भारत का रियल एस्टेट मार्केट वर्तमान समय में दो विपरीत दिशाओं में आगे बढ़ रहा है। एक तरफ अमीर लोग लक्ज़री घरों की खरीदारी में पहले से कहीं अधिक रुचि दिखा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना लगातार कठिन होता जा रहा है।
लेकिन ऐसा क्यों रहा है और यह भारतीय निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है, आइए समझते है।
क्या है मामला?
2024 में ₹5 करोड़ से अधिक कीमत वाले फ्लैट्स की बिक्री में 80% की वृद्धि देखी गई, जबकि ₹50 लाख से कम कीमत वाले घरों की बिक्री में 14% की गिरावट आई है। यह दर्शाता है कि अमीर और मध्यम वर्ग के बीच आर्थिक असमानता बढ़ रही है, जिससे रियल एस्टेट मार्केट में एक स्पष्ट विभाजन नजर आ रहा है।

2024 में 3 करोड़ से 5 करोड़ तक के घरों की बिक्री 86% बढ़ी, जबकि 50 लाख से कम कीमत वाले घरों की बिक्री 14% घटी है।
पिछले कुछ वर्षों में लक्ज़री हाउसिंग मार्केट में जबरदस्त तेजी आई है। भारत के बड़े शहरों में ऊंची कीमत वाले अपार्टमेंट्स और विला की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। 2023 में ₹3-5 करोड़ की श्रेणी के घरों की बिक्री कुल मार्केट का 5% थी, जबकि 2024 में यह बढ़कर 9% हो गई।
प्रमुख शहरो की बढ़ती भागीदारी
भारत के सात प्रमुख शहर जैसे कि दिल्ली-NCR, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, पुणे और कोलकाता में इस वर्ष 3,02,867 अपार्टमेंट्स बिके, जो 2023 की तुलना में 11% अधिक है।
इस बदलाव के पीछे कई कारण हैं। सबसे प्रमुख वजह अमीरों की बढ़ती संपत्ति और उनके बढ़ते निवेश हैं। कई बिजनेस लीडर्स, स्टार्टअप फाउंडर्स, बॉलीवुड सितारे और NRI इस समय लक्ज़री प्रॉपर्टी मार्केट में दिलचस्पी ले रहे हैं।
मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना क्यों हो रहा है मुश्किल?
भारत में मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है। 2024 में ₹50 लाख से कम कीमत वाले घरों की बिक्री में 14% की गिरावट दर्ज की गई, जो इस बात का संकेत है कि अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट में डिमांड कम हो रही है।
इसकी एक बड़ी वजह बढ़ती महंगाई और घटती घरेलू बचत है। इसके साथ ही, सीमित वेतन वृद्धि जहां सिर्फ सालाना औसतन 13% वेतन वृद्धि हुई जो इस तेजी से बढ़ती जीवन यापन की लागत के सामने अपर्याप्त साबित हुई है। इस वजह से मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति कमजोर हुई, जिससे घर खरीदना और भी मुश्किल हो गया।
निवेशकों के लिए अवसर और चुनौतियाँ
अभी के समय में लक्ज़री हाउसिंग सिर्फ रहने के लिए नहीं, बल्कि एक मजबूत निवेश का विकल्प भी बन चुका है। महंगे घरों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के रूप में इन्हें खरीदना फायदेमंद साबित हो रहा है। लक्ज़री अपार्टमेंट्स से अच्छी रेंटल इनकम भी अर्जित की जा सकती है, खासकर मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में, जहां इनकी डिमांड सबसे अधिक है।
दूसरी ओर, भारतीय स्टोक एक्सचेंज पर लिस्टेड रियल एस्टेट डेवलपर्स, जो प्रीमियम और लक्ज़री हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़े है उन्हें इस ग्रोथ को फायदा मिल रहा है, जिन्हे निवेशक अपनी वॉच लिस्ट में रख सकते है।
भविष्य की बातें
भारतीय रियल एस्टेट मार्केट 2025 में भी ग्रोथ की दिशा में बढ़ सकता है। JLL की रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते शहरीकरण, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रीमियम घरों की बढ़ती डिमांड इस सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। उपभोक्ताओं की बदलती जीवनशैली और बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम भी इस प्रवृत्ति को गति दे रही है।
इसके साथ ही, जैसा कि बिजनेस टुडे में बताया गया है, आर्केड डेवलपर्स के चेयरमैन और MD अमित जैन के अनुसार, 2025 में हाउसिंग डिमांड मजबूत बनी रहेगी, और कीमतों में स्थिर वृद्धि रियल एस्टेट मार्केट को मजबूती देगी। लक्ज़री और अल्ट्रा-लक्ज़री सेगमेंट की ग्रोथ अफोर्डेबल और मिड-इनकम हाउसिंग से तेज रहने की संभावना है, जिससे प्रीमियम सेगमेंट में निवेशकों और खरीदारों की रुचि और अधिक बढ़ सकती है।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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