दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं जितनी तेजी से आगे बढ़ रही हैं, उतनी ही तेजी से उन पर कर्ज़ का बोझ भी बढ़ रहा है।
किसी देश की आर्थिक स्थिति को समझने के लिए GDP और डेब्ट-टू-GDP रेशियो दो सबसे महत्वपूर्ण आंकड़े माने जाते हैं।
जहां GDP यह बताता है कि कोई देश कितना प्रोडक्शन और कमाई कर रहा है, वहीं डेब्ट-टू-GDP रेशियो यह दिखाता है कि वह देश अपनी कमाई के मुकाबले कितना कर्ज़ ले चुका है।
इस इन्फोग्राफिक में हम जानेंगे कि किन देशों पर सबसे ज्यादा कर्ज़ है, भारत की स्थिति क्या है और 2030 तक कैसी दिखेगी ग्लोबल आर्थिक तस्वीर?

निष्कर्ष
दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं GDP के मामले में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन कर्ज़ का बोझ भी तेजी से बढ़ रहा है। GDP और कर्ज़ दोनों को संतुलित रखना किसी भी देश के लिए ज़रूरी है। भारत के लिए यह समय है कि वह अपनी आर्थिक विकास गति को बरकरार रखते हुए डेब्ट मैनेजमेंट पर भी ध्यान दे।
संतुलन ही आर्थिक मजबूती की कुंजी है, फिर चाहे वह कोई देश, राज्य या व्यक्ति ही क्यों न हो।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर