भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार मज़बूत हो रहा है। FY25 में दोनों देशों का कुल व्यापार रिकॉर्ड US$ 132.2 बिलियन तक पहुँच गया। इस दौरान भारत को अमेरिका के साथ US$ 40.8 बिलियन का ट्रेड सरप्लस मिला।
निवेश के स्तर पर भी अमेरिका भारत का अहम पार्टनर है। अप्रैल 2000 से जून 2025 तक अमेरिका से भारत में 10% शेयर के साथ कुल ₹5,41,654 करोड़ FDI आया, जिससे वह भारत में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक बन गया। हालाँकि, हाल ही के समय में अमेरिका ने भारत पर कुछ टैरिफ लगाए हैं, जिससे दोनों देशों के व्यापार संतुलन और आगे की रणनीति पर असर पड़ सकता है।
आइए इस इन्फोग्राफिक के जरिए भारत और अमेरिका के बीच के व्यापार को समझते हैं, ताकि निवेशकों को यह आसानी से पता चल सके कि टैरिफ़ लागू होने पर भारत के कौन-कौन से सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं।

निष्कर्ष
2025 का टैरिफ संकट भारत–अमेरिका व्यापार संबंधों में सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। पहले जो साझेदारी सहयोग पर आधारित थी, अब उसमें टकराव की झलक दिखने लगी है। दिलचस्प बात यह है कि द्विपक्षीय व्यापार लंबे समय से जारी है, लेकिन इसके बावजूद रिश्तों में तनाव गहरा होता जा रहा है।
आगे की राह इस बात पर टिकी है कि क्या दोनों देश बातचीत से समाधान निकाल पाते हैं। भारत की ओर से कुछ आर्थिक रियायतें देना स्थिति सुधारने का विकल्प हो सकता है, लेकिन असली समाधान तभी संभव है जब भू-राजनीतिक तनावों को सीधे तौर पर संबोधित किया जाए।
विशेषकर, रूस से भारत के तेल आयात का मुद्दा अभी भी एक बड़ी रुकावट है। जब तक यह मसला सुलझता नहीं, तब तक टैरिफ अस्थायी उपाय की बजाय एक स्थायी बोझ बन जाने का खतरा बना रहेगा। यही वह मोड़ है, जहां व्यापार और राजनीति दोनों का संतुलन तय होगा।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर