भारत का स्पेस इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रहा है। कभी अंतरराष्ट्रीय स्पेस क्षेत्र में बहुत कम मौजूदगी रखने वाला भारत अब अपने मार्केट शेयर को बढ़ाने पर फोकस कर रहा है और एक रिलायबिलिटी व कॉस्ट-इफेक्टिवनेस की पहचान बना रहा है।
उदाहरण के लिए, रूस का असफल चंद्र मिशन लगभग ₹16,000 करोड़ का पड़ा, जबकि भारत का सफल चंद्रयान-3 मात्र ₹600 करोड़ में पूरा हो गया। जो कई हॉलीवुड स्पेस फिल्मों के बजट से भी कम है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन ने इस बढ़ते सेक्टर पर फिर से ध्यान आकर्षित किया है।
नेशनल स्पेस डे (23 अगस्त) के अवसर पर, आइए एक इन्फोग्राफिक के जरिए भारत की अद्भुत स्पेस यात्रा को देखें।

निष्कर्ष
भारत का स्पेस क्षेत्र आज सफलता, इन्नोवेटिव और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुका है। आर्यभट्ट से लेकर चंद्रयान-3 और गगनयान तक की इस प्रगति ने साबित किया है कि भारत सीमित संसाधनों में भी बड़े और महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल कर सकता है। आज प्राइवेट क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी, सरकारी नीतियों का समर्थन और स्टार्टअप्स की इन्नोवेटिव सोच भारत को 2047 तक ग्लोबल स्पेस इकॉनमी का 15% हिस्सेदार बनाने की राह पर ले जा रही है।
भारत अब केवल अंतरिक्ष की खोज तक सीमित नहीं है, बल्कि विकास और संभावनाओं का नया रास्ता बना रहा है।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर