2026 में बेहतर रिटर्न के लिए इन 5 गलतियों से बचें

2026 में बेहतर रिटर्न के लिए इन 5 गलतियों से बचें
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नया साल नई उम्मीदें और नए संकल्प लेकर आता है। हम में से कई लोग अपनी सेहत और करियर को बेहतर बनाने का वादा करते हैं, लेकिन वित्तीय सेहत (Financial Health) अक्सर पीछे रह जाती है। एक समझदार निवेशक वह नहीं है जो केवल मुनाफा कमाता है, बल्कि वह है जो उन गलतियों से बचता है जो उसकी कमाई को डूबा सकती हैं।

जैसे ही हम नए साल में कदम रख रहे हैं, यह जरूरी है कि हम अपने निवेश के तरीके पर एक नजर डालें। क्या हम भावनाओं में बहकर फैसले ले रहे हैं? क्या हम बिना किसी योजना के मार्केट में उतर रहे हैं? यहां हम उन गलतियों पर चर्चा करेंगे जिनसे आपको नए साल में बचना चाहिए।

मार्केट को टाइम करने की कोशिश न करें

निवेश की दुनिया में सबसे पुरानी कहावत है ‘मार्केट में समय बिताना, मार्केट को टाइम करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है।’ नए और अनुभवी, दोनों ही निवेशक अक्सर यह गलती करते हैं। वे मार्केट के गिरने का इंतजार करते हैं ताकि ‘लो’ (Low) पर खरीद सकें और ‘हाई’ (High) पर बेच सकें। लेकिन हकीकत यह है कि मार्केट की दिशा का सटीक अनुमान लगाना लगभग नामुमकिन है।

डेटा स्पष्ट रूप से दिखाता है कि यह रणनीति कितनी जोखिम भरी हो सकती है। यदि आप पिछले 20 वर्षों में S&P 500 इंडेक्स के केवल 10 सबसे अच्छे दिनों को मिस कर देते, तो आपका सालाना रिटर्न लगभग 9-10% से गिरकर मात्र 5-6% रह जाता। यह एक बहुत बड़ा अंतर है। जब निवेशक मार्केट से बाहर निकलने का फैसला करते हैं, तो अक्सर वे उन दिनों को भी गंवा देते हैं जब मार्केट सबसे ज्यादा रिकवरी करता है। इसलिए, निरंतर बने रहना ही समझदारी है।

डायवर्सिफिकेशन की कमी: सारे अंडे एक टोकरी में न रखें

क्या आप अपना सारा पैसा सिर्फ एक ही शेयर, सेक्टर या एक ही एसेट में लगा रहे हैं? यह एक ऐसी गलती है जो बड़े से बड़े पोर्टफोलियो को भी संकट में डाल सकती है। ‘सारे अंडे एक ही टोकरी में रखना’ निवेश का सबसे बड़ा पाप माना जाता है। यदि वह एक सेक्टर या कंपनी खराब प्रदर्शन करती है, तो आपकी पूरी पूंजी खतरे में पड़ सकती है।

एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि आप अपने पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन लाएं। उदाहरण के लिए, एक सामान्य नियम “70/30 नियम” का पालन किया जा सकता है, जिसमें 70% पैसा इक्विटी (स्टॉक्स) में और 30% बॉन्ड या फिक्स्ड इनकम में लगाया जाता है। यह मार्केट की वोलैटिलिटी को संतुलित करने में मदद करता है। इसके अलावा, एक सख्त नियम यह भी है कि किसी भी एक स्टॉक में अपने कुल पोर्टफोलियो का 5-10% से अधिक हिस्सा न लगाएं। यह रणनीति जोखिम को सीमित करती है और आपको किसी एक कंपनी के डूबने पर बड़े नुकसान से बचाती है।

महंगाई के प्रभाव को नजरअंदाज करना

कई निवेशक अपने रिटर्न को केवल निरपेक्ष (Absolute) रूप में देखते हैं और महंगाई के असर को भूल जाते हैं। यह एक ‘साइलेंट किलर’ है जो धीरे-धीरे आपकी क्रय शक्ति (Purchasing Power) को खत्म कर देता है। मान लीजिए आपने कुछ पैसा बचाया है, लेकिन अगर आपका रिटर्न महंगाई दर से कम है, तो असल में आप पैसा गंवा रहे हैं।

इसे एक उदाहरण से समझते हैं: यदि आज आपके पास ₹100 है और अगले एक वर्ष में महंगाई दर 10% रहती है, तो अगले साल उसी सामान को खरीदने के लिए आपको ₹110 की आवश्यकता होगी। इसका मतलब है कि आपके ₹100 की वैल्यू अब 10% कम हो गयी है। इसलिए, निवेश करते समय हमेशा ‘रियल रिटर्न’ (Real Return) पर ध्यान दें, यानी वह रिटर्न जो महंगाई को मात देने के बाद बचता है। केवल सुरक्षित दिखने वाले विकल्पों में पैसा रखना, जो महंगाई से कम ब्याज देते हैं, लंबी अवधि में नुकसानदेह हो सकता है।

स्पष्ट वित्तीय लक्ष्यों का अभाव

बिना लक्ष्य के निवेश करना बिना मैप के यात्रा करने जैसा है। आप कहीं तो पहुंचेंगे, लेकिन शायद वहां नहीं जहां आप जाना चाहते थे। कुछ निवेशक, विशेषकर शुरुआती दौर में, केवल टैक्स बचाने या दोस्तों की देखा-देखी निवेश शुरू कर देते हैं। उनके पास कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं होता कि उन्हें भविष्य में कितने पैसे चाहिए।

कंपाउंडिंग की ताकत का फायदा उठाने के लिए लक्ष्य निर्धारित करना और जल्दी शुरुआत करना बेहद जरूरी है। डेटा के अनुसार, यदि आप हर महीने ₹10,000 का निवेश करते हैं और आपको उस पर 12% का सालाना रिटर्न मिलता है, तो 20 वर्षों में आपका निवेश ₹1 करोड़ से अधिक हो सकता है। यह आंकड़ा यह साबित करता है कि धैर्य और अनुशासन के साथ किया गया छोटा निवेश भी समय के साथ विशाल बन सकता है। इसलिए, अपनी रिटायरमेंट, बच्चों की शिक्षा या घर खरीदने जैसे लक्ष्यों को पहचानें और उसी के अनुसार निवेश करें।

बीते कल के प्रदर्शन और जल्द मुनाफे के पीछे भागना

अक्सर निवेशक उन फंड्स या स्टॉक्स के पीछे भागते हैं जिन्होंने पिछले साल सबसे ज्यादा रिटर्न दिया हो। इसे ‘रीसेंसी बायस’ (Recency Bias) कहा जाता है। लेकिन जो कल ऊपर था, वह कल भी ऊपर रहेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

साल 2025 का उदाहरण लें, जहां निफ्टी और सेंसेक्स ने साल का अंत क्रमशः 8.18% और 8.89% की बढ़त के साथ किया। ऊपरी तौर पर यह अच्छा लग सकता है, लेकिन गहराई में जाने पर पता चलता है कि कई इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम्स खासकर स्मॉल-कैप और मिड-कैप ने नकारात्मक रिटर्न दिया। हालांकि स्मॉल-कैप स्टॉक्स ऐतिहासिक रूप से लगभग 18.7% का औसत रिटर्न देते हैं (जो कि बड़ी कंपनियों के 12.4% से अधिक है), लेकिन उनमें जोखिम और अस्थिरता भी उतनी ही ज्यादा होती है।

सिर्फ पिछले प्रदर्शन को देखकर निवेश करना या रातों-रात अमीर बनने की चाहत में जल्दबाजी करना नुकसान का सौदा हो सकता है। एक अनुशासित निवेशक हमेशा फंडामेंटल्स पर ध्यान देता है, न कि केवल पिछले साल के चार्ट पर।

निष्कर्ष

निवेश एक मैराथन है, स्प्रिंट नहीं। नए साल में इन गलतियों से बचकर आप अपनी वित्तीय यात्रा को सुरक्षित और सफल बना सकते हैं। मार्केट को टाइम करने के बजाय उसमें बने रहें, अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करें, महंगाई को ध्यान में रखें और स्पष्ट लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ें। याद रखें, एक प्रो निवेशक वह नहीं जो हर बार सही होता है, बल्कि वह है जो गलतियों से सीखता है और अपनी योजना पर टिका रहता है।

*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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