बदलती खानें की आदतें, बढ़ता फ़ूड प्रोसेसिंग मार्केट

7 जून को मनाए जाने वाले वर्ल्ड फ़ूड सेफ्टी डे निवेशकों के लिए नए अवसर लाता है! फ़ूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में निवेश के बारे में जानें।
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वर्ल्ड फ़ूड सेफ्टी डे हर साल 7 जून को मनाया जाता है। यह दिन हमें सुरक्षित और स्वस्थ भोजन के महत्व की याद दिलाता है। असुरक्षित भोजन से कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और खाद्य और कृषि संगठन (FAO) मिलकर वर्ल्ड फ़ूड सेफ्टी डे का आयोजन करते हैं।

चलिए भारत के फ़ूड सेफ्टी परिदृश्य और फ़ूड इंडस्ट्री को समझने का प्रयास करते है।

क्या है मामला?

इंटरनेशनल फ़ूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट (IFPRI) द्वारा 29 मई को ग्लोबल फ़ूड पॉलिसी रिपोर्ट 2024 जारी की की गयी है जिसमें पाया गया कि 38% भारतीय फ्राइड स्नैक्स और प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन करते हैं, जबकि केवल 28% ही स्वस्थ भोजन का सेवन करते हैं।

जबकि अगर हम, भारतीय फ़ूड इंडस्ट्री की बात करें तो भारत का फ़ूड और ग्रॉसरी मार्केट दुनिया का छठा सबसे बड़ा मार्केट है जिसमें फ़ूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री 32% का योगदान देती है। यह इंडस्ट्री देश के सबसे बड़े उद्योगों में से एक है और कुल निर्यात का 13% और औद्योगिक निवेश का 6% योगदान देता है।

खाने की बदलती आदतें

भारत समेत कई देशों में खानपान की आदतों में एक बड़ा बदलाव आ रहा है यह बदलाव स्वास्थ्य के लिहाज से ठीक नहीं है। इसका नतीजा ये हो रहा है कि कुपोषण की समस्या बढ़ रही है। साथ ही, वजन बढ़ने और बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है।

ग्लोबल फ़ूड पॉलिसी रिपोर्ट के अनुसार, 2011 से 2021 के बीच कुपोषण से ग्रस्त लोगों की संख्या 15.4% से बढ़कर 16.6% हो गई है। जबकि 2006 से 2016 के बीच, मोटापे से ग्रस्त वयस्कों की संख्या भी 12.9% से बढ़कर 16.4% हो गई है।

दिलचस्प बात ये है कि बाहर का खाना और पैकेटबंद खाने पर होने वाला खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है। कुछ शोध बताते हैं कि पैकेटबंद खाने पर ज्यादा खर्च करने से लोग फल और सब्जियां कम खाते हैं, इससे पोषण की कमी और बीमारियों का खतरा और बढ़ जाता है।

निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?

भारत में फ़ूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में निवेश के कई अवसर हैं। जैसा कि हम जानते हैं, भारत में अस्वस्थ खाने की आदतें आम हैं। लोग अक्सर सस्ते और आसानी से उपलब्ध प्रोसेस्ड फ़ूड का सेवन करते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। यही कारण है कि स्वस्थ और सुरक्षित फ़ूड विकल्पों की डिमांड तेजी से बढ़ रही है यह फ़ूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा अवसर है।

भविष्य की बातें

IBEF के अनुसार, भारत की बढ़ती आबादी, बदलती जीवनशैली और खान-पान की आदतों को देखते हुए फ़ूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री का मार्केट साइज 2022 के 866 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2027 तक 1,274 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। डिस्पोजेबल इनकम में वृद्धि और शहरीकरण भी इस क्षेत्र के विकास में तेजी ला रहे हैं।

भारत सरकार भी फ़ूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को बढ़ावा दे रही है, FY2024-25 के अंतरिम बजट में, फ़ूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को कुल 3,290 करोड़ रुपये (~396 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का बजट आवंटित किया गया था, जो कि FY24 के लिए संशोधित अनुमानों से लगभग 13% अधिक है।

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*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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