प्रसिद्ध निवेशक वॉरेन बफेट का एक चर्चित कथन है, “एक अच्छी कंपनी को उचित दाम में खरीदना, एक औसत कंपनी को सस्ते दाम में खरीदने से कहीं बेहतर है।”
यही वैल्यू इन्वेस्टिंग का मूल सिद्धांत है। यह रणनीति ऐसी अच्छी कंपनियों को खोजने पर आधारित है, जो अपने वास्तविक वैल्यू से कम प्राइस पर मिल रही हों। वॉरेन बफेट और बेंजामिन ग्राहम इस निवेश दर्शन के प्रतीक माने जाते हैं।
आइए, इन महान निवेशकों द्वारा विकसित वैल्यू इन्वेस्टिंग के मूल सिद्धांतों को गहराई से समझने के लिए निवेश की दुनिया में सफलता प्राप्त करने की यात्रा पर निकलें!
वैल्यू इन्वेस्टिंग के मूल सिद्धांत
जोखिम को समझना
बफेट निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे उन एसेट क्लासेस से दूर रहें जिन्हें वे नहीं समझते हैं। ट्रेंड्स का पीछा करने के बजाय, अपने ज्ञान के क्षेत्रों पर ध्यान दें। बफेट ने खुद एप्पल के बिज़नेस को अच्छी तरह समझने से पहले बर्कशायर हैथवे द्वारा निवेश करने तक टेक्नोलॉजी स्टॉक से दूरी बनाए रखी।
मालिक की मानसिकता अपनाना
स्टॉक में निवेश करना किसी व्यवसाय को खरीदने जैसा होना चाहिए, बफेट दशकों तक किसी व्यवसाय के मालिक होने के समान सावधानीपूर्वक जांच पड़ताल (due diligence) और लॉन्गटर्म कमिटमेंट पर जोर देते हैं।
सस्ते स्टॉक के जाल में न फंसें
हालांकि वैल्यू इन्वेस्टिंग की रणनीति शुरू में ग्राहम के सस्ते स्टॉक खोजने के नजरिए से प्रभावित थी, बाद में बफेट ने अपने पार्टनर चार्ली मुंगेर के मार्गदर्शन में कॉम्पिटिटिव एडवांटेज, ग्रोथ पोटेंशियल और ब्रांड वैल्यू वाली कंपनियों पर ध्यान केंद्रित किया।
समय को सहयोगी बनाना
बफेट की सफलता उनके धैर्यपूर्ण दृष्टिकोण से आती है, वे 20 से 30 साल के नजरिए से निवेश को देखते हैं। यह कई निवेशकों के शॉर्टटर्म लक्ष्यों से अलग है, जो चक्रवृद्धि ब्याज की शक्ति का लाभ उठाने से चूक जाते हैं।
सरलता अपनाएं
बफेट सीधे, सरल व्यापार मॉडल वाली कंपनियों में निवेश और आसानी से समझी जा सकने वाली प्रक्रियाओं का उपयोग करने की सलाह देते हैं। जटिलता अक्सर मार्केट की अस्थिरता के दौरान घबराहट पैदा करती है, इसलिए समझने में आसान निवेशों पर टिके रहना महत्वपूर्ण है।
कम वैल्यूएशन वाले स्टॉक की पहचान कैसे करें?
निम्नलिखित मापदंडों को देखकर आप कम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे स्टॉक की पहचान कर सकते हैं:
प्राइस-अर्निंग (PE) रेश्यो – यह रेश्यो किसी कंपनी के शेयर प्राइस की तुलना उसकी अर्निंग पर शेयर (EPS) से करता है। एक हाई PE रेश्यो अधिक वैल्यूएशन का संकेत हो सकता है, जबकि एक कम रेश्यो कम वैल्यूएशन का सुझाव देता है, जो वैल्यू निवेशकों के लिए उपयोगी जानकारी देता है।
PEG रेश्यो – PEG रेश्यो, PE रेश्यो में अर्निंग ग्रोथ को शामिल करके, स्टॉक के वैल्यूएशन का उसकी ग्रोथ संभावनाओं के सापेक्ष मूल्यांकन करता है। आम तौर पर 1 से नीचे का PEG रेश्यो कम वैल्यूएशन माना जाता है, जो केवल PE रेश्यो से परे समग्र दृष्टिकोण प्रदान करता है।
प्राइस-बुक (PB) रेश्यो – किसी कंपनी के मार्केट कैपिटलाइजेशन की तुलना उसकी नेट एसेट वैल्यू से करने पर PB रेश्यो निकलता है। PB रेश्यो यह आकलन करता है कि कोई स्टॉक कम प्राइस पर है या अधिक। 1 से कम का PB रेश्यो अक्सर एक आकर्षक निवेश अवसर का संकेत देता है।
डिविडेंट यील्ड – जो कंपनियां अपने शेयर प्राइस के सापेक्ष अधिक डिविडेंट यील्ड प्रदान करती हैं, वे कम वैल्यूएशन का संकेत हो सकती हैं। यह मीट्रिक उन निवेशकों के लिए विशेष रूप से बेहतर हो सकता है जो अपने निवेश से आय की तलाश में हैं।
निष्कर्ष
वैल्यू इन्वेस्टिंग शेयर बाजार में अवसरों को खोजने का एक आकर्षक तरीका है। हालांकि इन सिद्धांतों को समझना आसान है, लेकिन इनकी असली ताकत तब सामने आती है, जब इन्हें लंबे समय तक लगातार लागू किया जाए। बुनियादी बातों का पालन करने और अच्छी निवेश रणनीतियों का उपयोग करने से, निवेशक संभावित रूप से फाइनेंशियल सफलता की अपनी यात्रा में पर्याप्त लाभ कमा सकते हैं।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर
यह आर्टिकल मुख्य रुप से तेजी मंदी द्वारा द इकोनॉमिक्स टाइम्स के लिए लिखा गया है, जिसे आप नीचे दिए गए लिंक से पढ़ सकते है।