भारत ने रचा ग्रीन इतिहास: क्लीन एनर्जी से 50% बिजली!

भारत ने रचा ग्रीन इतिहास: क्लीन एनर्जी से 50% बिजली!
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भारत ने क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जिसमें भारत ने पेरिस समझौते के तहत निर्धारित 2030 के लक्ष्य से पांच वर्ष पहले ही अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 50% नॉन-फॉसिल फ्यूल स्रोतों से प्राप्त कर लिया है। यह उपलब्धि भारत की रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में स्ट्रॉन्ग कमिटमेंट, नीतिगत पहलों, और व्यापक निवेश का परिणाम है।

आइए समझते है कि रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में क्या हो रहा है और यह उपलब्धि क्या मायने रखती है।

क्या है मामला?

14 जुलाई 2025 को रिन्यूएबल एनर्जी मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सोशल मीडिया X के माध्यम से जानकारी दी कि देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में नॉन-फॉसिल फ्यूल स्रोतों का हिस्सा अब 50.08% तक पहुंच गया है। यह लक्ष्य भारत ने पेरिस जलवायु समझौते (Paris Climate Agreement) के तहत तय समय से पूरे पांच साल पहले हासिल किया है।

30 जून 2025 तक, भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता 484.82 गीगावाट (GW) थी, जिसमें से 242.78 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल स्रोतों जैसे सोलर, विंड, लार्ज हाइड्रो, और न्यूक्लियर एनर्जी से प्राप्त हुई, जो कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50.08% है।

हाइड्रोजन एनर्जी जो रिन्यूएबल एनर्जी का ही हिस्सा है, इसके बारे में विस्तृत जानकारी के लिए “भारतीय हाइड्रोजन एनर्जी सेक्टर: ग्रोथ, चुनौतियां और भविष्य” आर्टिकल पढ़ें।

सरकारी नीतियां और पहल

भारत सरकार ने रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियों और पहलों को लागू किया है। इनमें प्रधानमंत्री किसान उर्जा सुरक्षा और उत्थान महाअभियान (PM-KUSUM), प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (13 फरवरी 2024 को शुरू, 75,021 करोड़ रुपये के बजट के साथ), सोलर पार्क डेवलपमेंट, और नेशनल विंड-सोलर हाइब्रिड नीति शामिल हैं। ये पहल रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने, और ग्लोबल जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने में काफी योगदान दे रही हैं।

नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, जिसे 4 जनवरी 2023 को 19,744 करोड़ रुपये (US$ 2.4 बिलियन) के बजट के साथ मंजूरी दी गई, ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। यह मिशन भारत को ग्लोबल स्तर पर इस इमर्जिंग सेक्टर में अग्रणी बनाने की क्षमता रखता है।

COP26 शिखर सम्मेलन (2021) में, भारत ने 2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता, 1 बिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में कमी, और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने का संकल्प लिया।

चुनौतियां और समाधान

भारत ने स्थापित क्षमता में क्लीन एनर्जी के मामले में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है, लेकिन चुनौतियां बनी हुई हैं। क्योंकि देश अभी भी कोयले पर भारी निर्भर है, जहां पिछले साल बिजली की बढ़ती डिमांड का दो-तिहाई हिस्सा फॉसिल फ्यूल (विशेषकर कोयला) से पूरा हुआ। इसके अलावा, 2032 तक कोयला आधारित क्षमता में 80 GW की वृद्धि की योजना है।

एक्सपर्ट्स ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए कई समाधानों का सुझाव दिया है, जिनमें ग्रिड फ्लेक्सिबिलिटी में सुधार, बैटरी स्टोरेज को बढ़ावा देना, स्मार्ट ग्रिड का विकास, और सोलर, विंड, हाइड्रो और स्टोरेज जैसे स्रोतों के संयोजन के माध्यम से हाइब्रिड बिजली प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देना शामिल है।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

भारत अब तेजी से सोलर और अन्य रिन्यूएबल एनर्जी स्त्रोतों की ओर बढ़ रहा है और हाल ही के वर्षों में इस सेक्टर ने निवेशकों का काफी ध्यान आकर्षित किया है क्योंकि रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की कुछ कंपनियां निवेशकों के लिए मल्टीबैगर साबित हुई है।

सेक्टर में प्रोग्रेस की बात करें तो, सोलर एनर्जी में वारी एनर्जी को हाल ही में आदित्य बिड़ला रिन्यूएबल्स से 410 गीगावाट और इंजी इंडिया (Engie India) से 362 मेगावाट के बड़े ऑर्डर मिले हैं। अडानी ग्रीन एनर्जी ने पिछले साल अपने सोलर मॉड्यूल की बिक्री में 59% की बढ़ोतरी की है, जिसमें से 1.72 गीगावाट मॉड्यूल विदेशों को निर्यात किए गए।

सिर्फ इतना ही नहीं, बिजली बनाने वाली कंपनी NTPC ग्रीन भी सोलर और विंड एनर्जी में भारी निवेश कर रही है। कंपनी ने अब तक 1.6 गीगावाट के ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स शुरू कर दिए हैं। इसके अलावा, 9.1 गीगावाट के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है और 9.9 गीगावाट की योजनाएं आने वाले समय में शुरू होंगी।

भविष्य की बातें

भारत 2030 तक अपनी नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता को 500 GW तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है, जिसमें सोलर (280 GW), विंड (100 GW), और हाइड्रोपावर (70 GW) में महत्वपूर्ण विस्तार शामिल है। इसके अलावा, नई तकनीकों जैसे फ्लोटिंग सोलर पैनल (जैसे 100 MW रामागुंडम प्रोजेक्ट) और ब्लेडलेस विंड टरबाइन पर काम चल रहा है।

सरकार की नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और PLI (उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन) योजना जैसी पहलें भारत को एक आत्मनिर्भर, ग्रीन अर्थव्यवस्था बनाने में मदद कर रही हैं। 2030 के लक्ष्य के साथ, ये कदम न केवल एनर्जी सिक्योरिटी और आर्थिक विकास को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि भारत को ग्लोबल एनर्जी ट्रांजीशन में अग्रणी बना रहे हैं।

*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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