भारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे समय से चल रही ट्रेड बातचीत अब एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। अब दोनों देशों के बीच FTA लागू होने जा रहा है। समझौते के बाद भारतीय निर्यात को न्यूजीलैंड के मार्केट में बेहतर पहुंच मिलेगी, जबकि सर्विसेज, इन्वेस्टमेंट और प्रोफेशनल मोबिलिटी के लिए भी नए अवसर तैयार होंगे। यह समझौता ऐसे समय में लागू हो रहा है जब दोनों देश आपसी व्यापार और आर्थिक संबंधों को और विस्तार देने पर जोर दे रहे हैं।
आइए समझते हैं कि इस FTA में क्या प्रावधान हैं और भारतीय कंपनियों के लिए इसका क्या महत्व है।
क्या है मामला?
भारत और न्यूजीलैंड के बीच FTA नेगोशिएशन मार्च 2025 में शुरू हुआ था। पांच फॉर्मल राउंड के बाद बातचीत 22 दिसंबर 2025 को पूरी हुई और दोनों देशों ने 27 अप्रैल 2026 को समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद न्यूजीलैंड की संसद ने 16 सितंबर को 93-29 के वोट से FTA को मंजूरी दी और 21 सितंबर को रैटिफिकेशन प्रक्रिया पूरी हो गई।
अब यह समझौता 20 अक्टूबर से प्रभावी होगा। इसके तहत न्यूजीलैंड भारतीय निर्यात को सभी टैरिफ लाइन्स पर पहले दिन से 100% ड्यूटी-फ्री मार्केट एक्सेस देगा। मौजूदा व्यवस्था में भारतीय गुड्स पर न्यूजीलैंड में अधिकतम 10% तक टैरिफ लगता है। इससे भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड के मार्केट में अपने प्रोडक्ट्स की प्राइस को अधिक प्रतिस्पर्धी रखने में मदद मिल सकती है।
भारतीय निर्यात के लिए किन सेक्टर्स में अवसर?
FTA से कई भारतीय इंडस्ट्रीज को न्यूजीलैंड के मार्केट में बेहतर एक्सेस मिलेगा। इनमें टेक्सटाइल्स और अपैरल, लेदर और फुटवियर, जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स और प्रोसेस्ड फूड जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स शामिल हैं। ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स के साथ एयरोस्पेस और डिफेंस जैसे सेक्टर्स को भी समझौते से अवसर मिलने की बात कही गई है।
सर्विसेज सेक्टर में भी न्यूजीलैंड ने 118 सेक्टर्स में कमिटमेंट दिया है और 139 सेक्टर्स में Most-Favoured Nation ट्रीटमेंट की पेशकश की है। इसका महत्व इसलिए है क्योंकि FTA का फायदा केवल फिजिकल गुड्स निर्यात करने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा।
हालांकि, भारत ने अपने कुछ संवेदनशील सेक्टर्स को टैरिफ कन्सेशन से बाहर रखा है। इनमें डेयरी, कई एग्रीकल्चरल कमोडिटीज, शुगर और कुछ मेटल्स शामिल हैं। न्यूजीलैंड के भारत को होने वाले निर्यात में 70.03% टैरिफ लाइन्स को मार्केट एक्सेस मिलेगा, जो बाइलैटरल ट्रेड के 95% को कवर करती हैं।
इन्वेस्टमेंट और स्किल्ड वर्कर्स के लिए क्या प्रावधान हैं?
समझौते में ट्रेड के अलावा इन्वेस्टमेंट और प्रोफेशनल मोबिलिटी पर भी ध्यान दिया गया है। न्यूजीलैंड ने भारत में अगले 15 वर्षों में $20 बिलियन के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। यह दोनों देशों के बीच लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट रिलेशनशिप को बढ़ाने की दिशा में एक प्रमुख प्रावधान है।
प्रोफेशनल मोबिलिटी के तहत हर साल 5,000 स्किल्ड भारतीय वर्कर्स को Temporary Employment Entry वीजा के जरिए न्यूजीलैंड में तीन साल तक रहने की अनुमति मिल सकती है। इसके दायरे में IT, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, एजुकेशन और कंस्ट्रक्शन जैसे सेक्टर हैं। AYUSH प्रैक्टिशनर्स, योग इंस्ट्रक्टर्स, इंडियन शेफ्स और म्यूजिक टीचर्स को भी इसमें शामिल किया गया है।
इसके अलावा, Working Holiday Visa के तहत हर साल 1,000 युवा भारतीय न्यूजीलैंड जाकर 12 महीने तक रह सकेंगे। योग्य भारतीय छात्रों को पढ़ाई के दौरान हर सप्ताह 20 घंटे तक काम करने की अनुमति होगी और उनकी क्वालिफिकेशन के आधार पर पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा का विकल्प भी उपलब्ध होगा।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
निवेशकों के लिए इस समझौते का महत्व मुख्य रूप से निर्यात-ओरिएंटेड कंपनियों के लिए बदलते मार्केट एक्सेस में है। जिन कंपनियों के प्रोडक्ट पहले टैरिफ के कारण न्यूजीलैंड में अपेक्षाकृत महंगे पड़ते थे, उन्हें अब प्राइस के स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी होने का अवसर मिलेगा। इसका असर खासतौर पर उन बिजनेस मॉडल्स में देखा जा सकता है जिनमें न्यूजीलैंड का मार्केट निर्यात ग्रोथ का हिस्सा है।
साथ ही, सर्विसेज और प्रोफेशनल मोबिलिटी से जुड़े प्रावधान भारतीय सर्विस कंपनियों के लिए संभावित अवसरों का दायरा बढ़ाते हैं। हालांकि, किसी कंपनी के लिए वास्तविक लाभ उसके प्रोडक्ट्स, न्यूजीलैंड में डिमांड, निर्यात क्षमता और FTA के प्रावधानों के इस्तेमाल पर निर्भर करेगा।
भविष्य की बातें
20 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाला भारत-न्यूजीलैंड FTA दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए एक नया फ्रेमवर्क तैयार करेगा। भारतीय निर्यात को पहले दिन से 100% ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलने के साथ सर्विसेज, इन्वेस्टमेंट और प्रोफेशनल मोबिलिटी में भी नए अवसर खुलेंगे।
दोनों देशों ने 2030 तक गुड्स और सर्विसेज में बाइलैटरल ट्रेड को दोगुना करके ₹35,000 करोड़ करने का लक्ष्य भी तय किया है। इस लक्ष्य की दिशा में FTA के तहत मिलने वाला ड्यूटी-फ्री मार्केट एक्सेस, सर्विसेज में कमिटमेंट और निवेश से जुड़े प्रावधान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
समझौते में कुछ प्रोडक्ट्स के लिए भारत ने कन्सेशन नहीं दिया है, जबकि अन्य प्रोडक्ट्स के लिए टैरिफ को चरणबद्ध तरीके से कम करने का प्रावधान है। लगभग 30% टैरिफ लाइन्स पर ड्यूटी तुरंत खत्म होगी, जबकि 35.60% टैरिफ को 3 से 10 वर्षों के बीच चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाएगा। वाइन, फार्मास्यूटिकल ड्रग्स, पॉलिमर्स और कुछ एल्युमिनियम, आयरन और स्टील प्रोडक्ट्स को भी टैरिफ में कमी का लाभ मिलेगा।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।