भारत दुनिया के सबसे बड़े टेक्निकल टैलेंट हब्स में तेज़ी से उभर रहा है। डेवलपर इकोसिस्टम का विस्तार, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) में तेज़ अपनाने की दर और नीतिगत समर्थन ने देश को एक नए टेक्नोलॉजी युग में प्रवेश कराया है। सरकार और इंडस्ट्री, दोनों, AI-चलित इनोवेशन को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, भारत का AI इकोसिस्टम अब केवल टेक सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि हेल्थकेयर, कृषि, शिक्षा, शहरी प्रशासन और एनर्जी जैसे सेक्टर्स में भी तेज़ी से फैल रहा है। यह संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में AI भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का मुख्य स्तंभ बनने वाला है।
आइए समझते है कि भारत कैसे मजबूत डेवलपर बेस के साथ AI की दुनिया का ग्लोबल लीडर बनने की राह पर है।
क्या है मामला?
भारत का डेवलपर इकोसिस्टम अब एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुँच चुका है जहाँ इसकी गति और पैमाना दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। GitHub के अनुसार आज भारत में 17 मिलियन डेवलपर्स सक्रिय हैं और 2024 में यह संख्या 28% YoY की तेज़ रफ्तार से बढ़ी है। यह वृद्धि केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि अब इनोवेशन कहाँ हो रहा है, और ग्लोबल डिजिटल भविष्य किस दिशा में आगे बढ़ रहा है।
GitHub की ऑक्टोवर्स (Octoverse) 2025 रिपोर्ट दिखाती है कि सिर्फ एक साल में भारत ने 5.2 मिलियन नए डेवलपर्स जोड़कर दुनिया भर में हर तीन में से एक नए डेवलपर का योगदान अकेले दिया है। यह भारत को GitHub पर नए डेवलपर्स का सबसे बड़ा स्रोत बना देता है।
यह डेवलपर और AI बूम बड़े पैमाने पर नीतिगत समर्थन की वजह से संभव हुआ है, जिसमें बजट 2026 में घोषित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और AI निवेश की योजनाएँ भी शामिल हैं।
भारत का नया टेक मोमेंट
भारत की डेवलपर कम्युनिटी आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ संख्या से ज़्यादा मायने रखता है उनका माइंडसेट और यह माइंडसेट पूरी तरह AI-फर्स्ट है। यही वजह है कि GitHub पर आने वाले लगभग 80% नए डेवलपर्स अपने पहले ही सप्ताह में GitHub Copilot का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। उनके लिए AI कोई अतिरिक्त टूल नहीं, बल्कि शुरुआत से ही कार्यप्रक्रिया का हिस्सा है।
अक्टूबर 2025 तक भारत, पब्लिक जेनरेटिव AI प्रोजेक्ट्स में योगदान देने के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर है। 2024 में AI-संचालित प्रोजेक्ट्स में भारतीय योगदान 79% बढ़ा, और कुल डेवलपर कॉन्ट्रिब्यूशन्स में 95% की YoY वृद्धि ने भारत को अमेरिका और हॉन्ग कॉन्ग के बाद ग्लोबल रैंकिंग में तीसरे स्थान पर पहुंचा दिया है।
यह उछाल किसी संयोग का परिणाम नहीं है। भारतीय डेवलपर्स अब AI को बाद में जोड़ने वाली सुविधा की तरह नहीं देखते, बल्कि वे शुरुआत ही ऐसी करते हैं जहाँ AI को काम के केंद्र में रखा जाता है। यही वजह है कि ERPNext जैसे भारतीय ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म वास्तविक बिज़नेस समस्याओं को हल कर रहे हैं। वहीं ओपन हेल्थकेयर नेटवर्क जैसी पहलें छोटे-छोटे टीमों को GitHub Copilot की मदद से हेल्थकेयर, एजुकेशन, एग्रीकल्चर और कॉमर्स में तेज़ गति से समाधान बनाने में सक्षम बना रही हैं।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
बजट 2026-27 का सबसे बड़ा संकेत यह है कि भारत अब AI, सेमीकंडक्टर्स और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर को भविष्य की नई अर्थव्यवस्था का आधार मानकर आगे बढ़ रहा है। सरकार ने ISM 2.0 के जरिए चिप वैल्यू चेन के हाई-वैल्यू हिस्सों जैसे उपकरण, मटेरियल और ‘फुल-स्टैक इंडियन IP’ पर फोकस बढ़ा दिया है। इलेक्ट्रॉनिक कम्पोनेंट स्कीम का आउटले बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ करना दर्शाता है कि भारत अब डिजिटल इकॉनमी की फिजिकल नींव खुद तैयार करना चाहता है।
निवेशकों के लिए इसका मतलब है कि हार्डवेयर, चिप डिज़ाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, और AI इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स में तेज़ पूंजी प्रवाह की संभावना है। 2047 तक विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए टैक्स हॉलिडे की घोषणा भारत को एक ग्लोबल डेटा हब में बदल सकती है, जिससे पावर, रियल एस्टेट और फाइबर ऑप्टिक्स जैसे सेक्टर भी लाभान्वित होंगे।
AI को एक यूटिलिटी की तरह देखने वाला यह दृष्टिकोण जैसे Bharat-VISTAAR का लॉन्च हेल्थकेयर, एग्रीटेक, एजुकेशन टेक और सोशल-टेक सेक्टर्स में नई डिमांड पैदा करेगा। प्राइवेट सेक्टर के लिए संदेश स्पष्ट है: बढ़ता भारतीय डेवलपर बेस, AI+ डोमेस्टिक IP+ स्थानीयकृत डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर आने वाले दशक की प्रतिस्पर्धा तय करेंगे।
भविष्य की बातें
आने वाले वर्षों में भारत को ग्लोबल AI नेतृत्व की दौड़ में प्रमुख प्लेयर माना जा रहा है। सरकार की योजनाएँ, इंडस्ट्री की डिमांड और डेवलपर कम्युनिटी का तीव्र विस्तार देश को AI इनोवेशन के नए युग में प्रवेश करा रहा है। बिज़नेस वर्ल्ड के अनुसार, बजट 2026 भारत को ‘समावेशी AI-नेतृत्व वाली वृद्धि’ की ओर ले जा रहा है, जहाँ डोमेस्टिक AI क्षमताएँ ग्लोबल स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करेंगी।
भारत की AI क्षमताओं के विस्तार के साथ ही डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर एडवांस होना, डेवलपर-फोकस्ड नीतियों का निर्माण और स्टार्टअप इकोसिस्टम का सशक्तिकरण देश को टैलेंट, तकनीक और इनोवेशन तीनों क्षेत्रों में नई पहचान दिला रहा है।
भारत का डेवलपर बूम अब केवल एक टेक्निकल ट्रेंड नहीं, बल्कि भारत के आर्थिक भविष्य का आधार बनता जा रहा है जहाँ AI, डेटा और इनोवेशन एक साथ मिलकर आने वाले दशक की विकास यात्रा तय करेंगे।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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