भारत, विश्व का सबसे बड़ा शुगर उत्पादक और उपभोक्ता देशों में से एक है। हाल ही में, सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन (1 मिलियन टन) शुगर के निर्यात की अनुमति दी है। लेकिन, यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब देश में इथेनॉल की डिमांड बढ़ रही है और शुगर उत्पादन को लेकर चिंताएं हैं।
हम इस निर्णय के पीछे के कारणों, इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्यों, और इससे जुड़े आर्थिक प्रभावों पर चर्चा करेंगे।
क्या है मामला?
भारत सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन शुगर के निर्यात की अनुमति देने का फैसला किया है। यह निर्णय एक उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया, जहां देश के शुगर उत्पादन अनुमान और मौजूदा भंडार स्तर की समीक्षा की गई। जल्द ही एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी, जिसमें निर्यात नीति से जुड़ी विस्तृत जानकारी, बैच आवंटन और मात्रा संबंधी विवरण शामिल होंगे।
जैसा कि रॉयटर्स में उल्लेख किया गया है, फ़ूड मिनिस्टर प्रहलाद जोशी के अनुसार, सरकार ने इस निर्यात कोटा को मंजूरी दी है ताकि शुगर क्षेत्र को सशक्त किया जा सके, प्राइस की स्थिरता बनाए रखी जा सके, और 50 मिलियन गन्ना उत्पादकों का समर्थन किया जा सके।
पिछले पांच वर्षों (2022-23 तक) में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शुगर निर्यातक रहा, जहां हर साल औसतन 6.8 मिलियन टन शुगर का निर्यात किया गया। हालांकि, 2023-24 मार्केटिंग वर्ष में घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए निर्यात पर रोक लगा दी गई थी।
इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्यों की ओर बढ़ता भारत
भारत सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। दिसंबर में, पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का स्तर 18.2% के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि अगले दो महीनों में 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा।
भारत, जो दुनिया में कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है, अब इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठा रहा है। इथेनॉल, जो मुख्य रूप से गन्ना और अन्य कृषि प्रोडक्ट्स से तैयार किया जाता है, भारत की ऊर्जा नीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। शुगर मिलें गन्ने का अधिक उपयोग इथेनॉल उत्पादन के लिए कर रही हैं, जिससे देश की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो रही है।
भारत का शुगर उत्पादन और निर्यात
भारत के प्रमुख शुगर उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, कर्नाटका और उत्तर प्रदेश मिलकर देश के कुल उत्पादन का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखते हैं। इन राज्यों में गन्ने की उपज में गिरावट के कारण 2024-25 सीजन के लिए उत्पादन अनुमान को कम कर दिया गया है।
रॉयटर्स के अनुसार, शुगर उत्पादन लगभग 27 मिलियन टन तक गिर सकता है, जो पिछले साल के 32 मिलियन टन से कम है, और यह सालाना उपभोग 29 मिलियन टन से नीचे रहेगा।
भारत, जिसका शुगर निर्यात मुख्य रूप से इंडोनेशिया, बांग्लादेश और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में होता है, 2022-23 (पांच वर्षों) तक दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शुगर निर्यातक था। इस दौरान, भारत का औसत निर्यात लगभग 6.8 मिलियन टन वार्षिक था। हालांकि, 2023-24 मार्केटिंग वर्ष में भारत ने शुगर निर्यात की अनुमति नहीं दी।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
इथेनॉल से जुडी प्रमुख शुगर उत्पादक जैसे धामपुर शुगर मिल्स, श्री रेणुका शुगर आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही, इथेनॉल उत्पादन टेक्नोलॉजी में अग्रणी कंपनी प्राज इंडस्ट्रीज ने भी शेयर मार्केट में अच्छा प्रदर्शन किया है।

इसके साथ ही, इथेनॉल मिश्रित फ्यूल की बढ़ती स्वीकृति और टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, और हुंडई मोटर्स जैसे प्रमुख निर्माताओं द्वारा 100% बायो-इथेनॉल पर चलने वाली गाड़ियों का उत्पादन इस सेक्टर की ग्रोथ की ओर इशारा कर रही है।
भविष्य की बातें
भारतीय शुगर और एथेनॉल इंडस्ट्री के लिए आने वाला समय संभावनाओं से भरा हुआ है। सरकार की नीतियां, जैसे कि ग्रीन फ्यूल्स को बढ़ावा देना और गन्ना किसानों की आय बढ़ाना, इस दिशा में सकारात्मक संकेत हैं।
इसके साथ ही, रॉयटर्स के अनुसार, इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महानिदेशक दीपक बलानी का मानना है कि “अगले साल का उत्पादन काफी मजबूत होने की संभावना है, इसलिए 10 लाख टन के सीमित निर्यात की अनुमति मिलना शुगर इंडस्ट्री के लिए अच्छी खबर है।”
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर