भारत के पावर सेक्टर में महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं। एक तरफ जहां कोयले का उत्पादन बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ सोलर एनर्जी और विंड एनर्जी जैसे रिन्यूएबल एनर्जी सोर्सेज का तेजी से विकास हो रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, FY24 में पहली बार कोयले की हिस्सेदारी भारत की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में 50% से नीचे चली गई।
चलिए समझते है पावर जनरेशन में कोयले की गिरती हिस्सेदारी और रिन्यूएबल एनर्जी का बढ़ता योगदान निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है।
क्या है मामला?
एनर्जी, एनवायरनमेंट और वाटर कॉउंसिल (CEEW) ने 2 मई 2024 को कहा है कि भारत में इंस्टॉल्ड एनर्जी कैपेसिटी में तेजी से बदलाव हो रहा है। FY24 में, कोयले का हिस्सा भारत की कुल स्थापित क्षमता के 50% से नीचे गिर गया, यह पहली बार हुआ है, देश की कुल स्थापित ऊर्जा क्षमता अब 441.97 गीगावॉट तक पहुंच गई है, जिसमें से 143.6 गीगावॉट (32.5%) रिन्यूएबल और 46.9 गीगावॉट (11%) जलविद्युत से आई थी।
यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है जो दर्शाता है कि भारत तेजी से कोयले से दूर और रिन्यूएबल एनर्जी सोर्सेज की ओर बढ़ रहा है।
भारत में बिजली की डिमांड क्यों बढ़ रही है?
भारत में बिजली की डिमांड लगातार बढ़ रही है और CEEW-CEF रिपोर्ट का कहना है कि FY24 में यह डिमांड 240 गीगावाट के एक नए उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। इस ग्रोथ के पीछे कई कारण बताए गए हैं, जैसे देश की अर्थव्यवस्था का तेजी से विकास, कम बारिश, सामान्य से अधिक तापमान और उत्तरी भारत में कड़ाके की सर्दी। इतना ही नहीं, बिजली की कुल खपत में भी पिछले फाइनेंशियल ईयर की तुलना में लगभग 8% की ग्रोथ देखी गई है।
भारतीय पावर सेक्टर
भारत की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष की तुलना में इस साल कुल क्षमता 6.22% बढ़कर 441.97 गीगावॉट तक पहुंच गई है। इसके साथ ही IBEF के अनुसार, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) का अनुमान है कि बिजली की डिमांड 2030 तक बढ़कर 817 गीगावॉट हो जाएगी। इस बढ़ती डिमांड को पूरा करने के लिए सरकार की योजना 2030 तक 500 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता स्थापित करने की है। साथ ही, CEA का अनुमान है कि 2029-30 तक रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादन का हिस्सा 18% से बढ़कर 44% हो जाएगा।

भारतीय कोयला प्रोडक्शन
भारत में कोयले का उत्पादन अप्रैल 2024 में 7.41% बढ़कर 78.69 मिलियन टन (MT) हो गया, जो पिछले साल 73.26 MT था। कोयले का डिस्पैच भी 80.23 MT से बढ़कर 85.10 MT (प्रोविशनल) हो गया। अप्रैल में, कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने 61.78 मिलियन टन (प्रोविशनल) कोयला उत्पादन किया, जो 7.31% की वृद्धि है। कैप्टिव/अन्य ने 11.43 मिलियन टन का उत्पादन किया, जो 12.99% की वृद्धि है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
भारत के एनर्जी सेक्टर में हो रहे बदलाव निवेशकों के लिए कई अवसर लेकर आ रहे हैं। कोयले के उत्पादन में वृद्धि के बावजूद, रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में तेजी से हो रही प्रगति निवेशकों के लिए आकर्षक है।
CEEW-CEF रिपोर्ट बताती हैं कि FY24 में पहली बार पावर जनरेशन में कोयले का योगदान 50% से कम रहा है। यह सब इस बात की ओर इशारा करता है कि भारत का एनर्जी सेक्टर भविष्य में और अधिक सस्टेनेबल बनने की ओर बढ़ रहा है, इसलिए निवेशक रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में बेहतर कंपनियों की तलाश शुरु कर सकते है और सही वैल्यूएशन मिलने ओर निवेश के बारे में सोच सकते है।
भविष्य की बातें
CEEW-CEF रिपोर्ट का कहना है कि भारत जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए अपनी राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) को गंभीरता से ले रहा है। अगस्त 2022 में, भारत ने संयुक्त राष्ट्र को आधिकारिक रूप से सूचित किया कि वह 2030 तक अपने GDP के एमिशन इंटेंसिटी को 2005 के स्तर से 45% तक कम कर देगा। साथ ही, भारत ने यह भी लक्ष्य रखा है कि 2030 तक कुल बिजली जरूरत का 50% नॉन-फॉसिल फ्यूल आधारित पावर सोर्सेज से पूरा किया जाएगा।
हालाँकि, इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि FY24 में भारत की अधिकतम पावर डिमांड लगातार बढ़ती रही और 240 गीगावाट के एक नए उच्च स्तर पर पहुंच गई।
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*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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