वैल्यू और ग्रोथ इन्वेस्टिंग को समझते हुए अपने फाइनेंशियल लक्ष्यों के लिए आदर्श रणनीति चुनें।
हम सभी के मन में बारगेनिंग के लिए एक सॉफ्ट स्पॉट जरूर होता है। है न? इसलिए हम सेल के दिनों का उत्सुकता से इंतजार करते हैं। यह हमारी मेहनत की कमाई पर ज्यादा मूल्य पाने की खुशी है। लेकिन हमारा एक और पक्ष भी है। वह पक्ष जो उन एक्सक्लूसिव महंगे सामानों में निवेश करने को तैयार है। क्योंकि हमें पता होता है कि समय के साथ उनके वैल्य एप्रिशिएट होगी।
यदि आप इन दो सिनेरियो से रिलेट कर सकते हैं तो आप पहले से ही वैल्यू और ग्रोथ इन्वेस्टिंग के बारे में परिचित हैं। आइए इसे और आसान बनाते हैं।
इस विशाल बाजार में वैल्यू और ग्रोथ इन्वेस्टिंग दोनों के लिए अवसर पैदा होते हैं। यह काफी हद तक हिडन सेल की खोज करने या भविष्य की संग्रहणीय वस्तुओं में निवेश करने जैसा है। ट्रिक इन अवसरों को पहचानने की है जब वे सामने आते हैं।
लेकिन दोनों अप्रोच अपने-अपने अवसरों और चुनौतियों के साथ आते हैं। आपको यह समझना होगा कि कौन सा आपके लिए सही है। और यह सब यह समझने पर निर्भर करता है कि आपके फाइनेंशियल लक्ष्यों और जोखिम उठाने की क्षमता के साथ सबसे अच्छा क्या मेल खाता है।
तो आइए इनसे जुड़े सभी अप्रोच को समझें और अपने लिए एक आइडियल अप्रोच की खोज करें।
आइए शुरू करते हैं।
वैल्यू इन्वेस्टिंग क्या होती है?
वैल्यू इन्वेस्टिंग शेयर बाजार में एक बुद्धिमान खरीदार होने के समान है। यह एक रणनीतिक अप्रोच है जहां आप उन शेयरों की तलाश करते हैं जो सेल पर हैं और वास्तविक मूल्य से कम कीमत पर ट्रेड कर रहे हैं। यह वास्तविक मूल्य ‘स्टॉक का आंतरिक मूल्य’ है।
मुख्य विचार उन शेयरों को चुनना है जिन्हें बाजार ने एक तरह से नजरअंदाज कर दिया है या कम करके आंका है। इसका रिजल्ट सुरक्षा के मार्जिन (स्टॉक के वास्तविक या आंतरिक मूल्य और उसके मौजूदा बाजार मूल्य के बीच का अंतर) के रूप में दिखाई देता है।
इसलिए एक वैल्यू इन्वेस्टर हमेशा शेयर बाजार में छिपे हुए जेम्स को खोजने पर फोकस करेगा। यह शेयर बाजार में सेल के दौरान उस अविश्वसनीय डील की खोज करने जैसा है जिसे अन्य लोग चूक गए होंगे और आप आशा करते हैं कि यह भविष्य में और ज्यादा वैल्यूएबल हो जाएगा। जिससे आपको आपके द्वारा भुगतान की गई राशि से ज्यादा मिलेगा।
लेकिन सवाल यह है कि स्टॉक की वैल्यू कम कैसे हो जाती है और आपको इसका विश्लेषण कैसे करना चाहिए कि बाजार में स्टॉक अंडरवैल्यूड है या खराब प्रदर्शन कर रहा है?
स्टॉक की वैल्यू कम क्यों हो जाती है?
कुछ कारणों से स्टॉक का मूल्य कम हो जाता है। जिस तरह हम सभी अच्छी डील पाने के लिए सेल का इंतजार करते हैं, उसी तरह बाजार में मंदी के दौरान शेयरों पर असर पड़ सकता है क्योंकि निवेशक अर्थव्यवस्था को लेकर सतर्क हो जाते हैं। दूसरा, कंपनी या अर्थव्यवस्था के बारे में नकारात्मक खबरें कीमतों को नीचे धकेल सकती हैं। कभी-कभी किसी कंपनी के भीतर खराब मैनेजमेंट या गिरती बिक्री जैसे मुद्दे निवेशकों का विश्वास खो सकते हैं। जिससे भी स्टॉक की कीमतें कम हो सकती हैं।
वैल्यू इन्वेस्टर लगातार इन कम वैल्यू वाले शेयरों की तलाश करते हैं। उनका मानना होता है कि इन शेयरों में वैल्यू बढ़ने की क्षमता है।
वैल्यू स्टॉक का विश्लेषण कैसे करें?
वैल्यू स्टॉक के विश्लेषण में यह निर्धारित करने के लिए फाइनेंशियल रेश्यो और रणनीतियों का मिश्रण शामिल होता है। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश होती है कि क्या सच में स्टॉक अंडरवैल्यूड है और क्या भविष्य में वह आगे बढ़ने की क्षमता रखते हैं।
1. प्राइस-टू-अर्निंग (PE) रेश्यो
PE (मूल्य-से-आय) रेश्यो एक टूल है जो किसी कंपनी के शेयर प्राइस की तुलना उसकी प्रति शेयर आय (EPS) से करता है। जब PE रेश्यो कम होता है, तो यह सुझाव देता है कि किसी स्टॉक में वैल्यू क्षमता है। हालांकि, एक अन्य पहलू पर विचार किया जाना चाहिए क्योंकि PE रेश्यो कभी-कभी भ्रामक हो सकता है। यदि किसी कंपनी की अर्निंग घटने की संभावना है या यदि कोई ‘वन-टाइम’ असामान्य घटना होती हैं तो वह कमाई को प्रभावित करती हैं। इससे PE रेश्यो कम हो जाता है।
स्पष्ट तस्वीर पाने के लिए किसी कंपनी के PE रेश्यो की उसके इंडस्ट्री के औसत से तुलना करना एक अच्छा विचार है। इससे आपको यह समझने में मदद मिलती है कि किसी कंपनी के शेयर की कीमत उसी इंडस्ट्री में दूसरों के प्रदर्शन से कैसे संबंधित है।
2. प्राइस-टू-बुक (PB) रेश्यो
PB (प्राइस-टू-बुक) रेश्यो किसी स्टॉक की कीमत की तुलना उसके बुक वैल्यू से करता है, जो कि कंपनी की नेट एसेट वैल्यू होती है। जब PB रेश्यो एक से कम होता है, तो यह संकेत देता है कि स्टॉक अंडरवैल्यूड हो सकता है। हालांकि, यह विचार करना महत्वपूर्ण है कि क्या कंपनी की बैलेंस शीट पर लिस्टेड एसेट हाई डेब्ट का नतीजा तो नहीं।
दूसरे शब्दों में कहें तो कम PB रेश्यो वैल्यू का संकेत हो सकता है, लेकिन यह जांचना महत्वपूर्ण है कि क्या कंपनी के एसेट अच्छे फाइनेंशियल हेल्थ द्वारा समर्थित है या केवल हाई डेब्ट से तो बढ़े हुए नहीं है।
3. कम कर्ज
किसी कंपनी के फाइनेंशियल हेल्थ का मूल्यांकन करने के लिए उसके डेब्ट लेवल का आकलन करना महत्वपूर्ण है। हाई डेब्ट लेवल एक जोखिम हो सकता है क्योंकि वे वित्तीय अस्थिरता पैदा कर सकते हैं और फाइनेंशियल दायित्वों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण बना सकते हैं। जब किसी कंपनी पर महत्वपूर्ण ऋण हो, तो उसके लिक्विडिटी रेश्यो की जांच करना भी महत्वपूर्ण है। ये रेश्यो यह निर्धारित करने में मदद करते हैं कि कंपनी के पास अपने शॉर्ट-टर्म डेब्ट और एक्सपेंस को कवर करने के लिए पर्याप्त संपत्ति है या नहीं। कम लिक्विडिटी के साथ हाई डेब्ट संयुक्त रूप से वित्तीय संकट की एक चेतावनी हो सकता है।
4. लगातार कमाई
कोई कंपनी जो लगातार खराब कमाई करती है उसे आम तौर पर अंडरवैल्यूड स्टॉक नहीं माना जाता है। इसलिए वैल्यू का आकलन करते समय कंपनी की कमाई में स्थिरता देखना महत्वपूर्ण है। स्थिर या बढ़ती आय के इतिहास वाली कंपनियों के स्टॉक अक्सर वैल्यू इन्वेस्टर के लिए ज्यादा आकर्षक होते हैं क्योंकि वे मजबूत फाइनेंशियल प्रदर्शन को दर्शाते हैं।
5. मैनेजमेंट क्वालिटी
एक सक्षम और भरोसेमंद मैनेजमेंट टीम को वैल्यूएबल एसेट माना जाता है। हालांकि, मैनेजमेंट क्वालिटी का मूल्यांकन सब्जेक्टिव और चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मैनेजमेंट की क्वालिटी का आकलन करने के लिए शेयरधारकों और जनता के साथ उनके इफेक्टिव कम्युनिकेशन, फाइनेंशियल जानकारी की पारदर्शी रिपोर्टिंग के साथ-साथ विवेकपूर्ण और सफल निर्णय लेने की हिस्ट्री जैसे संकेतक देखें। ये फैक्टर किसी भी कंपनी के नेतृत्व की क्षमता और इंटीग्रिटी को लेकर इनसाइट प्रदान कर सकते हैं।
अब हम अपना फोकस ग्रोथ इन्वेस्टिंग की ओर करते हैं।
ग्रोथ इन्वेस्टिंग क्या होती है?
जब हम ग्रोथ इन्वेस्टिंग के बारे में बात करते हैं, तो यह कुछ विशेष चीज खरीदने जैसा है जो सेल पर नहीं है। यहां जो चीज उसे विशेष बनाती है वह है उसमें मौजूद क्षमता। यहां, निवेशक ऐसी कंपनियों की तलाश करते हैं जिनमें भविष्य में बहुत ज्यादा पैसा और प्रॉफिट बनाने की क्षमता हो।
ये हाई-ग्रोथ कंपनियां अक्सर शो की स्टार होती हैं। उनसे इंडस्ट्री की विशिष्ट दर की तुलना में बेहतर रेवेन्यू ग्रोथ हासिल करने की उम्मीद की जाती है। जिससे वे पोटेंशियल मार्केट में बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्टॉक के रूप में सामने आएंगे।
ग्रोथ स्टॉक्स को क्या बढ़ावा देता है?
ग्रोथ स्टॉक वे कंपनियां होती जो अपनी कमाई में तेजी से और महत्वपूर्ण ग्रोथ का अनुभव करती हैं। इस क्विक ग्रोथ को कई फैक्टर के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। एक सामान्य कारण यह है कि ये कंपनियां नए प्रोडक्ट या सर्विस पर काम करती हैं जो बाजार का ध्यान खींचती हैं। उनकी यूनिक ऑफरिंग की डिमांड के कारण तेजी से विस्तार होता है।
एक अन्य प्रमुख फैक्टर प्रतिस्पर्धात्मक लाभ का होना होता है जो उनके लॉन्ग-टर्म प्रॉफिट और बाजार हिस्सेदारी की सुरक्षा करता है। यह प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त उनके लिए लगातार आगे बढ़ना आसान बनाती है।
इसके अलावा, एक ऐसी इंडस्ट्री का हिस्सा होना जो तेजी से विकास कर रही है, किसी कंपनी की ग्रोथ के लिए कैटेलिस्ट के रूप में काम कर सकता है। जब पूरी इंडस्ट्री का विस्तार हो रहा है, तो यह कंपनी के विकास को भी बढ़ावा दे सकता है।
कंपनियां कभी-कभी न्यू-एज टेक्नोलॉजी और एफिशिएंट प्रक्रियाओं को अपनाकर उत्पादकता और प्रभावशीलता बढ़ाकर ग्रोथ हासिल करती हैं। इससे एफिशिएंसी में सुधार होता है जिससे विकास में तेजी आती है।
ग्रोथ स्टॉक्स का एनालिसिस कैसे करें?
1. प्राइस मल्टीपल और वैल्यूएशन
ग्रोथ स्टॉक में अक्सर एक ही इंडस्ट्री में अपने साथियों की तुलना में ज्यादा प्राइस मल्टीपल और वैल्यूएशन होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि निवेशक भविष्य में बेहतर रिटर्न की उम्मीद के साथ इन शेयरों के लिए प्रीमियम का भुगतान करने को तैयार हैं।
ग्रोथ स्टॉक का मूल्यांकन करते समय प्राइस-टू-अर्निंग (PE) और प्राइस-टू-बुक (PB) रेश्यो की जांच की जानी चाहिए। इसके अलावा आपको इंटरप्राइस वैल्यू टू अर्निंग बिफोर इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन (EV/EBITDA) का भी विश्लेषण करना चाहिए। यह रेश्यो कंपनी के कर्ज पर विचार करते हुए उसके ओवरऑल वैल्यू मूल्य का आकलन करता है और इसकी तुलना उसके EBITDA से करता है, जो ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस का एक माप है। कम EV/EBITDA रेश्यो ज्यादा आकर्षक निवेश अवसर का संकेत देता है।
2. डिविडेंड पॉलिसी
ग्रोथ स्टॉक आमतौर पर अपने शेयरधारकों को डिविडेंड नहीं देते हैं। इसके बजाय, वे अपनी कमाई को वापस कंपनी में निवेश करना पसंद करते हैं। यह रणनीति उनके ग्रोथ-ओरिएंटेड अप्रोच के अनुरूप है। जहां वे विस्तार, इनोवेशन और बिजनेस को बढ़ाने के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए सभी उपलब्ध मुनाफे का उपयोग करते हैं। डिविडेंड का भुगतान करने के बजाय उनका लक्ष्य कंपनी को विकसित करना और वैल्यू बढ़ाना होता है। जिससे भविष्य में संभावित रूप से स्टॉक की कीमतें बढ़ सकती हैं।
3. प्रतिस्पर्धात्मक लाभ और यूनिक सेलिंग प्रोपोजिशन (USP)
ग्रोथ स्टॉक का विश्लेषण करने के दौरान प्रमुख फैक्टर में से एक उनके प्रतिस्पर्धी लाभ और यूनिक सेलिंग प्रोपोजिशन (USP) की पहचान करना है। इन कंपनियों के पास अक्सर कुछ खास होता है जो उन्हें अपने इंडस्ट्री में अलग करता है। यह अत्याधुनिक तकनीक, यूनिक प्रोडक्ट, असाधारण ब्रांडिंग या बाजार के लिए एक रिवॉल्यूशनरी अप्रोच हो सकता है।
यह प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त उन्हें अपने इंडस्ट्री की अन्य कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन करने और बेहतर सेल्स और ग्रोथ हासिल करने में मदद कर सकती है। इस तरह के एडवांटेड से एक लॉयल और विस्तारित कस्टमर बेस तैयार हो सकता है।
आपके लिए कौन सी रणनीति सही होगी?
वैल्यू और ग्रोथ इन्वेस्टिंग के बीच आपकी च्वाइस आपके लक्ष्यों और जोखिम सहनशीलता पर निर्भर करती है।
वैल्यू इन्वेस्टिंग सतर्क निवेशकों के लिए है जो कैपिटल के संरक्षण को प्राथमिकता देते हैं और अंडरवैल्यूड शेयरों से धीमा लेकिन ज्यादा कंसिस्टेंट रिटर्न चाहते हैं।
ग्रोथ इन्वेस्टिंग उन लोगों के लिए है जो हाई रिटर्न का लक्ष्य रखते हैं और ज्यादा जोखिम स्वीकार करने को तैयार हैं। यह इनोवेटिव, हाई ग्रोथ वाली कंपनियों पर फोकस करने वाले लॉन्ग-टर्म के निवेशकों के लिए बेहतर है।
सबसे अच्छा तरीका एक डायवर्सिफाई पोर्टफोलियो बनाना है जो दोनों रणनीतियों को जोड़ता है और संभावित रिवार्ड का पीछा करते हुए रिस्क मैनेजमेंट में मदद कर सकता है।
निष्कर्ष
निवेश संबंधी फैसले लेने के लिए वैल्यू और ग्रोथ इन्वेस्टिंग के बीच अंतर को समझना महत्वपूर्ण है। अपने लक्ष्यों और जोखिम सहनशीलता का मूल्यांकन करके आप यह तय कर सकते हैं कि कौन सी रणनीति आपकी फाइनेंशियल आकांक्षाओं के साथ सबसे अच्छी तरह मेल खाती है।
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नोट: यह आर्टिकल तेजी मंदी द्वारा मूल रूप से ET मार्केट के लिए लिखा गया था।
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