भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को बढ़ावा देने और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए PM E-DRIVE स्कीम के तहत नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह योजना शहरों और हाईवे पर चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क विकसित करने के लिए बनाई गई है, जिससे EV यूजर्स को लंबी दूरी की यात्रा और रोज़मर्रा के इस्तेमाल में आसानी हो।
यह पहल केवल ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक 30% EV पेनिट्रेशन हासिल किया जाए। हालांकि, इसके लिए भारत को अगले पांच सालों में EV अपनाने की दर को 22 प्रतिशत अंक और बढ़ाना होगा। यही कारण है कि चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत बनाना अब रणनीतिक आवश्यकता बन चुका है।
आइए समझते हैं कि यह दिशा-निर्देश क्या है और निवेशकों के लिए क्या मायने रखते है।
क्या है मामला?
28 सितम्बर 2025 की शाम को केंद्र सरकार ने ₹10,900 करोड़ की PM E-DRIVE स्कीम के तहत एक बड़ा कदम उठाते हुए लगभग 72,300 सार्वजनिक EV चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए ऑपरेशनल गाइडलाइंस जारी किए हैं। इस योजना में से ₹2,000 करोड़ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किए जाएंगे, ताकि देशभर में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए भरोसेमंद नेटवर्क तैयार हो सके।
नए नियमों के मुताबिक, सरकारी दफ्तरों, सार्वजनिक स्थलों और हाईवे पर स्थापित होने वाले चार्जिंग व बैटरी-स्वैपिंग स्टेशनों को सब्सिडी का लाभ मिलेगा। यह सहायता केवल चार्जिंग यूनिट तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसमें अपस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट और कई मामलों में EV सप्लाई इक्विपमेंट (EVSE) की लागत भी शामिल होगी।
सब्सिडी स्ट्रक्चर कैसा होगा?
नए गाइडलाइंस के तहत, सरकारी परिसर जैसे कि दफ्तर, आवासीय कॉम्प्लेक्स, अस्पताल और शैक्षणिक संस्थान में लगाए जाने वाले EV चार्जिंग स्टेशन और अपस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर पर 100% सब्सिडी दी जाएगी, बशर्ते ये चार्जर आम जनता के लिए मुफ्त उपलब्ध हों।
वहीं, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट (AAI द्वारा संचालित), सार्वजनिक क्षेत्र की OMCs के रिटेल आउटलेट, STUs द्वारा चलाए जाने वाले बस स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, नगर निगम पार्किंग, पब्लिक सेक्टर पोर्ट्स और NHAI या राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित टोल प्लाज़ा व हाईवे/एक्सप्रेसवे पर वे-साइड सुविधाओं जैसे स्थानों पर सब्सिडी का स्तर अलग होगा। यहां अपस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर पर 80% और EV सप्लाई इक्विपमेंट (EVSE) पर 70% तक सब्सिडी दी जाएगी।
इसके अलावा, शहरों की सड़के, शॉपिंग मॉल्स, मार्केट कॉम्प्लेक्स और हाईवे व एक्सप्रेसवे पर बनने वाले चार्जिंग स्टेशनों के लिए भी अपस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर लागत पर 80% सब्सिडी उपलब्ध होगी।
EV चार्जिंग नेटवर्क के लिए प्राथमिकता क्षेत्र
PM E-DRIVE स्कीम का फोकस सबसे पहले उन शहरों पर होगा जिनकी आबादी 10 लाख से अधिक (2011 जनगणना) है, साथ ही स्मार्ट सिटी मिशन और सात बड़े मेट्रो शहर जैसे कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु और अहमदाबाद से जुड़े सैटेलाइट टाउन को भी इसमें जगह मिलेगी।
इसके अलावा, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियां और नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत चिन्हित शहर इस कवरेज में नहीं आएंगे। खास बात यह है कि संस्थाओं को स्थानीय डिमांड और EV पेनिट्रेशन को देखते हुए अन्य शहरों में भी स्टेशन लगाने की फ्लेक्सिबिलिटी दी गयी है।
योजना का एक अहम हिस्सा इंटर-सिटी और इंटर-स्टेट हाईवे को EV रेडी बनाना है, जिसके लिए मार्ग चयन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और अन्य एजेंसियों की सलाह से किया जाएगा। इससे EV चार्जिंग नेटवर्क शहरी सीमाओं से निकलकर लंबी दूरी की यात्राओं तक मजबूत होगा।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
निवेशकों के दृष्टिकोण से यह योजना कई अवसर प्रदान करती है। चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग और EV मैन्युफैक्चरिंग में शामिल कंपनियों के लिए यह स्पष्ट संकेत है कि आने वाले वर्षों में उनकी डिमांड बढ़ने वाली है। सरकार का ₹2,000 करोड़ का आवंटन और 100% सब्सिडी न केवल लागत को कम करेगा बल्कि निवेश पर बेहतर रिटर्न की संभावना भी बढ़ाएगा।
पब्लिक सेक्टर और प्राइवेट सेक्टर दोनों ही कंपनियां इस क्षेत्र में लाभान्वित हो सकती हैं। इससे कैपिटल मार्केट में EV और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों में निवेश का ट्रेंड और मजबूत हो सकता है।
भविष्य की बातें
सरकार द्वारा PM E-DRIVE स्कीम के तहत EV चार्जिंग स्टेशनों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी करने का उद्देश्य सिर्फ वर्तमान ज़रूरतों को पूरा करना नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए एक मज़बूत नींव तैयार करना भी है। चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार जितना तेज़ी से होगा, उतनी ही तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों का अपनाना आसान बनेगा।
नीचे दिए गए आंकड़े इस बात को स्पष्ट करते हैं कि भारत में EV पंजीकरण किस रफ्तार से बढ़ रहा है:

इन संख्याओं से साफ है कि 2021 से 2025 के बीच EV पंजीकरण में छह गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
आगे की तस्वीर और भी बड़ी है। फॉर्च्यून बिजनेस इनसाइट्स के अनुसार, भारतीय EV मार्केट का साइज 2022 में सिर्फ US$ 3.21 बिलियन था, जो 2029 में US$ 113.99 बिलियन तक पहुंच सकता है। यह लगभग 66.52% CAGR की ग्रोथ से बढ़ रहा है।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर