भारत के डिजिटल पेमेंट्स लैंडस्केप में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने एक क्रांति ला दी है। पिछले पांच सालों में UPI ने अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है और डिजिटल ट्रांजेक्शन के क्षेत्र में अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया है। RBI की रिपोर्ट के अनुसार, UPI ने भारत के डिजिटल पेमेंट्स मार्केट में 83% हिस्सेदारी हासिल कर ली है। यह आंकड़ा न केवल UPI की लोकप्रियता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से डिजिटल होती रही है।
आइए समझते है कि इस ग्रोथ के पीछे क्या वजह है और डिजिटल क्रांति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्या मायने रखती है।
क्या है मामला?
2016 में शुरू होने के बाद से ही यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने भारत के डिजिटल पेमेंट्स लैंडस्केप को पूरी तरह बदल दिया है। RBI के आंकड़ों के अनुसार, 2018 में भारत में कुल UPI ट्रांजेक्शन की संख्या 375 करोड़ थी, जो 2024 में बढ़कर 17,221 करोड़ हो गई है।
इसके साथ ही, इसी अवधि में UPI ट्रांजेक्शन की कुल वैल्यू भी 5.86 लाख करोड़ रुपये से 246.83 लाख करोड़ रुपये हो गयी है। जहां पिछले पांच सालों में ट्रांजेक्शन की संख्या में 89.3% और वैल्यू में 86.5% की CAGR की ग्रोथ है।
यह वृद्धि न केवल UPI की सरलता और सुरक्षा का परिणाम है, बल्कि यह डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने में एक बड़ा कदम भी है।
UPI की सफलता के पीछे के कारण
UPI की सफलता के पीछे कई कारण हैं। सबसे पहले, यह एक इंटरऑपरेबल सिस्टम है, जो विभिन्न बैंक्स और वॉलेट्स के बीच सीमलेस ट्रांजेक्शन को संभव बनाता है। दूसरा, UPI ट्रांजेक्शन पूरी तरह से सुरक्षित हैं और इसमें मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग किया जाता है। तीसरा, UPI ने छोटे व्यापारियों और स्ट्रीट वेंडर्स के लिए भी डिजिटल पेमेंट्स को सुलभ बना दिया है, जिससे कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला है। इसके साथ ही, यह रियल-टाइम पेमेंट, QR कोड, मोबाइल नंबर, वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA) जैसे सरल तरीकों से भुगतान करने की सुविधा भी देता है।
इसके अलावा, सरकार और RBI ने UPI को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं। उदाहरण के लिए, UPI ट्रांजेक्शन पर कोई शुल्क नहीं और नए फीचर्स जैसे UPI 123Pay, UPI लाइट और UPI सर्किल को लॉन्च करना। ये कदम UPI को और भी अधिक यूजर-फ्रेंडली बना रहे हैं।
भारत में डिजिटल पेमेंट की तेज़ी से बढ़ती स्वीकार्यता
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के डिजिटल पेमेंट्स इंडेक्स (DPI) में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की गई है। सितंबर 2024 तक यह इंडेक्स 465.33 तक पहुंच गया, जो मार्च 2024 में 445.5 था। इसका मतलब है कि देश में डिजिटल ट्रांजेक्शन का उपयोग लगातार बढ़ रहा है।
RBI के अनुसार, इस वृद्धि के पीछे मुख्य कारण पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर और पेमेंट परफॉर्मेंस में सुधार है। जनवरी 2021 में लॉन्च किया गया यह इंडेक्स डिजिटल पेमेंट के प्रसार को मापता है। इसका आधार वर्ष मार्च 2018 है, जिसे 100 अंक पर सेट किया गया था।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
UPI की सफलता ने निवेशकों के लिए भी नए अवसर खोले हैं। फिनटेक कंपनियां, जो UPI प्लेटफॉर्म पर काम कर रही हैं, तेजी से बढ़ रही हैं। उदाहरण के लिए, CRED जैसी कंपनियां RBI के सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) प्रोजेक्ट से जुड़कर नए इनोवेशन ला रही हैं। CRED पहली फिनटेक कंपनी बन गई है, जिसे CBDC एक्सेस देने की अनुमति मिली है।

इसके अलावा, अगर हम भारतीय स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड प्लेयर्स की बात करें तो बैंक्स के अलावा पेटीएम और मोबिक्विक जैसे स्टार्टअप लिस्टेड है और फोनपे जो UPI मार्केट का सर्वाधिक हिस्सा रखता है IPO लाने की तैयारी में है।
भविष्य की बातें
UPI का भविष्य और भी उज्ज्वल दिख रहा है। RBI और सरकार ने UPI को ग्लोबल स्तर पर ले जाने का प्रयास कर रही है और कई देशों में UPI की सुविधा शुरु भी हो चुकी है। जिनमें भूटान, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, सिंगापुर, श्रीलंका और UAE शामिल है।
इसके साथ ही, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की पेमेंट्स सिस्टम रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के अंत तक देश में कुल ट्रांजेक्शन का 83% हिस्सा डिजिटल भुगतान का हो गया है, जबकि RTGS, NEFT, IMPS, क्रेडिट और डेबिट कार्ड जैसे ट्रेडिशनल पेमेंट मेथड की हिस्सेदारी 2019 में 66% थी, जो 2024 तक घटकर सिर्फ 17% रह गई है।
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर