प्रोडक्टिविटी और आर्थिक विकास: क्या वाकई सीधा संबंध है?

प्रोडक्टिविटी और आर्थिक विकास: क्या वाकई सीधा संबंध है?
Share

इनफोसिस के संस्थापक N.R नारायण मूर्ति ने कुछ समय पहले सप्ताह में 70 घंटे काम को लेकर एक टिप्पणी की थी, जिस पर काफी चर्चा हुई और अभी भी हो रही है। अभी सवाल है कि नारायण मूर्ति जैसे दिग्गज व्यापारी 70 घंटे काम करने के पक्ष में हैं, लेकिन क्या यह भारत की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने का सही रास्ता है? आइए आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर इस पर चर्चा करें।

क्या है मामला?

इनफोसिस के संस्थापक N.R नारायण मूर्ति ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा है कि देश के युवाओं को देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए सप्ताह में 70 घंटे काम करना चाहिए। साथ ही काम के घंटो को लेकर मूर्ति जी ने गरीब किसानो और फैक्ट्री में काम करने वाले लोगो के साथ तुलना की और साथ ही यह कहा है कि जिन लोगों को सब्सिडी वाली शिक्षा मिली है, उनका यह कर्तव्य है कि वे भारत के कम भाग्यशाली नागरिकों के लिए बेहद कठिन परिश्रम करें।

सिर्फ इतना ही नहीं, उनकी पत्नी सुधा मूर्ति ने बताया कि उनके पिता भी सप्ताह में 70 घंटे से ज्यादा काम करते थे और उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बहन जो कि एक डॉक्टर है वह भी सप्ताह में 70 घंटे काम करती है। 

अभी आपने देखा कि इनफोसिस के संस्थापक N.R नारायण मूर्ति सप्ताह में 70 घंटे काम करने की सलाह दे रहे है लेकिन सवाल यह कि क्या सच में प्रोडक्टिविटी का काम के घंटो से कोई संबंध है चलिए पहले इकोनॉमिक्स की भाषा में प्रोडक्टिविटी को समझते है और फिर आगे बढ़ते है। 

प्रोडक्टिविटी क्या है?

अगर हम इकोनॉमिक्स की भाषा में बात करे तो प्रोडक्टिविटी का मतलब है किसी भी चीज़ के उत्पादन में लगने वाले संसाधनों (जैसे कि श्रम, पूंजी, आदि) के प्रत्येक इकाई के लिए मिलने वाला परिणाम है। उदाहरण के लिए, अगर एक कंपनी 100 श्रमिकों के साथ 1,000 प्रोडक्ट बनाती है, तो उसकी श्रम प्रोडक्टिविटी 10 प्रोडक्ट प्रति श्रमिक होगी।

कुल मिलाकर, किसी देश की अर्थव्यवस्था की प्रोडक्टिविटी को उसके सकल घरेलू उत्पाद (GDP) को वहां काम करने वाले लोगों के घंटों से विभाजित करके मापा जाता है। इससे पता चलता है कि कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था कितनी कुशलता से काम कर रही है।

चलिए, अभी देखते है कि इकोनॉमिक्स की नजर में दुनिया में किन-किन देशो की प्रोडक्टिविटी सबसे ज्यादा है:

आयरलैंड दुनिया में प्रति घंटे का GDP के आधार पर प्रोडक्टिविटी में सबसे आगे है। 

सरल शब्दों में कहें तो, प्रोडक्टिविटी हमें बताती है कि हम कितना इनपुट लगाकर कितना आउटपुट प्राप्त कर रहे हैं। जितने कम इनपुट में अधिक आउटपुट मिलेगा, उतनी ही अधिक प्रोडक्टिविटी होगी।

भारत की श्रम प्रोडक्टिविटी

अगर हम भारत की श्रम प्रोडक्टिविटी की बात करे तो वह काफी कमजोर है, इकोनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार, 2021 में भारत की श्रम प्रोडक्टिविटी केवल 8 डॉलर प्रति घंटे थी, जो ग्लोबल औसत 21.6 डॉलर प्रति घंटे है। इसके साथ ही अगर हम चीन की बात करे तो चीन की प्रोडक्टिविटी भी भारत से बेहतर है, लेकिन 13 डॉलर प्रति घंटे के साथ यह भी अमेरिका के 60 डॉलर प्रति घंटे के मुकाबले काफी पीछे है।

प्रोडक्टिविटी बढ़ाने का समाधान क्या है?

काम के घंटे बढ़ाना नहीं, बल्कि स्मार्ट तरीके से काम करना जरूरी है, ऐसा क्यों चलिए उदाहरण की मदद से समझते है:

  • चीन की प्रोडक्टिविटी भारत से ज्यादा है इससे पता चलता है कि काम के घंटे बढ़ाने से प्रोडक्टिविटी नहीं बढ़ती। चीन में काम के घंटे भारत के बराबर ही हैं, लेकिन उनकी प्रोडक्टिविटी तेजी से बढ़ रही है। इसलिए हमें स्मार्ट एप्रोच अपनाने की जरुरत है। 
  • आयरलैंड में काम के घंटे कम हैं, लेकिन प्रोडक्टिविटी बहुत अधिक है। इसका कारण बेहतर तकनीक, स्किल्ड वर्कफोर्स और हाई मूल्य एम्प्लॉयमेंट है।

निष्कर्ष

नारायण मूर्ति के बयान को सिर्फ काम के घंटों से जोड़कर देखना गलत होगा। वह हमसे कड़ी मेहनत, सामाजिक जिम्मेदारी और समान अवसरों के प्रति जागरूक रहने को कह रहे हैं। इसलिए यह जरूरी है कि हम अपनी स्ट्रेंथ को पहचानें और उनका इस्तेमाल खुद की और दूसरों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए करें। 

इसके साथ ही अगर हम अर्थव्यवस्था के संदर्भ में बात करे तो, 70 घंटे या इससे ज्यादा ही काम करना भारत की समस्या का समाधान नहीं है। हमें स्मार्ट तरीके से काम करने, नये विचारो को बढ़ावा देने और बेहतर नीतियां बनाने की जरूरत है। क्योंकि आयरलैंड की प्रोडक्टिविटी दुनिया में सबसे ज्यादा है जबकि काम के औसत घंटे भारत से काफी कम है।

आज के लिए सिर्फ इतना ही। उम्मीद करते है कि जानकारी आपको रोचक लगी होगी। इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूले। 

*आर्टिकल केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।

*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर

Teji Mandi Multiplier Subscription Fee
Min. Investment

3Y CAGR

Min. Investment

Teji Mandi Flagship Subscription Fee
Min. Investment

3Y CAGR

Min. Investment

Teji Mandi Edge Subscription Fee
Min. Investment

Min. Investment

Teji Mandi Xpress Subscription Fee
Total Calls

Total Calls

Recommended Articles
Scroll to Top