23 सितम्बर 2024 में सेबी की ओर से एक स्टडी जारी की गयी थी, जिसमें कहा गया कि FY24 में फ्यूचर & ऑप्शंस सेगमेंट में 10 में से 9 डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स ने अपना पैसा गवांया है। इसी को ध्यान में रखते हुए है सेबी ने 01 अक्टूबर 2024 में सर्कुलर जारी किया है जिसमें डेरिवेटिव्स को लेकर कई बदलाव किए गए है।
यह बदलाव निवेशकों की सुरक्षा को बढ़ाने और मार्केट की स्थिरता को बनाए रखने के उद्देश्य से किए गए हैं। आइए इन महत्वपूर्ण बदलावों पर विस्तार से चर्चा करें।
डेरिवेटिव्स मार्केट में बदलाव
डेरिवेटिव्स मार्केट लिक्विडिटी को बेहतर बनाता है और निवेशकों को अपने जोखिम को प्रभावी ढंग से मैनेज करने का अवसर भी प्रदान करता है। हालांकि, हाल के वर्षों में डेरिवेटिव्स मार्केट में रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, शॉर्ट टेन्योर इंडेक्स ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स की पेशकश, और एक्सपायरी डे पर सट्टेबाजी के बढ़ते वॉल्यूम ने डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में नुकसान करने वाले ट्रेडर्स की संख्या को बढ़ाने में अहम भूमिका निभायी है।
इसलिए, SEBI ने एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप (EWG) का गठन किया, जिसने निवेशक सुरक्षा और मार्केट वोलैटिलिटी के लिए कुछ उपायों की सिफारिश की। इन सिफारिशों के आधार पर जुलाई 2024 में एक परामर्श पत्र भी जारी किया गया और विचार-विमर्श के बाद, 01 अक्टूबर 2024 को डेरिवेटिव्स मार्केट में निम्न 6 बदलाव पेश किए गए है।

यह नए नियम डेरिवेटिव्स मार्केट में ट्रेडर्स को अनावश्यक जोखिम लेने से रोकने में सहायक हो सकते है।
1. ऑप्शन खरीदारों से प्रीमियम की एडवांस वसूली
ऑप्शंस बहुत ही वोलेटाइल होते है जिनमें कम समय में ही अत्यधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिलता हैं और इनमें उच्चतम लीवरेज होता है। इसलिए, सेबी ने अब यह अनिवार्य कर दिया है कि ट्रेडिंग सदस्य और क्लियरिंग सदस्य ऑप्शन खरीदारों से एडवांस प्रीमियम की वसूली करें। इसका उद्देश्य किसी भी अनावश्यक इंट्राडे लीवरेज को रोकना है, ताकि निवेशक अपनी जमाराशि से अधिक जोखिम न लें। यह प्रावधान 1 फरवरी 2025 से लागू होगा।
2. एक्सपायरी डे पर कैलेंडर स्प्रेड बेनिफिट्स हटेंगे
कैलेंडर स्प्रेड, जिसमें एक ही अंडरलाइनिंग पर अलग-अलग एक्सपायरी के कॉन्ट्रैक्ट्स होते हैं, लेकिन, सेबी ने देखा है कि जब ये कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने वाले होते हैं, तो इन स्प्रेड से जोखिम बहुत बढ़ जाता है और कॉन्ट्रैक्ट की वैल्यू तेजी से ऊपर-नीचे होती हैं। इसलिए, सेबी ने तय किया है कि जब ये कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने वाले हों, तो कैलेंडर स्प्रेड का फायदा नहीं मिलेगा। इससे ट्रेडर्स को ज्यादा सुरक्षा मिलेगी और जोखिम कम होगा। यह बदलाव उन ट्रेडर्स को प्रभावित करेगा जो मार्जिन कम करने के लिए कैलेंडर स्प्रेड का उपयोग करते थे। यह नया नियम 1 फरवरी 2025 से प्रभावी होगा।
3. इंट्राडे पोजीशन लिमिट्स की मॉनिटरिंग
स्टॉक मार्केट में इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान पोजीशन लिमिट्स का उल्लंघन न हो, इसके लिए स्टॉक एक्सचेंज जैसे कि NSE और BSE आदि को दिन में कम से कम चार बार पोजीशन स्नैपशॉट्स लेने होंगे। इस नए नियम से ट्रेडिंग के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले ट्रेडर्स पर बेहतर निगरानी रखी जाएगी और यह प्रावधान 1 अप्रैल 2025 से लागू होगा।
4. इंडेक्स डेरिवेटिव्स का कॉन्ट्रैक्ट साइज में बदलाव
अगर हम अभी की बात करें तो इंडेक्स डेरिवेटिव्स का मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट साइज ₹5 लाख से ₹10 लाख के बीच है, हालांकि इस नए प्रावधान के बाद कॉन्ट्रैक्ट साइज बढ़ाकर ₹15 लाख से ₹20 लाख किया जाएगा। सेबी का कहना है कि इसका उद्देश्य निवेशकों के लिए उचित और सुरक्षित निवेश विकल्प सुनिश्चित करना है। यह प्रावधान 20 नवंबर 2024 से प्रभावी होगा।
5. साप्ताहिक इंडेक्स डेरिवेटिव्स प्रोडक्ट्स का पुनर्संगठन
वर्तमान समय सप्ताह के पांचों ट्रेडिंग दिनों में रोज किसी न किसी इंडेक्स की एक्सपायरी रही ही है जिससे इंडेक्स ऑप्शंस की अत्यधिक ट्रेडिंग होती है और मार्केट में वोलैटिलिटी बढ़ती है। इसे नियंत्रित करने के लिए सेबी ने कहा है कि अब प्रत्येक एक्सचेंज केवल एक बेंचमार्क इंडेक्स पर साप्ताहिक डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट प्रदान करेगा। यह बदलाव 20 नवंबर 2024 से लागू होगा।
6. एक्सपायरी डे पर टेल रिस्क कवरेज में वृद्धि
स्टॉक मार्केट में ऑप्शंस के एक्सपायरी दिन पर बढ़ी हुई सट्टेबाजी गतिविधियों के कारण जोखिम भी बढ़ता है। इस जोखिम को कवर करने के लिए, सेबी ने एक्सपायरी दिन पर सभी शॉर्ट ऑप्शंस पर अतिरिक्त 2% एक्सट्रीम लॉस मार्जिन (ELM) लगाने का निर्णय लिया है। यह प्रावधान 20 नवंबर 2024 से प्रभावी होगा।
निष्कर्ष
सेबी द्वारा किए गए यह बदलाव डेरिवेटिव्स मार्केट में निवेशकों की सुरक्षा को मजबूत करेंगे और मार्केट की स्थिरता को बनाए रखने में सहायक होंगे। हालांकि ऑप्शन ट्रेडर्स को यह नियम लागू होने के बाद लगभग दो से तीन गुना मार्जिन ज्यादा देना होगा। यह सुधार निवेशकों के हितों की रक्षा करने और मार्केट में अनावश्यक जोखिम को कम करने के उद्देश्य से किए गए हैं, जिससे डेरिवेटिव्स मार्केट में छोटे कैपिटल के साथ ट्रेड करने वाले ट्रेडर्स की भागीदारी कम हो जाएगी।
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*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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