भारत में त्योहारों का सीजन राखी और गणेश चतुर्थी से शुरू हो चुका है, इसके बाद नवरात्रि और दिवाली आएंगे। त्योहार खुशियां और सेलिब्रेशन लाते हैं, लेकिन कपड़ों, गोल्ड, बर्तन, फर्नीचर और गिफ्ट्स पर खर्च भी बढ़ाते हैं। बहुत से लोग अब भी दुकानों से पारंपरिक शॉपिंग पसंद करते हैं, पर व्यस्त लाइफस्टाइल और डिजिटल दौर ने ऑनलाइन शॉपिंग को अच्छा विकल्प बना दिया है। इस सुविधा के साथ-साथ ऑनलाइन स्कैम भी बढ़ रहे हैं और खबरों में आ रहे हैं।
फेस्टिव शॉपिंग शुरू करने से पहले यह जानना जरूरी है कि ऐसे स्कैमर्स से कैसे सुरक्षित रहें और खुद को कैसे बचाएं।
फेस्टिव सीजन फ्रॉड्स में उछाल
भारत में फेस्टिव सीजन के दौरान ऑनलाइन फ्रॉड 20–25% तक बढ़ गया है, जिसकी वजह AI-ड्रिवन टैक्टिक्स और UPI पेमेंट्स, मोबाइल वॉलेट्स व ऑनलाइन शॉपिंग के रिकॉर्ड हाई स्तर हैं। फिशिंग अटैक्स और फेक प्रमोशनल ऑफर्स तेजी से फेस्टिव शॉपर्स को टारगेट कर रहे हैं।
समस्या का पैमाना चिंताजनक है: साइबर फ्रॉड लॉसेस FY24 में ₹177.05 करोड़ तक पहुंच गए, जो FY23 के ₹69.68 करोड़ से ज्यादा हैं। इसी तरह, RBI ने FY24 में 36,075 बैंक फ्रॉड केस रिपोर्ट किए, जो 166% YoY इंक्रीज है।
फ्रॉडस्टर्स आम जालों का फायदा उठाते हैं जैसे फेक कूपन और प्रोमो लिंक्स, जहां एक क्लिक से स्क्रीन रिकॉर्डर या रिमोट-एक्सेस ऐप्स जैसा मालवेयर इंस्टॉल हो सकता है। ‘फ्री गिफ्ट’ या ‘₹10,000 वाउचर’ जैसे चमकदार मैसेज यूजर्स को संवेदनशील डिटेल्स साझा करने के लिए बहकाते हैं।
McAfee की 2024 रिपोर्ट के अनुसार, McAfee’s लैब्स ने 800+ अनचाहे फेस्टिव-रिलेटेड ईमेल्स एनालाइज किए और पाया कि स्कैम एक्टिविटी शुक्रवार और शनिवार को पीक पर रहती है। कई ईमेल्स फ्लिपकार्ट या अमेज़न जैसे ट्रस्टेड प्लेटफॉर्म्स बनकर आए, और यूजर्स को 99% तक के अवास्तविक डिस्काउंट्स से लुभाया गया।
फेस्टिव सीजन के दौरान स्कैम्स और उनके रेड फ्लैग्स
फेक वेबसाइट्स और काउंटरफिट ऑफर्स
स्कैमर्स फेस्टिव सेल्स में अमेज़न या फ्लिपकार्ट जैसे ट्रस्टेड प्लेटफॉर्म्स की नकल करने वाली फेक वेबसाइट्स और ऐड्स बनाते हैं।
रेड फ्लैग्स: URLs में नाम की हल्की फेरबदल या टाइपो। जैसे ‘amazon.com’ की जगह ‘amaz0n-deals.com’, खराब डिज़ाइन इंटरफेस, या 90–99% तक के अविश्वसनीय डिस्काउंट्स।
फेक डिलीवरी, ASAP ऑफर्स, और OTP स्कैम्स
स्कैमर्स कस्टमर्स को कॉल कर डिलीवरी सर्विस बनकर OTP मांगते हैं या लिंक पर क्लिक करने को कहते हैं।
रेड फ्लैग्स: ऐसे अर्जेंट मैसेज जिनमें OTP डालने या ट्रैकिंग लिंक पर क्लिक करने को कहा जाए, खासकर जब आपने कुछ मंगाया ही न हो।
मैलिशस ऐप्स और मैलिशस लिंक्स (APK स्कैम्स)
स्कैमर्स व्हाट्सएप या SMS के जरिए नकली या हानिकारक ऐप्स प्रमोट करते हैं, जो मालवेयर इंस्टॉल करते हैं या डेटा चुरा लेते हैं।
रेड फ्लैग्स: एक्सटर्नल APK डाउनलोड करवाने की कोशिश, ‘फ्लिपकार्ट’ या ‘दिवाली ट्रैकर’ जैसे वैध ऐप्स बनकर पेश होना, और अनचाहे लिंक।
फेक प्रोमो लिंक्स और अविश्वसनीय डील्स
स्कैमर्स लुभावने डिस्काउंट मैसेज या प्रोमो कोड्स भेजते हैं जो फिशिंग साइट्स पर रीडायरेक्ट करते हैं।
रेड फ्लैग्स: असलीयत से परे प्रमोशन, हाई-डिस्काउंट ‘स्पिन-द-व्हील’ या गिवअवे मैसेज, और ऐसे URLs के लिंक जिनको आपने पहले न देखा हो।
स्कैम SMS/व्हाट्सएप मैसेजेस और सोशल इंजीनियरिंग
स्कैमर्स कस्टमर सपोर्ट या प्लेटफॉर्म्स बनकर फीस (जैसे ‘लॉजिस्टिक्स’ फॉर फ्री गिफ्ट्स या इंस्टेंट डिलीवरी) भरने या पर्सनल इन्फो डालने को कहते हैं।
रेड फ्लैग्स: अर्जेंसी का इस्तेमाल, अनजान नंबर, अस्पष्ट पहचान (‘अकाउंट मैनेजर’), या छोटी राशि के भुगतान की मांग।
चैरिटी, गिवअवे और कॉन्टेस्ट फ्रॉड्स
फेक चैरिटीज को डोनेट करने या प्राइज वाले कॉन्टेस्ट्स में हिस्सा लेने के लिए बुलावा, लेकिन पीड़ितों से धोखा होता है या कुछ नहीं मिलता।
रेड फ्लैग्स: अनवेरिफाइड चैरिटीज, अग्रिम डोनेशन या गिफ्ट कार्ड्स की मांग, ‘आप जीत गए’ जैसे मैसेज जो बैंक डिटेल्स या फीस मांगते हैं।
इस फेस्टिव सीजन स्मार्ट और सुरक्षित शॉपिंग के टिप्स
- ट्रस्टेड प्लेटफॉर्म्स पर ही शॉपिंग करें: अमेज़न, फ्लिपकार्ट, मिंत्रा और Ajio जैसे ई-कॉमर्स नामों पर टिके रहें। ये साइट्स सिक्योर पेमेंट्स और जेनुइन प्रोडक्ट्स देती हैं। अनजान सोशल मीडिया ऐड्स या अपरिचित वेबसाइट्स के लिंक पर क्लिक न करें।
- फेक ऐप्स और फिशिंग लिंक्स से बचें: ऐप्स सिर्फ ऑफिशियल स्टोर्स (गूगल प्ले, एप्पल ऐप स्टोर) से ही डाउनलोड करें। URLs को ध्यान से वेरिफाई करें और ईमेल या SMS से आए संदिग्ध लिंक्स पर कभी क्लिक न करें।
- पेमेंट्स के लिए पब्लिक Wi‑Fi से बचें: पब्लिक Wi‑Fi असुरक्षित हो सकता है। ऑनलाइन शॉपिंग करते समय मोबाइल डेटा या सिक्योर, पासवर्ड-प्रोटेक्टेड Wi‑Fi का इस्तेमाल करें।
- सिक्योर पेमेंट मेथड्स का उपयोग करें: क्रेडिट/डेबिट कार्ड्स, UPI, या पेटीम, फोनपे और गूगल पे जैसे ट्रस्टेड वॉलेट्स को प्राथमिकता दें। ये असुरक्षित विकल्पों की तुलना में बेहतर फिशिंग प्रोटेक्शन देते हैं।
- सेलर रेटिंग्स और रिव्यूज़ चेक करें: खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स या हाई-वैल्यू आइटम्स के लिए, खरीदने से पहले कस्टमर रेटिंग्स और सेलर फीडबैक देखें। वेरिफाइड सेलर्स के साथ रहें।
- अलर्ट्स इनेबल करें और ऑर्डर्स ट्रैक करें: बैंक और शॉपिंग अकाउंट्स के लिए SMS/ईमेल अलर्ट्स ऑन करें ताकि खर्च पर नज़र रहे और संदिग्ध गतिविधि जल्दी पकड़ी जा सके। डिलीवरी ट्रैकिंग मॉनिटर करें ताकि मिस्ड पार्सल स्कैम्स से बचें।
- रिटर्न और रिफंड पॉलिसीज़ रिव्यू करें: खरीदने से पहले देखें कि आसान रिटर्न/एक्सचेंज का विकल्प है या नहीं, खासकर कपड़े या इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए। अपने अधिकार जानना बाद में परेशानी से बचा सकता है।
- अकाउंट्स को स्ट्रॉन्ग क्रेडेंशियल्स से सुरक्षित करें: ऑनलाइन शॉपिंग अकाउंट्स के लिए मजबूत पासवर्ड रखें और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन इनेबल करें। यह ब्रेच के खिलाफ एक जरूरी अतिरिक्त सुरक्षा परत देता है।
निष्कर्ष
भले ही सरकार मैलिशस वेबसाइट्स को ब्लॉक करे, ऑनलाइन स्कैम्स बढ़ते रहेंगे क्योंकि फ्रॉडस्टर्स धोखा देने के नए तरीके निकालते रहेंगे। सबसे अच्छा बचाव जागरूकता है। अगर ऑनलाइन शॉपिंग या पेमेंट को लेकर भरोसा न हो, तो विश्वसनीय परिवार के सदस्यों से मदद लें या ऑफलाइन खरीदारी करें। फेस्टिव सीजन में डिस्काउंट और सुविधा के कारण ऑनलाइन शॉपिंग बढ़ती है, जिससे साइबर क्रिमिनल्स के लिए यह सुनहरा मौका बनता है। सतर्क रहना ही सुरक्षित रहने का एकमात्र तरीका है।
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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