सोना और चांदी न केवल भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं, बल्कि इन्हें सुरक्षित निवेश का प्रतीक भी माना जाता है। 2025 में इनकी डिमांड और प्राइस में वृद्धि की संभावना है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितताओं, केंद्रीय बैंक्स की बढ़ती खरीदारी, और भारतीय मार्केट की मजबूत डिमांड के चलते सोने और चांदी की प्राइस नए रिकॉर्ड बना सकती हैं।
ऐसे में निवेशकों और कंस्यूमर्स के लिए यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आने वाले समय में इनकी प्राइस कैसे बदलेंगी और यह बदलाव उनके लिए क्या मायने रखता है।
क्या है मामला?
सोने और चांदी की प्राइस में हाल के दिनों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। 2025 तक सोने की कीमतें ₹85,000 प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमतें ₹1,10,000 प्रति किलोग्राम तक पहुंचने का अनुमान है। यह मौजूदा प्राइस से काफी अधिक है।
जनवरी 2025 की शुरुआत में, सोने की प्राइस में ₹130 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि चांदी की प्राइस में थोड़ी गिरावट देखी गई। इसके बावजूद, प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, और कोलकाता में इनकी मांग स्थिर बनी हुई है।
डिमांड में बढ़ोतरी के कारण
सोने और चांदी की डिमांड में बढ़ोतरी के पीछे कई फैक्टर्स हैं। ग्लोबल स्तर पर केंद्रीय बैंक बड़े पैमाने पर सोने की खरीदारी कर रहे हैं, ताकि महंगाई और आर्थिक अस्थिरता के खिलाफ अपने रिज़र्व को सुरक्षित कर सकें। 2023 और 2024 में रिकॉर्ड खरीदारी के बाद, 2025 में भी यह रुझान जारी रह सकता है।
भारतीय बाजार की बात करें तो यहां पारंपरिक रूप से सोने और चांदी की डिमांड अधिक रहती है। शादी-विवाह और त्योहारों में इनका महत्व और बढ़ जाता है। इसके साथ ही, व्यक्तिगत निवेश और आभूषणों की खरीदारी में तेजी भी डिमांड को प्रोत्साहित कर रही है।
सोना और चांदी का प्रदर्शन
2024 में सोना और चांदी ने निवेशकों को बेहतरीन रिटर्न दिया। सोने की कीमत 31 अक्टूबर 2024 को ₹80,000 प्रति 10 ग्राम के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची, जबकि चांदी 23 अक्टूबर को ₹1,00,000 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। दोनों धातुओं ने 25% से ज्यादा का रिटर्न दिया, जो सालभर में निवेशकों के लिए एक बड़ा मुनाफा साबित हुआ।

नोट: सोने की प्राइस 24 कैरेट प्रति 10 ग्राम और चांदी प्राइस रुपये प्रति किलोग्राम दी गयी है।
इनकी प्राइस में यह उछाल ग्लोबल आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता के कारण आया। लोगों ने इन धातुओं को सुरक्षित निवेश का माध्यम माना, खासकर तब जब अन्य एसेट्स में जोखिम बढ़ रहा था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह ट्रेंड आने वाले वर्षों में भी जारी रह सकता है, क्योंकि सोना और चांदी हमेशा से अनिश्चित समय में भरोसेमंद निवेश माने जाते हैं।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
निवेशकों के लिए 2025 कई नए अवसर लेकर आ सकता है। सोने और चांदी की प्राइस में संभावित वृद्धि उनके पोर्टफोलियो के लिए सुरक्षा और स्थिरता प्रदान कर सकती है। CNBC TV18 के अनुसार, एक्सपर्ट्स का कहना है कि 2025 में सोने की प्राइस को गिरती ब्याज दरों और केंद्रीय बैंक्स की खरीदारी का सहारा मिलेगा और निवेशक 10-12% के संभावित रिटर्न की उम्मीद कर सकते है।
सोने और चांदी में निवेश के इच्छुक निवेशक अपने पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन लाने के लिए 10-15% सोने और चांदी के आवंटन कर सकते है। इसके साथ ही निवेशक ETF और डिजिटल गोल्ड जैसे निवेश माध्यम भी निवेशकों को इन धातुओं में सरल और कुशल तरीके से निवेश कर सकते हैं।
भविष्य की बातें
ICICI डायरेक्ट के अनुसार, सोने की प्राइस आगामी समय में भी बढ़ सकती हैं, क्योंकि बढ़ते जिओपॉलिटिकल तनाव और संभावित व्यापार युद्ध के कारण आर्थिक विकास पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर लोग सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में चुनेंगे। इसके साथ ही, केंद्रीय बैंक्स की नीति में नरमी जारी रहने की संभावना है, क्योंकि महंगाई उनके लक्ष्यों के करीब पहुंच चुकी है। मध्य पूर्व और पूर्वी यूरोप में जारी जिओपॉलिटिकल तनाव सोने को अनिश्चितताओं से बचने का एक मजबूत विकल्प बना सकते हैं।
चांदी भी सोने के साथ-साथ ₹1,10,000 प्रति किलोग्राम तक बढ़ सकती है। इस वृद्धि के पीछे रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहन मार्केट से आने वाली मजबूत इंडस्ट्रियल डिमांड है।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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