भारतीय शेयर मार्केट में विदेशी निवेशकों (FII) द्वारा की जा रही भारी बिकवाली निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। हाल के महीनों में FII ने भारतीय शेयर मार्केट से भारी मात्रा में पैसा निकाला है, जिससे मार्केट में वोलैटिलिटी बढ़ गई है।
यह बिकवाली न केवल सेंसेक्स और निफ्टी को प्रभावित कर रही है, बल्कि इससे विभिन्न सेक्टर्स के साथ-साथ स्मॉलकैप और मिडकैप पर भी दबाव बढ़ा है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि विदेशी निवेशक क्यों पैसा निकाल रहे हैं और इसका भारतीय मार्केट पर क्या असर पड़ रहा है।
क्या है मामला?
अक्टूबर 2024 से अब तक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर मार्केट से लगभग 2.81 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की है। यह पिछले 10 वर्षों में दूसरी सबसे बड़ी बिकवाली है, जिसका मार्केट प्रदर्शन पर गहरा असर पड़ा है। पिछले एक दशक में, कई बार ऐसा हुआ है जब FPI ने लगातार तीन महीने या उससे अधिक समय तक बिकवाली जारी रखी है।
इस बिकवाली के चलते भारतीय मार्केट में गिरावट देखने को मिली है और निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ गई है। हालांकि, डोमेस्टिक निवेशकों की भागीदारी ने कुछ हद तक इस प्रभाव को कम किया है, लेकिन विदेशी निवेशकों का लगातार पैसा निकालना मार्केट के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
विदेशी निवेशक क्यों बिकवाली कर रहे हैं?
विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली के पीछे कई ग्लोबल और डोमेस्टिक कारण हैं:
ग्लोबल मार्केट्स का असर: हालिया बिकवाली की शुरुआत वॉल स्ट्रीट में गिरावट से हुई, लेकिन विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) का पलायन सितंबर 2024 से ही जारी है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और डॉलर के मजबूत होने ने इस ट्रेंड को और बढ़ावा दिया है।
हायर वैल्यूएशन: भारतीय शेयर मार्केट का वैल्यूएशन अन्य एशियाई मार्केट्स की तुलना में काफी हाई है। निफ्टी 50 इंडेक्स अपने एक साल के फॉरवर्ड ईयरनिंग्स के 19x पर ट्रेडिंग कर रहा है, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 9.2x और चीन का शंघाई कंपोजिट 12x पर है। यह भारतीय शेयर्स को महंगा बनाता है।
आगामी IPO लॉक-इन अवधि: हाल के IPO में आवंटित 26 अरब डॉलर के शेयर्स की लॉक-इन अवधि आने वाले महीनों में खत्म होगी। इसमें हेक्सावेयर टेक, डॉ अग्रवाल हेल्थकेयर, एजेक्स इंजीनियरिंग, और प्रीमियर एनर्जीज जैसे शेयर शामिल हैं।
भारतीय मार्केट पर असर
निफ्टी 50 और सेंसेक्स अपने हालिया ऑल टाइम स्तर से 15% से अधिक गिर चुके हैं और 2025 में अब तक FIIs द्वारा 1.5 लाख करोड़ से अधिक की बिकवाली हो चुकी हैं। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब FIIs बिकवाली कर रहे है क्योंकि यह सिलसिला 2021 से चल रहा है जिसे आप नीचे ग्राफ से समझ सकते है।

इसके साथ ही, अगर हम सिर्फ फरवरी 2025 की बात करें तो, सेंसेक्स 5.6% और निफ्टी 5.9% तक गिर गए, जबकि व्यापक मार्केट को और भी बड़ा झटका लगा। BSE मिडकैप 10.5% और स्मॉलकैप इंडेक्स 14% तक गिर गए है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने मार्केट को वोलेटाइल बना दिया है, लेकिन यह स्थिति लंबी अवधि के निवेशकों के लिए भी एक अवसर है, क्योंकि इस समय अच्छे फंडामेंटल वाले स्टॉक्स भी अच्छे वैल्यूएशन पर मिल सकते है। भारतीय अर्थव्यवस्था की फंडामेंटल स्थिति मजबूत बनी हुई है, और कॉर्पोरेट अर्निंग्स में सुधार से मार्केट में स्थिरता लौट सकती है। हालांकि, निवेशकों को इस दौरान सतर्क रहने और सही स्टॉक्स को अपने पोर्टफोलियो में शामिल करने पर ध्यान देना चाहिए।
भविष्य की बातें
मनी कंट्रोल के अनुसार, निवेशक FII की वापसी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स की राय अलग-अलग है। कुछ का मानना है कि अमेरिका और चीन जैसे मार्केट अधिक आकर्षक बने हुए हैं, जबकि भारत में कमजोर कॉरपोरेट अर्निंग्स के कारण निकट भविष्य में FII फ्लो सीमित रह सकता है, भले ही वैल्यूएशन में करेक्शन हुआ हो।
दूसरी ओर, कुछ एनालिस्ट का मानना है कि FII की बिकवाली मजबूरी में हो रही है और यह मार्केट सेंटीमेंट में किसी बड़े बदलाव का संकेत नहीं है। मनी कंट्रोल के अनुसार, एक्सिस सिक्योरिटीज के एनालिस्ट राजेश पलविया का कहना है कि फरवरी में FII की बिकवाली इसलिए कम दिखी क्योंकि ट्रेडिंग दिन कम थे, न कि बिकवाली की गति धीमी हुई थी। उनका मानना है कि हालिया मार्केट गिरावट के बावजूद FII अपनी बिकवाली के ट्रेंड को बनाए हुए हैं और अभी कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा।
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर