हाल ही में पब्लिक सेक्टर बैंक्स से जुड़े विदेशी निवेश (FDI) को लेकर मार्केट में कई तरह की अटकलें चल रही थीं। ख़बरें थीं कि सरकार FDI लिमिट को बढ़ाकर इन बैंक्स में निवेश आकर्षित करने पर विचार कर रही है। लेकिन वित्त मंत्रालय ने कुछ और ही बयान दिया है जिसके बाद PSU बैंक स्टॉक्स में वोलैटिलिटी देखी गई और निवेशकों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई।
आइए समझते हैं कि PSU बैंक्स के लिए FDI लिमिट को लेकर क्या बहस चल रही है और यह स्थिति निवेशकों के लिए क्या मायने रखती है।
क्या है मामला?
वित्त राज्य मंत्री ने यह साफ किया कि सरकार के पास पब्लिक सेक्टर बैंक्स में FDI लिमिट को बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। हाल की मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि सरकार बैंकिंग सेक्टर में सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए FDI बढ़ाने पर विचार कर रही है। लेकिन इन खबरों को खारिज करते हुए 02 दिसंबर 2025 को राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने साफ कहा कि PSU बैंक्स में FDI लिमिट बढ़ाने का कोई प्लान नहीं है।
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, PSU बैंक्स में FDI की सीमा 20% और प्राइवेट बैंक्स में 74% है। प्राइवेट बैंक्स में 49% तक निवेश ऑटोमैटिक रूट से संभव है, जबकि 49% से 74% तक जाने के लिए सरकारी मंजूरी चाहिए।
PSU बैंक्स में FDI हिस्सेदारी का पाँच साल का ट्रेंड
पिछले पाँच वर्षों में FDI सीमा भले 20% पर स्थिर रही हो, लेकिन अलग-अलग PSU बैंक्स में विदेशी हिस्सेदारी में बड़ा अंतर दिखा है। SBI पूरे समय 10% से ऊपर रहा और मार्च 2025 में 11.07% पर पहुंचा, जो सबसे अधिक है। बैंक ऑफ बड़ौदा 4.89% से बढ़कर 2024 में 12.75% तक गया, हालांकि 2025 में 9.43% पर आ गया। केनरा बैंक भी 3.31% से बढ़कर 10.55% तक पहुंचा।
इसके साथ ही, अन्य बड़े बैंक्स में मध्यम लेकिन स्थिर सुधार दिखा जहां PNB 2.30% से 5.85%, यूनियन बैंक 1.34% से 7.48%, बैंक ऑफ इंडिया 0.40% से 2024 में 4.52% (2025 में 3.89%), और इंडियन बैंक 2025 में 4.74% पर रहा। बैंक ऑफ महाराष्ट्र भी बढ़कर 1.93% तक पहुंचा।
इसके विपरीत, कमजोर बैंक्स में विदेशी रुचि बेहद कम रही जहां इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) 0.27% से नीचे, पंजाब एंड सिंध बैंक 0.76%, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया 1.27%, और UCO बैंक 0.14% से ऊपर नहीं गया।
2025 में प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में बड़े विदेशी डील्स
2025 भारत के प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर के लिए विदेशी निवेश का बेहद मजबूत साल साबित हुआ। ग्लोबल संस्थानों ने लगातार बड़े डील्स की घोषणा की, जिससे सेक्टर की मजबूती और ग्रोथ क्षमता पर उनका भरोसा साफ दिखा।
अक्टूबर में ब्लैकस्टोन ने फेडरल बैंक में ₹6,196 करोड़ का निवेश करते हुए आंशिक हिस्सेदारी खरीदी। इसी महीने, UAE के दूसरे सबसे बड़े बैंक अमीरात NBD ने RBL बैंक में $3 बिलियन की डील के साथ बहुमत हिस्सेदारी लेने का समझौता किया।
इसके अलावा, IDFC फर्स्ट बैंक को वारबर्ग पिंकस और ADIA से निवेश प्रतिबद्धताएँ मिलीं, जबकि सम्मान कैपिटल में अबू धाबी की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी ने ₹8,850 करोड़ की रुचि दिखाई। मई में जापान की सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्प ने यस बैंक में 20% हिस्सेदारी के लिए $1.6 बिलियन की घोषणा की। सिर्फ इतना ही नहीं, साल के अंत में, बैन कैपिटल ने मणप्पुरम फाइनेंस में ₹4,385 करोड़ में 18% हिस्सेदारी लेने की योजना बनाई।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
सरकार द्वारा यह साफ कह देने के बाद कि FDI लिमिट बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है, इसका सीधा असर इन्वेस्टर सेंटीमेंट पर देखा गया। PSU बैंकिंग स्टॉक्स जैसे इंडियन बैंक, PNB और अन्य सरकारी बैंक में 3% से 3.5% तक गिरावट दर्ज की गई। मार्केट को उम्मीद थी कि FDI लिमिट बढ़ने से विदेशी पूंजी आएगी, जिससे बैंक्स की वैल्यूएशन और ग्रोथ प्रॉस्पेक्ट बढ़ सकती थी। लेकिन यह उम्मीद टूटते ही स्टॉक्स में तत्काल दबाव देखा गया।
निवेशकों के लिए यह स्थिति मिलीजुली है। एक तरफ, FDI बढ़ने के संभावित फायदे है तो दूसरी तरफ, यह भी साफ है कि सरकार मौजूदा नीति को स्थिर रखना चाहती है, जिससे अचानक किसी बड़े बदलाव का जोखिम नहीं बनता। PSU बैंक्स की एसेट क्वालिटी लगातार बेहतर हो रही है और क्रेडिट ग्रोथ भी मजबूत है, इसलिए लॉन्ग-टर्म निवेशक अब भी फंडामेंटल्स के आधार पर निर्णय ले सकते हैं – लेकिन शॉर्ट-टर्म में स्टॉक मूवमेंट पॉलिसी न्यूज़ से प्रभावित रह सकता है।
भविष्य की बातें
आगे का रास्ता यह दिखाता है कि सरकार बैंकिंग सेक्टर में धीरे-धीरे सुधार को प्राथमिकता दे रही है, लेकिन FDI जैसे बड़े बदलावों को लाने में अभी कोई जल्दबाज़ी नहीं है। अगर आने वाले समय में FDI लिमिट के बारे में कोई नया प्रस्ताव आता है, तो इससे PSU बैंक्स की ग्रोथ स्टोरी को नया मोमेंटम मिल सकता है।
निवेशकों के लिए संदेश सीधा है फ़िलहाल किसी भी नीति बदलाव की उम्मीद पर ट्रेडिंग या निवेश निर्णय लेने के बजाय केवल आधिकारिक बयानों पर भरोसा करें और सावधानी से आगे बढ़ें। भविष्य में यदि FDI लिमिट पर कोई नया प्रस्ताव आता है, तो यह निश्चित रूप से PSU बैंक्स की ग्रोथ स्टोरी को नया मोमेंटम दे सकता है, लेकिन फिलहाल स्थिति स्थिर ही है।
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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