आईए, सीखें कैसे निवेशक इकोनॉमिक इंडीकेटर्स की मदद से अर्थव्यवस्था को समझकर निवेश के लिए बेहतर निर्णय ले सकते है।
स्टॉक मार्केट एक ऐसी जगह है जिसकी मदद से आप अपने फाइनेंशियल लक्ष्यो को पूरा सकते है लेकिन इसके लिए आपको स्टॉक मार्केट और इकोनॉमिक इंडीकेटर्स की समझ होना आवश्यक है। स्टॉक मार्केट की जानकारी आपको निवेश के लिए सही स्टॉक चुनने में मदद करती है जबकि इकोनॉमिक इंडीकेटर्स हमें बताते है कि अर्थव्यवस्था में क्या हो रहा है।
इसलिए इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि इकोनॉमिक इंडीकेटर्स क्या होते है और यह भी जानेंगे कि एक निवेशक के रूप में यह इंडीकेटर्स आपकी कैसे मदद कर सकते है।
चलिए समझते है!
इकोनॉमिक इंडीकेटर क्या है?
इकोनॉमिक इंडीकेटर एक तरह के डेटा को दर्शाते है। यह डेटा आमतौर पर सरकार या गैर-लाभकारी संगठन द्वारा जारी किए जाते है जिसकी मदद से रिसर्च एनालिस्ट अर्थव्यवस्था को समझने का प्रयास करते है। सीधे शब्दों में कहे तो यह इंडीकेटर्स अर्थव्यवस्था की आर्थिक स्थिति को दर्शाते है कि देश की अर्थव्यवस्था कैसे चल रही है।
सिर्फ इतना ही नहीं, इन इकोनॉमिक इंडीकेटर्स का उपयोग निवेशक अपने फाइनेंशियल निर्णय लेने में कर सकते है। इन इकोनॉमिक इंडीकेटर्स में GDP, स्टॉक मार्केट, ब्याज दरें, महंगाई, मार्केट इंडेक्स आदि शामिल है।
अभी तक हम समझ चुके है कि इकोनॉमिक इंडीकेटर्स क्या होते है इसलिए अभी समझते है कि कौन – कौन से इकोनॉमिक इंडीकेटर्स को जानना एक निवेशक के लिए आवश्यक है।
GDP
ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट या GDP देश की आर्थिक स्थिति को दर्शाती है यानि कि अगर हम आसान शब्दों में कहे है तो, अगर किसी देश की GDP बढ़ रही है तो इसका मतलब है उस देश की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है यानि कि देश विकास की ओर बढ़ रहा है।
इसके विपरीत, अगर किसी देश की GDP कम हो रही है तो यह दर्शाती है कि देश की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं चल रही है।
अगर GDP दर बढ़ रही है तो यह निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण इंडिकेटर है क्योंकि यह बताती है कि देश की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है।
स्टॉक मार्केट इंडेक्स
स्टॉक मार्केट इंडेक्स को देखकर आप अंदाजा लगा सकते है कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था कैसी चल रही है। भारतीय स्टॉक मार्केट में दो प्रमुख इंडेक्स – निफ़्टी एंव सेंसेक्स – है जो देश की आर्थिक स्थिति को समझने में मदद करते है।
निफ़्टी 50 एवं सेंसेक्स भारतीय स्टॉक एक्सचेंज द्वारा बनाएं गए इंडेक्स है जिन्हे देश की विभिन्न कंपनियों को मिलकर तैयार किया गया है।
जिस तरह से अभी वर्तमान में सेंसेक्स और निफ़्टी अपने उच्चतम स्तर के आस – पास ट्रेड कर रहे है तो हम कह सकते है कि देश की आर्थिक स्थिति अच्छी है। क्योंकि इकॉनमी सही चल रही हो या खराब दौर से गुजर रही हो, इसका असर स्टॉक मार्केट पर देखने को मिलता है।
ब्याज दरें
हम अपनी फाइनेंशियल जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंक से कर्ज लेते है और बैंक अपने ग्राहकों को कर्ज देने के लिए केंद्रीय बैंक यानि RBI से कर्ज लेती है। जिस तरह हम बैंक को ब्याज देते है ठीक इसी प्रकार बैंको को भी RBI को ब्याज देना पड़ता है।
ब्याज दरे सेंट्रल बैंक द्वारा निर्धारित की जाती है, और आमतौर पर ब्याज दरें इन्फ्लेशन को कंट्रोल करने के लिए बढ़ाई जाती है और विकास को बढ़ावा देने के लिए कम की जाती हैं।
जब भी RBI ब्याज दरों में बदलाव करती है तो इसका असर हमें स्टॉक मार्केट में भी देखने को मिलता है क्योंकि ब्याज दरे कम या ज्यादा होने से बैंक, व्यापार और ग्राहको पर असर पड़ता है।
इन्फ्लेशन
इन्फ्लेशन दर हमें समझने में मदद करती है कि देश में महंगाई बढ़ रही है या कम हो रही है। जब इन्फ्लेशन दर बढ़ती है तब चीज़ों और सेवाओं की कीमतें बढ़ जाती हैं, जिससे अगर हम कोई चीज खरीदना चाहते है तो हमें खरीदारी के लिए ज्यादा पैसे का भुगतान करना होगा। इन्फ्लेशन दर बढ़ने से लोगों की खरीददारी कम हो सकती है जिससे कंपनियों को अधिक मुनाफा कमाने के लिए ज्यादा कीमत पर प्रोडक्शन करना पड़ सकता है। इसलिए बढ़ती इन्फ्लेशन दर अर्थव्यवस्था के लिए सही नहीं मानी जाती है।
नीचे आपकी बेहतर समझ के लिए 2015 से 2022 तक की इन्फ्लेशन दर के जानकारी दी गयी है:

बेरोजगारी दर
किसी देश की रोजगार क्षमता उसकी आर्थिक प्रगति की ओर इशारा करती है इसलिए जब भी बेरोजगारी डेटा जारी किया जाता है तो इसका असर स्टॉक और बॉन्ड मार्केट पर भी देखने को मिलता है।
उदाहरण के लिए, अगर देश में बेरोजगारी बढ़ रही है तो लोग कम खर्च करते है और साथ ही वह लोग निवेश करने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। इसलिए यह स्टॉक मार्केट को प्रभावित करने वाले कारको में से एक है।
निवेशक इकोनॉमिक इंडीकेटर्स का उपयोग कैसे करे?
अभी हमने जाना कि कौन – कौन से इकोनॉमिक इंडिकेटर है जो स्टॉक मार्केट को प्रभावित कर सकते है। लेकिन कहते है न कि जानना और उसे उपयोग में लाना दोनों अलग – अलग चीजे है, इसलिए अभी हम समझते है कि एक निवेशक के रूप में इन इंडीकेटर्स का उपयोग कैसे कर सकते है?
इकोनॉमिक इंडीकेटर्स की समझ: जिस तरह निवेश करने के लिए स्टॉक मार्केट की समझ होना आवश्यक है ठीक उसी प्रकार अगर आप चाहते है कि इकोनॉमिक इंडीकेटर्स आपकी निवेश यात्रा में सहायक हो तो पहले आपको इनके बारे में विस्तारपूर्वक समझना होगा।
लंबी अवधि के लिए निवेश करे: सिर्फ इकोनॉमिक इंडीकेटर्स के आधार पर निवेश निर्णय लेना उचित नहीं होगा, इसलिए लंबी अवधि के लिए निवेश की योजना बनाएं, क्योंकि छोटी अवधि इकोनॉमिक इंडीकेटर्स और अन्य कारणों की वजह से स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव का सिलसिला चलता रहता है।
इसके अलावा, अगर देश की GDP बढ़ रही है तो आप ज्यादा निवेश के बारे में सोच सकते है इसके विपरीत, अगर GDP गिर रही है, महंगाई बढ़ रही है और स्टॉक मार्केट भी ठीक से परफॉर्म नहीं कर रहा है तो आपको निवेश करने के लिए के लिए थोड़ा इंतजार करना चाहिए और इकोनॉमिक इंडीकेटर्स को ट्रैक करते रहना चाहिए।
ध्यान रखें कि इकोनॉमिक इंडीकेटर्स फाइनेंशियल मार्केट में अहम भूमिका निभाते है इसलिए इन्हे समझना किसी भी निवेशक के लिए महत्वपूर्ण है, इन्हे समय-समय पर देखते रहना चाहिए ताकि सही निवेश निर्णय लिया जा सके।
अभी के लिए सिर्फ इतना ही। हमें उम्मीद है कि यह जानकारी आपको रोचक लगी होगी, इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूले।
*आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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