंग और इससे जुड़े इकोसिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार के साथ-साथ ग्लोबल कंपनियां भी भारत में निवेश बढ़ा रही हैं। ऐसे में सेमीकंडक्टर सेक्टर आने वाले वर्षों में भारत की टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
आइए समझते हैं कि भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट किस दिशा में बढ़ रहा है और इस सेक्टर में हो रहे निवेश का क्या महत्व है।
क्या है मामला?
EY-IESA की ‘Semicon India 2.0: From Capacity Creation to Ecosystem Leadership’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट 2026 के करीब $64 बिलियन से बढ़कर 2035 तक $200 बिलियन हो सकता है। यानी मौजूदा अनुमान के आधार पर मार्केट तीन गुना से अधिक बढ़ सकता है।
वर्तमान में कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स भारत के सेमीकंडक्टर मार्केट की 30% डिमांड के लिए जिम्मेदार है। इसके बाद ऑटोमोटिव सेक्टर की हिस्सेदारी 16% और इंडस्ट्रियल एप्लीकेशंस की 15% है। वहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर्स, टेलीकम्युनिकेशंस, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेगमेंट नई डिमांड पैदा कर रहे हैं।
भारत की सेमीकंडक्टर आयात पर निर्भरता भी इस सेक्टर की स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। आयात FY17 के $5.7 बिलियन से बढ़कर FY25 में $30.3 बिलियन हो गया। इस अवधि में आयात की कंपाउंड वार्षिक ग्रोथ रेट 23% रही। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में दुनिया के करीब 20% चिप डिजाइन इंजीनियर्स मौजूद हैं, जो डोमेस्टिक डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण टैलेंट बेस है।
बढ़ती डिमांड के साथ लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
भारत के सेमीकंडक्टर अवसर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बढ़ती डोमेस्टिक डिमांड को लोकल मैन्युफैक्चरिंग में बदलना है। EY-IESA रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते आयात के आंकड़े इस जरूरत को दिखाते हैं कि डोमेस्टिक आवश्यकताओं को लोकल फैब्रिकेशन और अन्य मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं से जोड़ा जाए।
इसी दिशा में भारत की रणनीति अब केवल चिप असेंबली और टेस्टिंग तक सीमित नहीं है। द हिंदू के अनुसार, सरकार डिजाइन, फैब्रिकेशन, इक्विपमेंट और मटेरियल्स सहित सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के अलग-अलग हिस्सों में क्षमता विकसित करना चाहती है। सरकार का लक्ष्य कारों, टेलीविजन, रेफ्रिजरेटर और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर में इस्तेमाल होने वाले कई चिप्स की डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता भारत में विकसित करना है।
इस विस्तार के लिए Semicon 2.0 के तहत ₹1.27 लाख करोड़ की प्रतिबद्धता की गई है। सरकार के अनुसार, इस चरण में करीब ₹1 लाख करोड़ का निवेश इंटरेस्ट भी प्राप्त हुआ है।
बड़े निवेश से बन रहा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम
सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। साथ ही, नई सेमीकंडक्टर पॉलिसी के बाद ग्लोबल और डोमेस्टिक निवेशकों से करीब $12 बिलियन तक के निवेश कमिटमेंट मिले हैं। ये निवेश इक्विपमेंट, मटेरियल्स और अन्य सेमीकंडक्टर सप्लाई-चेन गतिविधियों से जुड़े हैं।
Applied Materials ने अगले दशक में भारत में $5 बिलियन निवेश की योजना बताई है, जबकि Lam Research ने लोकल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में करीब $1 बिलियन खर्च करने की योजना रखी है। Micron 2027 में भारत में हंड्रेड्स ऑफ मिलियंस चिप्स की टेस्टिंग और असेंबली करने की योजना के साथ आगे बढ़ रही है।
Tata Electronics ने Nexperia के साथ वेफर मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली और टेस्टिंग से जुड़ी साझेदारी और Fujifilm के साथ क्रिटिकल रॉ मटेरियल्स की लोकल प्रोडक्शन तथा सप्लाई चेन विकसित करने के लिए सहयोग की घोषणा की है। इसके अलावा, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के 363 एकड़ के वेंडर पार्क और Fujifilm के ₹800 करोड़ के सेमीकंडक्टर मटेरियल्स प्लांट का भी उल्लेख है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
सेमीकंडक्टर मार्केट के 2026 के करीब $64 बिलियन से 2035 तक $200 बिलियन पहुंचने का अनुमान इस सेक्टर में संभावित लंबी अवधि की डिमांड को दर्शाता है। लेकिन इस अवसर को केवल चिप फैब्रिकेशन तक सीमित देखना सही नहीं होगा।
EY-IESA रिपोर्ट में एडवांस्ड पैकेजिंग, कंपाउंड सेमीकंडक्टर्स, फोटोनिक्स और चिप-टू-सिस्टम इंटीग्रेशन जैसे सेक्टर्स को भी महत्वपूर्ण अवसरों के रूप में बताया गया है।
दूसरी ओर, FY17 से FY25 के बीच सेमीकंडक्टर आयात का $5.7 बिलियन से बढ़कर $30.3 बिलियन होना बताता है कि डोमेस्टिक डिमांड और लोकल सप्लाई के बीच अभी अंतर मौजूद है। इसलिए सेक्टर की प्रगति को केवल निवेश घोषणाओं से नहीं, बल्कि वास्तविक मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन और सप्लाई-चेन क्षमता के विकास से देखना महत्वपूर्ण होगा।
भविष्य की बातें
भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर का अगला चरण केवल नई कैपेसिटी बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। EY-IESA रिपोर्ट में एग्जीक्यूशन, इनोवेशन, टेक्नोलॉजी कमर्शियलाइजेशन, इंडिजिनस IP, स्पेशलाइज्ड टैलेंट और इकोसिस्टम डेप्थ को आगे की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।
सरकार की मौजूदा दिशा भी इसी ओर है। सेमीकंडक्टर क्षमता को कारों, पावर सिस्टम्स, टेलीविजन, रेफ्रिजरेटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स तक विस्तार देने की योजना है। वहीं नए निवेश इक्विपमेंट, मटेरियल्स, वेफर मैन्युफैक्चरिंग और टेस्टिंग जैसे सेक्टर्स तक पहुंच रहे हैं।
इसलिए 2035 तक $200 बिलियन का अनुमान केवल मार्केट साइज की संभावित वृद्धि नहीं है। इसके साथ भारत के सामने यह चुनौती भी है कि बढ़ती डोमेस्टिक डिमांड, चिप डिजाइन टैलेंट और नए निवेश को कितनी प्रभावी तरीके से एक गहरे और व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में बदला जाता है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।