गोल्ड लोन स्टॉक्स: क्या निवेश के लिए देर हो चुकी है?

गोल्ड लोन स्टॉक्स: क्या निवेश के लिए देर हो चुकी है?
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भारत में गोल्ड लोन मार्केट में एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। जब गोल्ड की प्राइस रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही हैं और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए गोल्ड खरीदना मुश्किल हो रहा है, तब गोल्ड लोन कंपनियों के लिए यह एक सुनहरा अवसर बन गया है। मौजूदा स्थिति में जहां गोल्ड लगभग 1,23,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव तक पहुंच गया है, वहीं इस गोल्ड लोन सेक्टर की कंपनियों के शेयर अपने 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब ट्रेड कर रहे हैं। मुथूट फाइनेंस के शेयर 3,180 रुपये पर ट्रेड कर रहे हैं, जो इसके 52-सप्ताह के हाई 3,263 रुपये के काफी करीब है।

आइए समझते है कि भारत में गोल्ड लोन मार्केट की क्या स्थिति है और भविष्य में क्या संभावनाएं है।

क्या है मामला?

गोल्ड लोन सेक्टर की वृद्धि मुख्य रूप से हाई गोल्ड वैल्यूएशन से प्रेरित रही है। FY20 से FY25 के बीच गिरवी रखे गए गोल्ड का वॉल्यूम केवल 1.7% की मामूली CAGR से बढ़ा है, लेकिन औसत लोन टिकट साइज इस अवधि में दोगुने से अधिक हो गए। इसके साथ ही, FY24-FY25 में ऑर्गनाइज़्ड गोल्ड लोन 26% की तेज वार्षिक दर से बढ़कर मार्च 2025 तक ₹11.8 ट्रिलियन तक पहुंच गया। अब बैंक इस संगठित मार्केट में लगभग 82% हिस्सेदारी रखते हैं, जो पहले की तुलना में अधिक है, जबकि NBFCs का हिस्सा मार्च 2021 के 22% से घटकर 18% रह गया है।

जून 2025 तक NBFCs के गोल्ड लोन AUM ₹2.4 ट्रिलियन तक पहुंच गए, जो YoY करीब 41% की ग्रोथ दर्शाता है। हालांकि यह सेगमेंट अभी भी कुछ बड़े प्लेयर्स तक सीमित है जिसमें शीर्ष चार NBFCs की मार्केट हिस्सेदारी 81% है, जो मार्च 2022 के 90% से कम हुई है।

बेहतर मार्जिन की कहानी

गोल्ड लोन कंपनियों की सबसे बड़ी ताकत उनका हाई नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) है। मुथूट फाइनेंस का NIM जून 2025 तिमाही में 12.15% था, जो पिछले साल की समान अवधि के 11.51% से बेहतर है। इसकी तुलना में SBI का डोमेस्टिक ऑपरेशन में NIM 3.02% और HDFC बैंक का 3.5% था। यह अंतर स्पष्ट रूप से दिखाता है कि गोल्ड लोन कंपनियों के पास ट्रेडिशनल बैंक्स की तुलना में काफी बेहतर मार्जिन हैं।

मुथूट फाइनेंस की स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट जून 2025 तिमाही में 2,046.2 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो YoY आधार पर लगभग 90% की ग्रोथ है। यह आंकड़ा इस सेक्टर की मजबूत प्रोफिटेबिलिटी को स्पष्ट रूप से दिखाता है।

गोल्ड लोन सेक्टर में तेज़ रफ्तार

FY24-FY25 के दौरान गोल्ड लोन सेक्टर लगभग 26% की CAGR से बढ़ते हुए मार्च 2025 तक ₹11.8 ट्रिलियन तक पहुंच गया है। इस अवधि में बैंक्स की वृद्धि दर NBFCs से अधिक रही, जिसके चलते संगठित मार्केट में NBFCs की हिस्सेदारी घट गई है।

ICRA के आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 तक NBFCs के गोल्ड लोन AUM ₹2.4 ट्रिलियन तक पहुंच गए जो 41% YoY की मजबूत वृद्धि दर्शाता है। हालांकि यह सेगमेंट अभी भी केंद्रित है, क्योंकि शीर्ष चार NBFCs की हिस्सेदारी 81% है, जो मार्च 2022 के 90% से कम हुई है।

यह ट्रेंड बताता है कि गोल्ड लोन मार्केट तेजी से विस्तार कर रहा है, लेकिन प्रतिस्पर्धा बढ़ने और बैंकिंग सेक्टर की आक्रामक रणनीतियों ने अब NBFCs के लिए चुनौतीपूर्ण माहौल तैयार कर दिया है।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

मार्केट हिस्सेदारी में गिरावट के बावजूद, गोल्ड लोन NBFCs निवेशकों के लिए एक आकर्षक अवसर बनी हुई हैं। भले ही मार्केट में उनका हिस्सा छोटा हो गया हो, लेकिन मार्केट इतनी तेज़ी से बढ़ रहा है कि उनके हिस्से का वास्तविक साइज भी बड़ा हो रहा है। ICRA का अनुमान है कि FY2026 में NBFCs गोल्ड लोन के AUM में 30−35% की और वृद्धि होगी। इस क्षेत्र में शीर्ष चार NBFCs का 81% मार्केट पर कब्ज़ा है, जो उन्हें मज़बूत बनाता है।

रिटर्न के मामले में, मन्नापुरम फाइनेंस और मुथूट फाइनेंस ने YTD 40% से अधिक रिटर्न के साथ निफ्टी और बैंक निफ्टी दोनों से बेहतर प्रदर्शन किया है।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार, वैल्यूएशन के लिहाज से, मन्नापुरम फाइनेंस अनुमानित 15x FY26E P/E पर और मुथूट फाइनेंस करीब 17x FY26E P/E पर ट्रेड कर रही है। वहीं, मिड-साइज बैंक फ़ेडरल बैंक लगभग 12x FY26E P/E पर उपलब्ध है। मध्यम अवधि में गोल्ड लोन NBFCs के ग्रोथ की संभावनाएं मजबूत दिख रही हैं, लेकिन फिलहाल इनके वैल्यूएशन थोड़े महंगे लग रहे हैं। आने वाले समय में यह तय होगा कि यह तेज़ ग्रोथ अपेक्षाओं के अनुरूप साबित होती है या नहीं।

भविष्य की बातें

आने वाले वर्षों में भारतीय गोल्ड लोन मार्केट की रफ्तार धीमी पड़ती नहीं दिख रही। ICRA का अनुमान है कि FY2027 के अंत तक ऑर्गेनाइज्ड गोल्ड लोन मार्केट ₹18 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण है भारतीय घरों में मौजूद विशाल मात्रा में ‘फ्री गोल्ड-होल्ड’, यानी वह गोल्ड जो अभी तक लोन के लिए उपयोग में नहीं लाया गया है।

अनुमानों के अनुसार, भारत में 25,000–27,000 टन गोल्ड है, जिसकी वैल्यू ट्रिलियन डॉलर में है। बढ़ती महंगाई, सीमित रोजगार अवसर और शहरी क्षेत्रों में स्थिर आय के कारण परिवार अब अपने सोने को गिरवी रखकर व्यवसाय, शादी या आपात जरूरतों के लिए फंड जुटा रहे हैं। यह ट्रेंड दिखाता है कि गोल्ड केवल परंपरा का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि एक इमरजेंसी एसेट बन गया है जो गोल्ड लोन इंडस्ट्री को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।

*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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