भारत तेजी से ग्रीन हाइड्रोजन अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, हाल ही में, सरकार ने 2 बिलियन डॉलर की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का लक्ष्य ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन को सस्ता बनाना और भारत को इस सेक्टर में एक प्रमुख निर्यातक बनाना है।
आइए देखें कि भारत में ग्रीन हाइड्रोजन का क्या भविष्य है और क्या इस सेक्टर में निवेशकों के लिए निवेश का सही समय है?
क्या है मामला?
मनी कंट्रोल के अनुसार, ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी सेक्टर भारत में इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल रही है और सरकार भी इस सेक्टर में निवेश को बढ़ावा दे रही है। जनवरी 2024 में, सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) ने 1,500 मेगावाट क्षमता के इलेक्ट्रोलाइज़र और 412 किलो टन प्रति वर्ष (ktpa) ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन का टेंडर रिलायंस इंडस्ट्रीज, ग्रीनको-जॉन कॉकरिल, L&T और अडानी जैसी कंपनियों को दिया गया।
सिर्फ इतना ही नहीं, 2024 के अंतरिम बजट में, सरकार ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के लिए पिछले साल के 297 करोड़ रुपये के बजट को बढ़ाकर 600 करोड़ रुपये कर दिया हैं। इस बात से तो इंकार नहीं किया जा सकता है कि यह सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन सवाल ये है कि क्या इस सेक्टर में निवेश करना सही है?
भारत का ग्रीन हाइड्रोजन मिशन
हाल ही में शुरू किए गए नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NHM) को ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन में तेजी लाने और भारत को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस मिशन का लक्ष्य 2030 तक देश की हाइड्रोजन डिमांड का 25% ग्रीन हाइड्रोजन सोर्सेज से पूरा करना है।
मनी कंट्रोल के अनुसार, ग्रीन हाइड्रोजन की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए विभिन्न कंपनियों ने ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट को शुरु करने की घोषणाएं भी की है। जिनमें L&T एवं जिंदल स्टील जैसी कंपनियां शामिल है। सिर्फ इतना ही नहीं, पिछले साल JM फाइनेंशियल ने एक नोट में बताया था कि भारत के ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर का तेजी से विकास प्रमुख रूप से तेल रिफाइनरियों, निर्यात और अमोनिया-आधारित उर्वरक उत्पादकों की बढ़ती डिमांड से प्रेरित है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
मनी कंट्रोल के अनुसार, भारत सरकार ग्रीन हाइड्रोजन को काफी बढ़ावा दे रही है भारत सरकार ने जनवरी 2023 में कुल 19,744 करोड़ रुपये के शुरुआती ऑउटले के साथ राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) को मंजूरी दी थी। इसके साथ ही अलग-अलग राज्य जैसे कि उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु ने भी ग्रीन हाइड्रोजन के लिए सब्सिडी की घोषणा की है।
इसलिए इस सेक्टर का भविष्य तो उज्जवल दिख रहा है लेकिन फिलहाल ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में पूरी तरह से काम करने वाली कोई कंपनी नहीं है हालांकि कुछ बड़ी कंपनियां निवेश के साथ आगे बढ़ रही है जैसे कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL), अडानी एंटरप्राइजेज, गेल और NTPC Ltd आदि।
भविष्य की बातें
द इकॉनोमिक टाइम्स के अनुसार, भारत एनर्जी सेक्टर में बदलाव लाने और दुनिया में अग्रणी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत 2030 तक ग्रीन हाइड्रोजन का प्रमुख निर्यातक बनने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
अल्वारेज़ & मार्सल की रिपोर्ट बताती है कि इस पहल से भारत को अगले दशक में 3 से 5 बिलियन डॉलर का निर्यात और 7-15 अरब डॉलर की आयात में कमी हो सकती है। यह कदम भारत की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य इम्पोर्टेड LNG पर निर्भरता कम करना और क्लीन एनर्जी अपनाकर देश आर्थिक गति प्रदान करना है।
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*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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