AUM और टोटल एसेट यह टर्म समान लग सकते हैं, लेकिन दोनों के बीच महत्वपूर्ण अंतर हैं। जानें इसके निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) और टोटल एसेट फाइनेंस की दुनिया में इस्तेमाल किए जाने वाले दो कॉमन शब्द हैं। हालांकि, बहुत से लोग इन्हें गलत उपयोग कर उन्हें एक दूसरे के स्थान पर इस्तेमाल कर लेते हैं। यह भ्रम विशेष रूप से एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) में प्रचलित है, जहां AUM को अक्सर AMC के टोटल एसेट के समान माना जाता है।
लेकिन क्या सचमुच यही मामला है?
जवाब है नहीं। हालांकि टर्म समान लग सकते हैं, लेकिन उनमें महत्वपूर्ण अंतर हैं जिन्हें समझना आपके लिए महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से AMC, बैंक या इंश्योरेंस कंपनी के मामले में।
इस आर्टिकल में AUM और टोटस एसेट के बीच अंतर के बारे में जानेंगे। तो, आइए इस विषय पर गहराई से विचार करें और इन दो शब्दों से जुड़े मिथक को समझें।
एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) क्या है?
विभिन्न उद्योगों में विशेष प्रकार के एसेट होते हैं जिनका उपयोग प्रॉफिट जनरेट करने के लिए किया जाता है।
उदाहरण के लिए बैंकिंग संस्थान ग्राहकों को लोन प्रदान करते हैं और बदले में ब्याज कमाते हैं। यहां एक लोन बुक बैंक के लिए एक एसेट है।
दूसरी ओर, एसेट मैनेजमेंट कंपनियां निवेशकों से पैसा इकट्ठा करती हैं और रिटर्न जनरेट करने के लिए विभिन्न एसेट क्लास जैसे इक्विटी, बॉन्ड, गोल्ड और गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में निवेश करती हैं। एसेट मैनेजमेंट कंपनियां अपने क्लाइंट की ओर से जिन एसेट का मैनेजमेंट करती है, वे उनके प्राइमरी एसेट होते हैं।
इसके अलावा, इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा कलेक्ट किए गए प्रीमियम को उनका एसेट माना जाता है और इन फंड्स को ब्याज, लाभांश और कैपिटल गेन के रूप में एडिशनल रेवेन्यू अर्जित करने के लिए निवेश किया जाता है।
प्रत्येक कंपनी प्रॉफिट कमाने के लिए जिन एसेट का मैनेजमेंट करती है, उन्हें एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) कहा जाता है। संक्षेप में कहें तो AUM उन फंड्स या एसेट के टोटल वैल्यू को मापता है जिन्हें ये कंपनियां अपने क्लाइंट की ओर से रिटर्न अर्जित करने के लिए मैनेज करती हैं।
क्या इसे हम टोटल एसेट नहीं कह सकते हैं?
जी ‘नहीं’।
टोटल एसेट क्या हैं?
किसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी का AUM कई सोर्स से प्राप्त होता है। इन सोर्स में खुद AMC द्वारा एकत्र किया गया निवेश, बीमा कंपनियों जैसी बाहरी संस्थाओं से निवेश और तीसरे पक्ष की संस्थाओं से निवेश शामिल हैं।
AMC इन निवेशों के मैनेजमेंट के लिए एक निश्चित प्रतिशत का शुल्क लगाती है। यह वह प्रॉफिट होता है जो वे कमाते हैं और यह प्रॉफिट उनकी बैलेंस शीट में रिजर्व में जोड़ा जाता है।
किसी कंपनी का टोटल एसेट उसके एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) से छोटा हो सकता है क्योंकि AUM में थर्ड पार्टी की ओर से मैनेज्ड एसेट के साथ-साथ उनके अपने क्लाइंट से कलेक्ट किया गया प्रीमियम भी शामिल होता है। इसके विपरीत, टोटल एसेट में केवल कंपनी के स्वामित्व वाले एसेट शामिल होते हैं और यह उनकी बैलेंस शीट में दिखाई देते हैं।
निवेशकों के लिए इसके क्या मायने हैं?
एक निवेशक के रूप में विभिन्न AMC के AUM की तुलना और विश्लेषण निवेश निर्णयों के लिए वैल्यूएबल इनसाइट प्रदान कर सकता है। AUM साइज को देखकर आप बाजार में विभिन्न AMC के स्केल और पोजीशन को समझ सकते हैं। इससे आपको यह तय करने में मदद मिल सकती है कि अपना पैसा कहां बुद्धिमानी से निवेश करना है।
इसके अलावा, यदि आप जानना चाहते हैं कि अन्य निवेशक किसी विशेष AMC पर कितना भरोसा करते हैं तो आप उस AMC के AUM में ग्रोथ को भी देख सकते हैं। इससे आप AMC की विश्वसनीयता और प्रदर्शन का अंदाजा लगा सकते हैं।
यदि आप हायर रिटर्न जनरेट करना चाहते हैं, तो यह नोट करना अच्छा होगा कि AMC के AUM में हायर इक्विटी और कम डेब्ट मिक्स संभावित रूप से आपको हाई रिटर्न दे सकता है। हालांकि, ज्यादा डेब्ट और कम इक्विटी मिक्स ज्यादा स्थिरता प्रदान कर सकते हैं लेकिन कम रिटर्न के साथ।
यह याद रखना भी आवश्यक है कि AMC या म्यूचुअल फंड कंपनी का वैल्यूएशन अक्सर उनके AUM और इक्विटी-डेब्ट मिक्स पर निर्भर करता है। इसलिए, AMC के प्रदर्शन और AMC के शेयरों में निवेश पर संभावित रिटर्न का मूल्यांकन करते समय इन फैक्टर पर ध्यान देना जरूरी है।
ओवरऑल, AUM और विभिन्न AMCs के इक्विटी-डेब्ट मिक्स का एनालिसिस और तुलना करना आपकी निवेश रणनीति के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसा करने से आप विभिन्न AMCs की क्षमता के बारे में वैल्यूएबल इनसाइट्स प्राप्त कर सकते हैं, जो आपको उचित निवेश निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं।
*आर्टिकल केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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