स्टॉक मार्केट में सिर्फ कंपनी की जानकारी पर निर्भर करके ट्रेड या निवेश करना काफी नहीं है क्योंकि कई बाहरी घटनाएं, चाहे वे आर्थिक हों या फिर फाइनेंशियल, शेयर बाजार पर सीधा प्रभाव डालती हैं। इसलिए यह निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है कि वह सभी इवेंट्स को समझें जो बाजारों को प्रभावित करते हैं।

इस आर्टिकल में, हम कुछ 2023 के आर्थिक एंव फाइनेंशियल इवेंट्स को समझने की कोशिश करेंगे, जो आपको 2024 में बेहतर निवेश निर्णय लेने में मदद करेंगे। 

इन्फ्लेशन

इन्फ्लेशन वह स्थिति है जब सामान और सेवाओं की सामान्य कीमतें बढ़ती हैं यानि कि एक चीज जो पहले सस्ते में मिलती थी, वह अब महंगी हो गई है। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार और बैंक कई कदम उठाते हैं ताकि लोगों को सस्ते में और आसानी से खरीदारी करने में मदद मिल सके।

प्रभाव: महँगाई एक तरह का दानव है जो हमारे खरीदने की क्षमता को खा जाता है। 2023 के अधिकांश समय में, ग्रामीण डिमांड में सुधार से महंगाई देरी से आयी, जिससे FMCG कंपनियों में मामूली वृद्धि हुई। समझने के लिए, ग्रामीण भारत कुल खर्च का एक तिहाई हिस्सा होता है। इसके अलावा, वर्ष में इसी कारण से कंस्यूमर डिस्क्रिशनरी प्रोडक्ट्स की धीमी बिक्री देखी गई। महँगाई ने 2023 में क्षेत्रों को सबसे अधिक प्रभावित किया।

नीचे दिए गए इमेज में समझाया गया है कि 1987 से अब तक भारतीय महंगाई दर क्या रही है और आने वाले वर्षो में क्या रह सकती है। 2023 के प्रमुख इवेंट्स और स्टॉक मार्केट पर उनका प्रभाव

यह इमेज भारत में साल – दर – साल इन्फ्लेशन रेट को दर्शाता है।

बजट

1 फरवरी, 2023 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में केंद्रीय बजट पेश किया, जिसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए जिनमें से कुछ को आप नीचे देख सकते है: 

  • नई कर व्यवस्था में 7 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले व्यक्तियों को कोई भी टैक्स देने की आवश्यकता नहीं है। 
  • वित्त मंत्री ने पूंजीगत व्यय को पिछले वर्ष की तुलना में 33% बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपये कर दिया। 
  • इसके अलावा, बजट में प्रधान मंत्री आवास योजना के लिए 79,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिससे सरकार के आवास प्रोग्राम को बढ़ावा मिला। यह पिछले वर्ष की तुलना में 66% की वृद्धि थी।
  • ग्रीन एनर्जी परिवर्तन पहल और एनर्जी सिक्योरिटी और नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए 35,000 करोड़ रुपये भी आवंटित किए गए थे।
  • कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए वित्त मंत्री ने यह भी घोषणा की कि 50 नए हवाई अड्डे, हेलीपैड और एयरोड्रोम शुरू किए जाएंगे।
  • इसके अलावा, भारतीय रेलवे के लिए 2.4 लाख करोड़ रुपये और शिक्षा क्षेत्र के लिए 1.12 लाख करोड़ रुपये आवंटित किये गये। 

प्रभाव: 1 फरवरी 2023 को, मार्केट मिक्स्ड नोट के साथ बंद हुआ। हालांकि, शेष वर्ष के दौरान कुछ क्षेत्रों ने ध्यान आकर्षित किया, जिसमें से कुछ योगदान बजट 2023 ने प्रदान किया था। ऐसे क्षेत्रों में कंपनियां जैसे कि रेलवे और ग्रीन एनर्जी, सरकारी CAPEX और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में परिवर्तन हासिल करने के कारण निवेशकों को उच्च रिटर्न दिया!

एसेट्स के बढ़ते Risk-Weighting पर RBI’s सर्कुलर

16 नवंबर 2023 को, RBI ने कमर्शियल बैंकों और NBFC के लिए असुरक्षित व्यक्तिगत ऋण के जोखिम भार में 25% की वृद्धि की घोषणा की, जिससे जोखिम भार 125% हो गया। बैंक को हर उधार के लिए RBI के दिशानिर्देशों के अनुसार प्रत्येक ऋण के लिए कुछ निश्चित पूंजी अलग रखनी होती है।

इसलिए, उधारकर्ताओं को असुरक्षित व्यक्तिगत ऋण देते समय बैंकों द्वारा अलग रखी जाने वाली पूंजी की मात्रा बढ़ाकर, RBI इन श्रेणियों के ऋणों की ग्रोथ को धीमा करना चाहता है क्योंकि वह काफी तेजी से बढ़ रहे थे। इन ऋणों की नॉन परफार्मिंग एसेट (NPA) में बदलने की संभावना अधिक होती है क्योंकि यह असुरक्षित होते हैं इसलिए यह कदम उठाया गया। 

प्रभाव: इस कदम का असर बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेस इंडस्ट्री पर हुआ। ऐसा इसलिए था क्योंकि बैंकों की पूंजी आवश्यकताओं को बढ़ाना होगा। बदले में, बैंक उधारकर्ता के लिए बढ़ी हुई पूंजी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इन ऋणों की लागत में ग्रोथ करेंगे। इसके अलावा, ये असुरक्षित व्यक्तिगत ऋण बैंकों के लिए सर्वाधिक कमाने वाले एसेट थे, जिनकी ग्रोथ धीमी हो जाएगी क्योंकि वे अब महंगे हो जाएंगे।

मोनेटरी पॉलिसी

2023 में, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने तय किया था कि इस बार भी रेपो दर को 6.5% पर ही बरकरार रखा जाएगा। RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास, ने कहा कि भारत दुनिया का नया विकास इंजन बन सकता है। RBI ने मई 2022 से रेपो दर को 6.5% पर बनाए रखा है ताकि बढ़ती कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि, रिटेल महंगाई नवंबर 2023 महीने में 5.55% रही, जो RBI की स्वीकार्य सीमा (2 – 6%) के अंदर है।  

प्रभाव: इस इवेंट का प्रभाव यह हुआ कि कंपनी की उधारी पर ब्याज बढ़ खर्च गया, क्योंकि यह ब्याज कंपनी के ‘प्रॉफिट & लॉस’ स्टेटमेंट में खर्च के रूप में दर्ज होता है इसलिए मुनाफा प्रभावित हुआ और शेयर की कीमतों में भी असर पड़ा। मैक्रोइकॉनॉमिक स्तर पर, विदेशी निवेशकों ने भारतीय एसेट बेचे, क्योंकि उन्हें अपने देश में उच्च यील्ड मिल रहा थी (मुख्य रूप से 2022 में), जिसके कारण उनके सेंट्रल बैंकों द्वारा भी ब्याज दरें बढ़ा दी गयी। हालंकि, अब मौजूदा ब्याज दरों ने ऊंचाई को छू लिया है और 2024 में ब्याज कम होने की उम्मीदों ने निवेशकों को खुश कर दिया है।2023 के प्रमुख इवेंट्स और स्टॉक मार्केट पर उनका प्रभाव

चार्ट 2021 के बाद से विभिन्न बिंदुओं पर रेपो रेट को दर्शाता है।

उम्मीद करते है आपको 2023 के आर्थिक एंव फाइनेंशियल इवेंट्स से नए वर्ष में फाइनेंशियल निर्णय लेने में मदद मिलेंगी। इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूले। 

*आर्टिकल केवल जानकारी उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।

*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर