RBI मॉनेटरी पॉलिसी: महत्वपूर्ण अपडेट्स पर एक नजर

RBI मॉनेटरी पॉलिसी
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने अक्टूबर 2024 की बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया। यह फैसला तब लिया गया जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने हाल ही में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है। इतना ही नहीं, RBI ने अपने नीतिगत रुख को ‘विथड्रॉवल ऑफ अकोमोडेशन’ से बदलकर ‘न्यूट्रल’ किया है। इस स्थिरता को बनाए रखने का उद्देश्य है, देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखना और भविष्य में किसी भी अनिश्चितता का प्रभावी ढंग से सामना करना।

विकास दर के सकारात्मक संकेत

RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य को लेकर कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े प्रस्तुत किए हैं, जो इस प्रकार है:

  • FY25 (अनुमान): 7.2%
  • Q2FY25: 7.0%
  • Q3FY25: 7.4%
  • Q4FY25: 7.4%
  • Q1FY26: 7.3%

यह अनुमान दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर गति से आगे बढ़ रही है, और अगले कुछ वर्षों में इसमें सुधार की संभावना बनी हुई है।

भारतीय बॉन्ड यील्ड में नरमी

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि पॉलिसी रुख में बदलाव के बाद भारतीय बॉन्ड यील्ड में नरमी देखी गई है। 10-वर्षीय बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड में 5 बेसिस प्वाइंट की गिरावट आई है, जिससे यह 6.7434% पर आ गया है। यह स्थिरता से जुड़ी नीतियों का एक सकारात्मक संकेत है।

महंगाई के अनुमान

गवर्नर शक्तिकांत दास के अनुसार, मौजूदा फिस्कल ईयर की तीसरी तिमाही में महंगाई 4.8% तक बढ़ सकती है। इसके साथ ही उन्होंने अगले कुछ तिमाही के लिए महंगाई के अनुमान की भी बात की है।

  • FY25: 4.5%
  • Q2: 4.1%
  • Q3: 4.8%
  • Q4: 4.2%
  • Q1FY26: 4.3%

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि निकट भविष्य में महंगाई में कुछ वृद्धि हो सकती है, लेकिन यह अनुमानित दायरे में ही है, जो अर्थव्यवस्था के लिए संतुलित रहेगा।

करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) और निवेश

भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) पहली तिमाही में GDP का 1.1% हो गया है। हालांकि, सर्विस निर्यात और मजबूत FDI फ्लो इसे संतुलित बनाए रखेंगे। वहीं, बाहरी कमर्शियल उधारी में कमी आई है, लेकिन नॉन-रेजिडेंस डिपॉजिट्स (NRD) में पिछले साल की तुलना में अधिक फ्लो देखा गया है।

निष्कर्ष

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी में स्थिरता, बॉन्ड यील्ड में गिरावट, और CAD की संतुलित स्थिति दर्शाती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हैं। महंगाई के अनुमान के साथ-साथ रुपये की स्थिरता दर्शाती है कि देश की अर्थव्यवस्था संतुलित स्थिति में है। आने वाले समय में इन नीतियों से मार्केट में स्थिरता और विकास की संभावना बनी रहेगी।

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*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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