अधिकतर लोग अपनी क्रेडिट रिपोर्ट देखते समय केवल तीन अंकों वाले क्रेडिट स्कोर पर ध्यान देते हैं। स्कोर अच्छा दिखाई दे तो वे रिपोर्ट को बंद कर देते हैं और कम होने पर चिंतित हो जाते हैं। लेकिन किसी बैंक, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन या दूसरे मूल्यांकनकर्ता के लिए केवल स्कोर ही महत्वपूर्ण नहीं होता। उसके पीछे मौजूद पूरी क्रेडिट रिपोर्ट व्यक्ति की कई वर्षों की बॉरोइंग और रीपेमेंट आदतों का विस्तृत रिकॉर्ड प्रस्तुत करती है।
इस रिपोर्ट में पर्सनल डिटेल्स, एक्टिव और क्लोज्ड लोन, क्रेडिट कार्ड अकाउंट्स, सैंक्शन्ड अमाउंट, आउटस्टैंडिंग बैलेंस, पेमेंट हिस्ट्री और क्रेडिट इन्क्वायरीज जैसी जानकारियां शामिल होती हैं। इसलिए क्रेडिट रिपोर्ट केवल यह नहीं बताती कि आपका स्कोर कितना है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आपने समय के साथ अपने कर्ज और वित्तीय जिम्मेदारियों को किस प्रकार संभाला है।
क्रेडिट रिपोर्ट में किन जानकारियों पर ध्यान देना चाहिए?
क्रेडिट रिपोर्ट का पहला हिस्सा आपकी पहचान से संबंधित होता है। इसमें नाम, जन्मतिथि, PAN, आधार से जुड़ी जानकारी, पता और कॉन्टैक्ट डिटेल्स दर्ज हो सकती हैं। इनमें छोटी गलती भी भविष्य में लोन एप्लिकेशन या वेरिफिकेशन के दौरान परेशानी पैदा कर सकती है।
इसके बाद लोन और क्रेडिट कार्ड सेक्शन आता है, जिस पर लेंडर्स सबसे अधिक ध्यान देते हैं। इसमें प्रत्येक एक्टिव और क्लोज्ड अकाउंट के साथ सैंक्शन्ड अमाउंट, बकाया राशि और रीपेमेंट स्टेटस दिखाई देता है। यदि किसी ऐसे लोन का उल्लेख हो जो आपने कभी लिया ही नहीं, या बंद किया गया अकाउंट अब भी एक्टिव दिख रहा हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
रीपेमेंट हिस्ट्री बताती है कि EMI और क्रेडिट कार्ड बिल समय पर चुकाए गए या नहीं। पुराने विलंब का प्रभाव समय के साथ कम हो सकता है, लेकिन हाल के मिस्ड पेमेंट्स लेंडर के लिए जोखिम का संकेत बन सकते हैं। इसी तरह, हर लोन या कार्ड आवेदन पर होने वाली हार्ड इन्क्वायरी रिपोर्ट में दर्ज होती है। एक-दो इन्क्वायरीज सामान्य हैं, लेकिन कम समय में कई आवेदन यह संकेत दे सकते हैं कि व्यक्ति को तत्काल अधिक क्रेडिट की जरूरत है।
परवरिश और स्थान से भी जुड़ सकती हैं वित्तीय आदतें
हार्वर्ड के Opportunity Insights की रिसर्च बताती है कि क्रेडिट व्यवहार केवल मौजूदा आय या व्यक्तिगत फैसलों से नहीं, बल्कि व्यक्ति की परवरिश और आसपास के सामाजिक माहौल से भी प्रभावित हो सकता है। 2.5 करोड़ से अधिक अमेरिकियों के सैंपल पर आधारित अध्ययन में पाया गया कि रीपेमेंट की आदतों में अंतर शुरुआती वयस्कता तक दिखाई देने लगता है और लंबे समय तक बना रह सकता है।
25 वर्ष की उम्र में सबसे कम आय वाले 20% परिवारों से आने वाले लोगों का औसत क्रेडिट स्कोर 615 था, जबकि सबसे अधिक आय वाले 20% परिवारों से आने वालों का औसत 725 था। इसी उम्र में अश्वेत अमेरिकियों का औसत स्कोर श्वेत अमेरिकियों से लगभग 100 अंक और एशियाई अमेरिकियों से 140 अंक कम पाया गया। आय को नियंत्रित करने के बाद भी सबसे कम पैरेंटल इनकम वाले 25% ग्रुप में अश्वेत और श्वेत व्यक्तियों के बीच 69 अंकों का अंतर बना रहा।
भौगोलिक अंतर भी स्पष्ट थे। न्यू जर्सी के Bergen County में औसत स्कोर 724 था, जबकि Baltimore का औसत लगभग 100 अंक कम था। कम आय वाले परिवारों पर किए गए विश्लेषण में Brooklyn का औसत 719 और Indianapolis क्षेत्र का 629 पाया गया। रिसर्च के अनुसार बचपन में स्थान बदलने वाले बच्चों में नए समुदाय की रीपेमेंट आदतों का प्रभाव अधिक देखा गया।
लोन से आगे नौकरी तक पहुंचा क्रेडिट स्कोर
क्रेडिट स्कोर मूल रूप से बैंक्स और NBFCs के लिए किसी व्यक्ति की क्रेडिटवर्दीनेस तथा डिफॉल्ट रिस्क का आकलन करने हेतु बनाया गया था। लेकिन अब कुछ कंपनियां, विशेषकर बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में, इसे हायरिंग प्रक्रिया का हिस्सा बनाने लगी हैं।
NDTV Profit में दिए गए एक मामले के अनुसार खराब क्रेडिट स्कोर के कारण एक उम्मीदवार ने सालाना ₹25 लाख का जॉब ऑफर गंवा दिया। कुछ नियोक्ताओं का मानना है कि पैसा, पेमेंट प्रोसेसिंग या संवेदनशील वित्तीय जानकारी संभालने वाले पदों पर उम्मीदवार का क्रेडिट रिकॉर्ड जोखिम का संकेत दे सकता है। बैकग्राउंड वेरिफिकेशन में तीन से चार महीने लग सकते हैं, जबकि क्रेडिट स्कोर एक तेज फिल्टर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि खराब स्कोर नौकरी में व्यक्ति की योग्यता, ईमानदारी या प्रदर्शन को साबित नहीं करता। भारी लोन पारिवारिक जरूरत के कारण भी लिया गया हो सकता है। भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023, के अनुसार क्रेडिट स्कोर जैसी प्राइवेट जानकारी लेने के लिए उम्मीदवार की स्पष्ट सहमति आवश्यक है और डेटा का उपयोग निर्धारित उद्देश्य तक सीमित होना चाहिए।
निष्कर्ष
क्रेडिट रिपोर्ट अब केवल लोन पाने का दस्तावेज नहीं रह गई है। यह आपकी पहचान, कर्ज, रीपेमेंट अनुशासन, क्रेडिट की जरूरत और कई वर्षों के वित्तीय व्यवहार का रिकॉर्ड है। कुछ मामलों में इसका प्रभाव लोन की ब्याज दर से आगे बढ़कर नौकरी, किराये के घर और अन्य अवसरों तक पहुंच सकता है। इसलिए केवल स्कोर देखना पर्याप्त नहीं है। रिपोर्ट की नियमित जांच, गलतियों का तत्काल करेक्शन और अनावश्यक क्रेडिट आवेदनों से बचना व्यक्ति की पूरी वित्तीय प्रोफाइल को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी बन गया है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।