7 अप्रैल को सेंसेक्स और निफ्टी में पिछले 10 महीनों की सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट दर्ज हुई। यह बड़ी गिरावट पिछले पांच सालों में सबसे महत्वपूर्ण गिरावटों में से एक है, जो पिछले सप्ताह की ग्लोबल सेल-ऑफ से शुरू हुई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ की घोषणा की।
हालांकि टैरिफ ग्लोबल जोखिम हैं, एनालिस्ट मानते हैं कि यह स्थिति भारत की ग्लोबल ट्रेड में स्थिति को मजबूत कर सकती है। आइए इसे विस्तार से समझें।
क्या है मामला?
पिछले सप्ताह, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा की, जिससे ट्रेड वॉर शुरू हुआ और ग्लोबल रिसेशन का डर बढ़ गया। ट्रंप ने भारत पर 26% टैरिफ की घोषणा की, जो भारत के अमेरिकी सामानों पर 52% रेट का आधा है, यह 9 अप्रैल 2025 से लागू होगा। जबकि अन्य देशों पर टैरिफ ज्यादा हैं, जैसे चीन (34%), EU (20%), वियतनाम (46%), और ताइवान (32%)। लेकिन भारत के पास अभी भी नए टैरिफ रेट कम करने का मौका है अगर दोनों देशों के बीच बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट सफलतापूर्वक लागू हो।
सोमवार, 7 अप्रैल को ग्लोबल स्टॉक मार्केट में तेज बिकवाली हुई, और भारतीय मार्केट दिन के अंत में 3.24% नीचे बंद हुआ। लेकिन आज मार्केट गैप-अप के साथ खुला और पॉजिटिव टेरिटरी में ट्रेडिंग कर रहा है।
हालांकि, एनालिस्ट का मानना हैं कि अगर टैरिफ का यह रुझान जारी रहता है, तो भारत के पास खुद को एक प्रमुख ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने का अवसर हो सकता है। वर्तमान में भारत का निर्यात $750–800 बिलियन है, जबकि चीन का $3.3 ट्रिलियन, ऐसे में वृद्धि की काफी संभावनाएं हैं।
टैरिफ वॉर: भारत के लिए अवसर की खिड़की?
तेजी मंदी के VP राज व्यास के अनुसार, “जहां पूरी दुनिया जोखिम देख रही है, वहीं भारत को संभावित फायदा नजर आ सकता है। टैरिफ में कुछ प्रतिशत अंकों का अंतर व्यापार के खेल को पलट सकता है। भारत की स्थिति अनुकूल दिखती है, क्योंकि इसके रेसिप्रोकल टैरिफ एशियाई देशों से कम हैं, जिसका मतलब है कि भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने और मजबूत अर्निंग ग्रोथ दर्ज करने की संभावना है।”
वह आगे कहते हैं, “जब से मार्केट एक इंडेक्स के रूप में ट्रेड करना शुरू हुआ है, पांच अवसर ऐसे आए हैं जब इंडेक्स में लगभग 10% या उससे अधिक की गिरावट आई है – टैरिफ से जुड़ी हालिया गिरावट को छोड़कर सबसे ज्यादा। हमने हर गिरावट के बाद मार्केट परफॉर्मेंस का विश्लेषण किया, और नतीजे बहुत हद तक पॉजिटिव थे। इससे पता चलता है कि जिन निवेशकों में साहस और लिक्विडिटी थी, उन्हें संभवतः सकारात्मक रिटर्न मिला।”
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
मार्केट अस्थिरता परेशान करती है, लेकिन इतिहास दिखाता है कि तेज करेक्शन के बाद मजबूत रिबाउंड होता है। याद करें, कोविड-19 लॉकडाउन से एक दिन पहले निफ्टी 13% गिरा, जो सबसे बड़ी गिरावट थी। अगले दिन यह 7,511 के निचले स्तर पर पहुंचा, फिर सितंबर 2024 में 25,277.35 के रिकॉर्ड हाई तक बुल रन शुरू हुआ।

जो निवेशक शांत रहे और उस दौर में निवेश किए, उन्हें निरंतर लॉन्ग-टर्म गेन मिले। पिछले डेटा से पता चलता है कि गिरावट में खरीदारी से पॉजिटिव रिटर्न मिले, यानी मौजूदा डिप में मूल्यवान अवसर हो सकता है।
पैनिक-सेलिंग की बजाय बड़ी तस्वीर पर फोकस करें। शॉर्ट-टर्म अनिश्चितता के बावजूद, इक्विटी मार्केट्स ने लॉन्ग-टर्म में 14-15% का अच्छा CAGR रिटर्न दिया है।
भविष्य की बातें
जवाबी कार्रवाई में चीन ने अमेरिकी सामानों पर अतिरिक्त 34% टैरिफ लगाया। इसके जवाब में अमेरिका ने 50% और टैरिफ की धमकी दी, जिससे चीनी आयात पर कुल टैरिफ 104% तक पहुंच सकता है। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ता ट्रेड वॉर ग्लोबल ट्रेड फ्लो को बाधित कर रहा है और भारत जैसे देशों के लिए नए दरवाजे खोल रहा है।
अगर टैरिफ वॉर बढ़ा, तो भारत ग्लोबल बिजनेस के लिए आकर्षक और स्थिर मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन बन सकता है। हालांकि, यह बदलाव रातोंरात नहीं होगा और इसमें काफी समय लग सकता है। निवेशकों को धैर्य रखना होगा, पैनिक सेलिंग से बचना होगा, और लेटेस्ट डेवलपमेंट्स पर अपडेट रहना होगा।
मौजूदा टैरिफ स्थिति और इसके मार्केट प्रभाव को गहराई से समझने के लिए, यह यूट्यूब वीडियो देखें जिसमें मिस्टर राज व्यास अपने इनसाइट्स और रिसर्च शेयर कर रहे हैं।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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