भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने हाल ही में रिटेल निवेशकों के लिए एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग (एल्गो ट्रेडिंग) में सुरक्षित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। यह कदम रिटेल निवेशकों को एल्गो ट्रेडिंग की सुविधा प्रदान करने के साथ-साथ मार्केट की अखंडता और निवेशकों के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से उठाया गया है। SEBI का यह निर्णय 4 फरवरी, 2025 को जारी एक सर्कुलर के माध्यम से सामने आया है।
आइए समझते है कि सेबी का यह नया सर्कुलर क्या है और रिटेल निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है।
एल्गो ट्रेडिंग क्या है?
एल्गो ट्रेडिंग एक ऑटोमेटेड ट्रेडिंग सिस्टम है जो पहले से निर्धारित नियमों और एल्गोरिथम के आधार पर ऑर्डर को एक्जीक्यूट करता है। यह तकनीक संस्थागत निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय है, लेकिन अब रिटेल निवेशक भी इसकी ओर काफी आकर्षित हो रहे हैं। एल्गो ट्रेडिंग का मुख्य फायदा यह है कि यह समयबद्ध और प्रोग्राम्ड ऑर्डर एक्जीक्यूशन की सुविधा प्रदान करता है यानि इसमें आपको मैन्युअल ऑर्डर प्लेस करने की आवश्यकता नहीं होती है।
नए नियमों की आवश्यकता क्यों पड़ी?
SEBI ने 30 मार्च, 2012 को एल्गो ट्रेडिंग के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी किए थे, जिसके बाद से इस क्षेत्र में नियमित सुधार किए जा रहे हैं। 9 दिसंबर, 2021 को SEBI ने ‘रिटेल निवेशकों द्वारा एल्गो ट्रेडिंग’ पर एक चर्चा पत्र जारी किया, जिसमें API एक्सेस और ट्रेड्स के ऑटोमेशन के उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई।
FY24 में, F&O सेगमेंट में 97% FPI मुनाफा और 96% प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग मुनाफा एल्गो ट्रेडिंग से आया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि एल्गो ट्रेडिंग मार्केट में कितनी प्रभावी है। SEBI के नए निर्णय से रिटेल निवेशकों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं।
नए नियमों की मुख्य विशेषताएं
1. एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) का उपयोग
SEBI ने एल्गो ट्रेडिंग के लिए API के उपयोग को लेकर कड़े नियम तय किए हैं। जिनके तहत, ब्रोकर्स को API के माध्यम से एल्गो ट्रेडिंग की सुविधा प्रदान करनी होगी, और एल्गो प्रोवाइडर्स को ब्रोकर के एजेंट के रूप में काम करना होगा। साथ ही, सभी एल्गो ऑर्डर्स को स्टॉक एक्सचेंज द्वारा प्रदान किए गए एक यूनिक आइडेंटिफायर के साथ टैग किया जाएगा। इसके अलावा, टेक-सेवी रिटेल निवेशकों द्वारा विकसित एल्गोरिथम को भी एक्सचेंज के साथ पंजीकृत करना होगा, यदि वह प्रति सेकंड निर्धारित ऑर्डर थ्रेशोल्ड को पार करते हैं।
2. ब्रोकर्स की भूमिका और जिम्मेदारियां
ब्रोकर्स को एल्गो ट्रेडिंग की सुविधा प्रदान करने से पहले स्टॉक एक्सचेंज से आवश्यक अनुमति लेनी होगी और सभी एल्गो ऑर्डर्स को यूनिक आइडेंटिफायर के साथ टैग किया जाएगा, साथ ही, किसी भी बदलाव के लिए एक्सचेंज से अनुमति लेनी होगी। ब्रोकर्स को निवेशकों की शिकायतों को संभालने और API की निगरानी करने की जिम्मेदारी भी दी गई है।
3. एल्गो प्रोवाइडर्स का पंजीकरण और निगरानी
एल्गो प्रोवाइडर्स को SEBI द्वारा विनियमित नहीं किया जाएगा, लेकिन बेहतर निगरानी के लिए उन्हें स्टॉक एक्सचेंज के साथ पंजीकृत होना होगा। एक्सचेंज एल्गो प्रोवाइडर्स के लिए पंजीकरण मानदंड तय करेंगे, और ब्रोकर्स को एल्गो प्रोवाइडर्स का ड्यू डिलिजेंस करना होगा।
4. एक्सचेंज की भूमिका
स्टॉक एक्सचेंज एल्गो ट्रेडिंग की निगरानी के लिए जिम्मेदार होंगे। उन्हें एल्गोरिथम के परीक्षण के लिए एक व्यापक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करना होगा और सभी एल्गो ऑर्डर्स पर नजर रखनी होगी। एक्सचेंज को किल स्विच का उपयोग करने की क्षमता भी बनाए रखनी होगी, जो किसी भी एल्गो आईडी से उत्पन्न ऑर्डर्स को रोक सकता है।
5. एल्गोरिथम का वर्गीकरण
एल्गोरिथम को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा: व्हाइट बॉक्स एल्गोरिथम और ब्लैक बॉक्स एल्गोरिथम। व्हाइट बॉक्स एल्गोरिथम वह हैं जिनकी लॉजिक उपयोगकर्ता को ज्ञात होती है, जबकि ब्लैक बॉक्स एल्गोरिथम की लॉजिक उपयोगकर्ता को ज्ञात नहीं होती। ब्लैक बॉक्स एल्गोरिथम के मामले में, एल्गो प्रोवाइडर्स को रिसर्च एनालिस्ट के रूप में पंजीकृत होना होगा और प्रत्येक एल्गो के लिए एक विस्तृत रिसर्च रिपोर्ट बनाए रखनी होगी।
भविष्य की बातें
SEBI ने इन नियमों को 1 अगस्त, 2025 से लागू करने का निर्णय लिया है। ब्रोकर्स इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स फोरम को 1 अप्रैल, 2025 तक कार्यान्वयन मानक तैयार करने होंगे। स्टॉक एक्सचेंज को इन प्रावधानों को लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाने और अपने ब्रोकर्स को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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